तपस्या एक औषधि है-त्रिशलाकुमारी जी अनितादेवी नाहटा के मासखमण तप का अभिनन्दन समारोह आयोजित हुआ
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तपस्या एक औषधि है-त्रिशलाकुमारी जी
अनितादेवी नाहटा के मासखमण तप का अभिनन्दन समारोह आयोजित हुआ
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तपस्या एक औषधि है-त्रिशलाकुमारी जी
अनितादेवी नाहटा के मासखमण तप का अभिनन्दन समारोह आयोजित हुआ
गंगाशहर 21 अगस्त 2026। श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, गंगाशहर द्वारा अनिता देवी नाहटा धर्मपत्नी श्री राजेन्द्र नाहटा के मासखमण तप की अनुमोदना व अभिनन्दन का कार्यक्रम तेरापंथ भवन गंगाशहर में आयोजित किया गया। तेरापंथ भवन में प्रातःकालीन प्रवचन में श्रीमती अनितादेवी नाहटा के मासखमण (28) की तपस्या में अपने विचार व्यक्त करते हुए साध्वीश्री त्रिशलाकुमारी जी ने कहा कि हजार रोगों की अनुपम औषधि है तपस्या तपस्या जहाँ काया को कुन्दन बनाती हैं। वहीं मन में प्रसन्नता और शान्ति शूकून का अहसास कराने वाली हैं।
एक रोग की हजारों दवा हो सकती है लेकिन तपस्या हजारों रोगों की एक दवा है।आध्यात्मिक दृष्टि से कर्मों की निर्जरा तपस्या के द्वारा ही हो सकती है। भव-भव के संचित पाप तपस्या के द्वारा आसानी से काट सकते हैं।
साध्वीश्री ने कहा तप एक छोटा सा शब्द है शब्द रचना जितनी लघु है उसका कार्य उतना ही महान है त-तत्क्षण, प-पाप जिस प्रवृति से हमारे तत्क्षण पापकार्मों का विनाश होता है वहीं उत्कृष्ट तपस्या है। तपस्या में आत्मबल, मनोबल और सहयोग बल हो तभी तपस्या के क्षेत्र में आगे बढ़ सकते है। श्रीमती अनिता ने हिम्मत के साथ 28 दिनों की तपस्या कर नाहटा कुल का नाम रोशन किया है वहीं जिन शासन तेरापंथ की नींव गहरी बनाई है।
साध्वी श्री सम्यक्त्व यशा जी ने कहा कि कोरा शरीर तपता है तब अंहकार बढ़ता है।शरीर और इन्द्रिय दोनों तपते है तब संयम बढ़ता है।शरीर इन्द्रिय और मन तीनों तपते है तब आत्मा का द्वार खुलता है।शरीर इन्द्रिय मन और बुद्धि चारों तपते है तब आत्मा का साक्षात्कार होता है।
साध्वी श्री कल्पयशा जी ने कहा कि तपस्या करने से कर्मों का क्षय होता है। तपस्या छोटी छोटी भी की जा सकती है। नवकारसी,पोरसी उपवास,अठाई आदि तप करके हम अपनी आत्मा को कर्मों से हल्की कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि गंगाशहर में नवरंगी तप अनुष्ठान शुरू हो रहा है। और रविवार को जप अनुष्ठान की साधना की जायेगी। साध्वी श्री रश्मिप्रभा जी ने सुमधुर गीतिका का संगान किया।
तेरापंथ सभा के मंत्री जतन लाल संचेती ने कहा कि आत्म शोध प्रक्रिया में तप के द्वारा परिमार्जन होता है। संवर आने वाले कर्म परमाणुओं को रोकता है और संचित कर्म परमाणुओं का शोधन तप के द्वारा होता है। इसलिए तप मुक्ति का साधन है।
तप अनुमोदना में तेरापंथ सभा के अध्यक्ष श्री नवरतन बोथरा, तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष श्री देवेंद्र डागा, महिला मंडल के मंत्री श्रीमती रेखा चोरड़िया व नाहटा परिवार से श्रीमती रश्मि दसाणी, श्रीमती सुमन नाहटा नाहटा , श्री सुरेन्द्र दसाणी , श्री धर्मेन्द्र डाकलिया ने अपने विचार व्यक्त किए। परिवार से सामुहिक गीतिका के द्वारा तप की अनुमोदना की।
जैन लूणकरण छाजेड़ ने गुरूदेव से प्राप्त संदेश का वाचन किया। कार्यक्रम का संचालन सभा के मंत्री जतन लाल संचेती ने किया।
श्रीमती अनिता देवी नाहटा का तेरापंथ सभा गंगाशहर की ओर से साहित्य, पताका व मेमोंटो के द्वारा अभिनन्दन किया गया।
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