रेत का जीवन
रेत का जीवन रेत का भी जीवन है अपना संसार है समाई धूप की गर्मी है आसपास बिखरे कांटे हैं कहीं रेत पर गुलिस्तां बने कहीं ताल तलैया खुदे कहीं गगनचुंबी इमारतें हैं खेत किनारे रेललाइन है इसी रेत में पनपे पेड़ हैं मंदिर इसी पर खड़े मस्जिद इस पर बनी गुरुद्वारे-चर्च भी रेत पर घर भी बनाये हैं लोगों ने रेत पर सपने भी बुने हैं लोगों ने रेत पर हवा जब बहती है तेज रेत भी उड़ती है रेत पर लहराता जीवन संवरता रहता नश्वर यह संसार रेत में ही मिल जाता रेत का ही जीवन है