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Showing posts from November, 2012

सिंधी नाटक कृपालु संत साधु वासवाणी

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सिंधी नाटक कृपालु संत जे पहिरियें सीन जो आखिरी भांङों पेशु आहे -- ( इयो नाटक हिंदू अजमेर में अरबी सिंधीअ में साया थिअलि आहे ) ... दादा साहिब चवनि था, डिसो। जहिं संत माण्हूंनि खे इ न बल्कि हरेकु प्राणीअ खे हिकु जेहिड़ो भगवान जो सृजन बुधायो हो, उन्हींअ इ संत लाइ झूनी ऐं नई टहीअ में तकरार जी गाल्हि बुधी मूखे खिल इ त इन्दी। माण्हूं चवनि था, दादा तव्हां असांखे साधु वासवाणी साहिब बाबत जाण ड्यो। दादा जे पी वासवानी साहिब चवनि था, - संत साधु वासवानी त पाण चवन्दा हुआ, जीव मात्र में फर्कु न कजे। ऐं तव्हां उननि इ संतनि जी गाल्हियूंनि खे दरकिनार करे जीव मात्र इ न बल्कि खुद उननि संतनि जे नाले ते बि झेड़ो था कयो। इननि संतनि त पहिंजी सजी हयाती तप करे भगवान खां माण्हूनि जो भलो घुर्यो। माण्हुनि जे वरी जोर डिहण ते दादा साहिब कृपालु संत साधु वासवानी जी हयाती ऐं उननि जे उपदेशनि बाबत तफसील सां गाल्हियूं बुधाइनि था। इनि वक्ति इ पार्टी में दादा श्याम जो भजन गूंजे थो, - अलख धाम मां नाल्हे मौत तिनि लाइ, अंखियूंनि जिनि जूं निहारनि, पहाड़नि त तिनि डे, जीअं प्यारनि खे पुकारनि! रहनि रहम में से त आल्यिूंनि अं...

अजब कीमियासाज ...

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sckech by & PIYU अजब कीमियासाज हैं 'वे' लोग । मिट्टी को सोना बताते हैं ...  । लेकिन इससे नुकसान न सोने को होता न मिट्टी को । क्योंकि तिजारत पसंद हैं बाकी लोग... अपने मिट्टी के ढेलों की भी कीमत  कीमियासाजों  से ही सोने के भाव वसूल लेते हैं ।  = आखिर नुकसान कीमियासाज को ही होता है ।
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प्रकृति पहले स्वयं बदलती है फिर हमें बदलना ही पड़ता है। Novelist Mohan Thanvi Bikaner प्रकृति पहले स्वयं बदलती है फिर हमें बदलना ही पड़ता है।

पांच रुपए की दीर्घ कथा

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Hindi / Sindhi / Rajasthani Novelist Mohan Thanvi  पांच रुपए की दीर्घ कथा-   बाबूजी साग वाले से बोले -  बेटा चार टाइम के लिए 2-2 रुपए की मिर्च धनियां अदरक और 5-5रुपए की पालक मैथी मूली तोल दोगे या ज्यादा का लूँ ? साग वाले ने कहा काफी है बाबूजी । आपको न दूंगा तो जीवन कैसे सुधारूंगा । और एक रुपया खुला न हो तो 20 रुपए ही दे देना । रुपए चुका कर साग से भरा थैला संभाल बाबूजी बोले - महंगाई को तो पंख लगे हैं । वृद्धावस्था पेंशन के हम दोनों को मिलने वाले 500 रुपए से हम दोनों का गुजारा नहीं होता बेटा । जाने लगे कि एक बच्चे ने साग वाले की पीठ पर चढ़ते हुए कहा , बाबा स्कूल जा रहा हूं खर्ची दो । साग वाले ने उसे लाड़ करते हुए 5 रुपए दिए । बच्चा तुनक कर बोला - ये क्या बाबा, 5 रुपए की तो मिर्ची भी नहीं आती और मुझे लेनी है चॉकलेट। कम से कम 50 रुपए लूंगा । साग वाले ने बाबूजी से नजरें चुराते हुए 50 रुपए देकर बच्चे को विदा किया । बाबूजी भी रुके नहीं । साग वाला मुझसे बोला - देख लो मास्टर जी । चॉकलेट 50 और साग 5 का, इसलिए महंगाई तो बढ़ेगी ही । 

गीत जीत रा गावां ला जी... करणी माता जावांला...

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गीत जीत रा गावां ला जी... करणी माता जावांला... देशनोक में करणीमाता जी के भी दर्शन किए तो अहमदबाद से आए भतीजे पिंटू ने काबा के दर्शनार्थ बहुत जतन किए... श्वेत काबा को तो कैमरे में नहीं ला सके...

गीत जीत रा गावां ला जी... करणी माता जावांला...

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गीत जीत रा गावां ला जी... करणी माता जावांला... देशनोक में करणीमाता जी के भी दर्शन किए तो अहमदबाद से आए भतीजे पिंटू ने काबा के दर्शनार्थ बहुत जतन किए... श्वेत काबा को तो कैमरे में नहीं ला सके...

लहरें सागर की / उनका ख्याल भी ...

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उनका ख्याल भी  लहरें सागर की ...     उनकी मुस्कान भी  कहकहा  मान  दिल  धड़क धड़क जाता है ...   वो  आंख की कोर से देखते हैं  आहट पे ...  फिजां खुशबूदार हो जाती है ...   वो तो हैं हीं बलखाती उमंगें ...  उनका ख्याल भी  लहरें सागर की  लगता है ...  दिल  धड़क धड़क जाता है ...

बचपन की दोस्ती और किशोरवय की मोहब्बत

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भुलाने लगे कोई जब तो... ठहरे हुए पानी में... कंकर मार कर ... हिलोरे उठाना, बताना... बचपन की दोस्ती और... किशोरवय की मोहब्बत... कम नहीं होती ताउम्र ... ... वो भी जानते हैं... ये सब... फिर भी... रहते क्यों दूर दूर... ... बता दो कोई उन्हें ये... सपने देखे हैं---  उनकी भी आंखों में--- हमने भरपूर !

अबकै दीवाली री मंगल वेला मायड़ भाषा मान्यता सागै..

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दीवाली रा दीआ दीठा अबकै... गजानंद जी रिद्धि सिद्धि सागै... महालक्ष्मी विष्णु जी सागै... अबकै दीवाली री मंगल वेला मायड़ भाषा मान्यता सागै... जै जै गणेश जै जै महालक्ष्मी... जै जै मां मरु भूमि... जै जै मायड़ भाषा ... शुभ मंगल लाभ दीपावली

नूवीं पीढ़ी इण ग्यानगंगा में डुबकी लगावण सूं वंचित नीं रै जावै ...kailandar sun barai ... Rajasthani Novel se chuninda ansh....

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kailandar sun barai ... Rajasthani Novel se chuninda ansh... राजस्थानी नावेल कैलंडर सूं बारै से चुनंदा अंश ... बाबोसा आपरै अ‘र समाज मांय जित्तो बदळाव देख्यो, ओ सगळो बीयांनै बारै सूं आयोड़ा पण अबै पकायत अठै रा ई पिछाण बणायोड़ा इण लोगां रै बदळाव सूं कमती लाग्यो। राजस्थान मांय बदळाव में इयां लोगां रो घणो महतव है। बंटवारै री पीड़ हिरदै में दाब्योड़ा अठै आवंणआळा घणा है। बंटवारै सूं पैळी आयोड़ा लोगां आपरी जगां अ‘र पिछाण सहर में बणा ली ही। अबै सगळा अठै रा ई यानी राजस्थानी ई गिणीजै। बाबोसा ठीक ही कैवंता हा - अेक मारग सूं जावै कित्ताई ऊंट, कित्तीई अरथियां अ’र ठाकुरजी री सोभाजातरा निकळै टाबर स्कूल भी अठै सूं ही जावै जुआरी, सट्टेबाज भी ईं मारग रो जातरी बळद अ’र बस-ट्रक भी ईं मारग सूं बैवै कोई तीरथ करै कोई पूगै राज में मारग तो मारग रैवै मिनख री सोच बणै मरज मेलोडी बीं बगत तो मरज री बात जाण कोनि सकी पण जद खुद राजस्थान रै जीवटआळा मिनखां सूं मिल’र प्रकष्ति सूं संघर्ड्ढ करणो सीख्यो तो जाण सकी कै ओ मरज कांई होवै। इण मरज री जाण बीनैं राजस्थान रै जीवटआळा मिनखां सूं मिल’र होयी। अे जीवटआळा मिनख आपरै जीवन स...

एलियन और सिनेमाई जादू ... क्या यह पौराणिक है...

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एलियन और सिनेमाई जादू ... क्या यह पौराणिक है... ! 2009 में प्रकाशित सिंधी नॉवेल केदार साहब से चुनिंदा और संपादित अंश... एलियनए कींअ न गोलमटोल मुंह वारो सिनेमा में डेखारियो अथवूं! परए असांजे पौराणिक ग्रन्थनि में बि त एहिड़नि चेहरनि जी गाल्हि डाडी बुधाइन्दी आहे! झूलेलाल! केतराई दफा पाड़े में गोपाल डिठो आहेए होलीअ.डियारीअ खां अगु सिन्धी.पंजाबीए मुल्तानी पाड़े वारा भितनि ते गाइं जे छेणे सांए सिन्दूर ऐं बियूनि रंगदार शयूनि सां ऐहिड़ा लीका पाइन्दा आहिनिए जेके एलियन वांङुरु इ त लगन्दा आहिनि! घणो करे लीका पाइण जो कमु बुढ़यूं माइयूं कन्दयूं आहिनि। त छाण्ण्ण् त छा असांजी सिन्ध में माण्हूनि खे ऐहड़े एलियन जी पहिरी खां इ खबरु हुई! उननि एलियननि खे जूने जमाने में माण्हू देवी.देवताए पित्तर या केंहिं बे नाले सां पुकारीन्दा हुवा! गोपाल पहिंजी एहिड़नि एलियननि जी दुनिया में गुमु हो ऐं रामी पहिंजी डॉल खे डाडीअ जे अगियूं नचाये पूछेसि पई . अम्माए इनि डॉल खे गाल्हाइणि केंहि सेखारियो! सखीबाईअ खे जयपुर जे डॉ कन्हैया अगनाणी जो लिख्यलि किताबु यादु आयो . बबलूअ खे सिन्धी सेखारियो न बाबा! अजु जे बबलूअ खे त सिन्धी सेखा...

लकीरें ...आंखें ...अनंत

क्या होगा मिट जाने वाली लकीरें खींचने से आंखें तो अनंत तक देखती रहेंगी

नाट्य कृति... जो छू गई दिल को...

नाट्य कृति... जो छू गई दिल को... ************************* sindhi - पुस्तक परिचय नाटक -     हत्या हिक सुपने जी (  Besed on Cross purposes – Albert Camus ) लेखक -     हरिकांत जेठवानी प्रकाषक -     सुनील जेठवानी, 4 प्रकाष सोसायटी                  राधे हरि अपोजिट निर्मल कान्वेंट                  राजकोट 360007 संस्करण - 2012 सुपने जी हत्या मंझ रंगकर्म जी खुषी सिंधी साहित्य जगत मंझ हरिकांत न सिर्फ नाटकनि लाइ बल्कि सिंधु समाज, साहित्य धारा ऐं आखाणी जे संपादन जे करे हमेषह याद रहिण वारो नालो आहे। पहिंजी लंबी हिंदी कविता एक टुकड़ा आकाष समेत हरिकांत हिंदी साहित्य संसार जो बि जातलि सुञातलि लेखक आहे। कविता में नवाचार ऐं पहिंजी कहाणिनि में समाज जी नुमाइंदी कंदड़ चरित्रनि खे बुलंद सिंधी जुबान डिअण वारे हरिकांत जेठवानी जो नवों नाटक हत्या हिक सुपने जी इनि साल 2012 मंझ साया थी आयो आहे। मूल भावना खे कायम रखंदे नाटक जी आत्मा खे...

पढ़ने वाले आगे निकल गए ... पढ़ाने वाले पीछे रह गए

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sindhi novel Kartar singh by mohan thanvi  महंगाई सज संवर कर बाज़ार पहुंची बाकी सब पीछे हट गए भ्रष्टाचार  की बोली में कुछ लोगों के जेब कटे जूते  फट गए पुलिस काबू  पा न सकी... चीखों से सरकार के कान फट गए महंगाई मिस वर्ल्ड हुई राजा - भ्रष्टाचारी  कुर्सियों पर जुट  गए पढ़ने वाले आगे आगे आगे और आगे निकल गए ... पढ़ाने वाले देखो हाय ... कितना  पीछे रह गए