इतिहास और कल्पना के संतुलन से पठनीय व कालजयी रचना जन्म लेती है - तिवाड़ी सत्यदीप की औपन्यासिक कृति 'चोटी रै गांठ' का लोकार्पण ऐतिहासिक उपन्यास अतीत का पुनर्लेखन नहीं- डॉ. चेतन स्वामी
औरों से हटकर सबसे मिलकर bahubhashi.blogspot.com गतिविधियां, वक्तव्य, विश्लेषण खबरों में बीकानेर ✒️@Mohan Thanvi Bikaner Affiliate Disclaimer : "नोट: इस पोस्ट में कुछ एफिलिएट लिंक्स शामिल हैं। अगर आप इन पर क्लिक करके कुछ खरीदते हैं, तो मुझे बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के छोटा सा कमीशन मिल सकता है।" - मोहन थानवी (खबरों में बीकानेर) औरों से हटकर सबसे मिलकर https://bahubhashi.blogspot.com यहां प्रकाशित होगा आपके विश्वसनीय प्रतिष्ठित प्रतिष्ठान का विज्ञापन (खबरों में बीकानेर) इतिहास और कल्पना के संतुलन से पठनीय व कालजयी रचना जन्म लेती है - तिवाड़ी सत्यदीप की औपन्यासिक कृति 'चोटी रै गांठ' का लोकार्पण ऐतिहासिक उपन्यास अतीत का पुनर्लेखन नहीं- डॉ. चेतन स्वामी विमर्श की दृष्टि से 'चोटी रै गांठ' ब्राह्मण विमर्श का पहला भारतीय उपन्यास - हरीश बी. शर्मा मरूभूमि शोध संस्थान द्वारा आयोजित राजस्थानी उपन्यास 'चोटी रै गांठ' का लोकार्पण और पुस्तक चर्चा समारोह राष्ट्र भाषा हिंदी प्रचार समिति के संस्कृति भवन में रविवार सुबह जाने-माने साहित्यकारों व साहित्य प्रे...