जागो... सिंधुपति दाहर सेन का बलिदान जगा रहा है Dahar sen jaga raha
Dahar sen jaga raha मोहन थानवी जागो... सिंधुपति दाहर सेन का बलिदान जगा रहा है जम्बू द्वीप ऋषियों-मुनियों यानी ब्राह्मणों का वृहद, अखंड और सांस्कृतिक वैभव से समृद्ध भूखंड रहा है। कालान्तर में धरा के इस खंड को भारत के नाम से जाना गया। इस भूखंड के केंद्र में तत्कालीन सिंधु देश रहा है। इसी सिंधु देश में प्रवाहित सिंधु नदी के तट पर वेद-पुराणों का सृजन हुआ। इसके प्रमाण रामायण आदि महाग्रंथों में मिलते हैं। ब्राह्मणों के वास वाली ऐसी महान भूमि सिंध पर अनेक शासकों ने राज किया। सिंध की पृष्ठभूमि और दाहरसेन का संघर्ष : 327 वर्ष ईस्वी पूर्व अत्याचारी सिकंदर ने सिंध पर आक्रमण किया। सिकंदर की सेना अन्य देशों को रौंदती सिंध पर काबिज होने के बाद सोने की चिडिय़ा भारत पर राज करने के ख्वाब पाले हुए थी। सीमा पर सिंध और पंजाब की सेनाओं ने इनका कड़ा मुकाबला किया। सिकंदर घायल हो गया और उसने सीमा पर ही प्राण त्याग दिए। सिकंदर के बाद 163 वर्ष ईस्वी पूर्व मगध, गुजरात, काठियावाड़, पंजाब, मथुरा, सिंध आदि पर मनिन्दर का आक्रमण हुआ। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार मनिन्दर के बाद सात यवन बादशाहों के आक्रमण हुए। उन ...