*खबरों बीकानेर* / अंगूर खट्टे क्यों ? ( मोहन थानवी ) भारत के लोगों ने अपने अनुभवों से अंगूरों का मीठा या खट्टा होना तो जान लिया और कहावतों सहित अन्य विधाओं-शैलियों से साझा भी किया। किंतु खटास को मिठास में बदलने का गुर आम लोगों से दूर और खास लोगों के पास तक रखा। यही वजह आम लोगों के लिए भ्रष्टाचार का एकमात्र मार्ग खास लोगों ने बनानी शुरू की तो खुद भी उसकी जद में आ गए। क्योंकि आम और खास होना वक्त और जरूरत तय करती है। सच । हमारे देश में सरकार ने सभी वर्गों के उत्थान के लिए कई योजनाएं चलाई; उत्थान तो हुआ मगर एक पीढ़ी को लाभ मिला जबकि नई पीढ़ी के युवा होते होते समस्याएं विस्तार ही लेती दिखती हैं। आज स्थिति यह है कि हर वर्ग को आम बनकर कागजी कार्रवाई में ही उनझे रहने की विवशता झेलनी पड़ रही है। आरक्षण का मुद्दा खत्म होने का ओर है न छोर। आय आधारित सुविधाओं को भोगने वालों की सँख्या का क्रास एक्जामिन किया जाए तो आंकड़े अचम्भित करेंगे। आधार कार्ड; जिसे अनिवार्यता की श्रेणी प्रदान की जा रही है; वह कार्ड तक सभी आम लोगों की जेब में नहीं है। इसके कारण ढूंढ़ेंगे तो जटिल कागजी प्रक्रिया सामने ...