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पेट्रोल पंप भ्रम : उधार नहीं एडवांस के चलते... बीकानेर ज़िले में डीजल-पेट्रोल की कोई किल्लत नहीं, पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध- डीएसओ प्रशासन ने अफवाहों से बचने की अपील की : petrol

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औरों से हटकर सबसे मिलकर bahubhashi.blogspot.com 24 मार्च 2026 मंगलवार खबरों में बीकानेर ✒️@Mohan Thanvi पेट्रोल पंप भ्रम : उधार नहीं एडवांस के चलते... बीकानेर ज़िले में डीजल-पेट्रोल की कोई किल्लत नहीं, पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध- डीएसओ प्रशासन ने अफवाहों से बचने की अपील की petrol डीलर्स को उधार (क्रेडिट) पर डीजल-पेट्रोल देने की व्यवस्था बंद की गई है। उधार देने के बजाय इसको एडवांस में कन्वर्ट किया गया है ।इसके चलते कुछ पेट्रोल पंप संचालक अग्रिम भुगतान (एडवांस) के अभाव में ईंधन नहीं मंगा पा रहे हैं,  https://bahubhashi.blogspot.com पेट्रोल पंप भ्रम : उधार नहीं एडवांस के चलते... बीकानेर ज़िले में डीजल-पेट्रोल की कोई किल्लत नहीं, पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध- डीएसओ प्रशासन ने अफवाहों से बचने की अपील की डीलर्स को उधार (क्रेडिट) पर डीजल-पेट्रोल देने की व्यवस्था बंद की गई है। उधार देने के बजाय इसको एडवांस में कन्वर्ट किया गया है ।इसके चलते कुछ पेट्रोल पंप संचालक अग्रिम भुगतान (एडवांस) के अभाव में ईंधन नहीं मंगा पा रहे हैं बीकानेर, 23 मार्च । ज़िले में डीजल एवं पेट्रोल की उपलब्धता को लेकर जिला प...

अधिकारी बदलते रहे, व्यवस्था वही रही

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-अधिकारी बदलते रहे, व्यवस्था वही रही  - मोहन थानवी  स्वतंत्र पत्रकार  Jis Jis Kshetra mein vyavastha mein badlav hua vahan purv se behtar sthiti Najar I Aisa prayog sabhi jagah Hona chahie *खबरों में बीकानेर* - - अधिकारी बदलते रहे, व्यवस्था वही रही - मोहन थानवी   स्वतंत्र पत्रकार  अधिकारियों कर्मचारियों के स्थानांतरण आज की बात नहीं है । यह क्रम जब से व्यवस्थाएं बनी है तब से जारी है। इसी से जुड़ी व्यवस्था है सत्ता पर आसीन दलों के नेताओं को दायित्व सौंपने की। कुछ नेता मंत्री बनाए जाते हैं। कुछ मंत्रियों के मंत्रालय बदले जाते हैं। कुछ नेता और मंत्रियों के उत्तरदायित्व कम या ज्यादा किए जाते रहे हैं। इसके अच्छे परिणाम भी सामने आते ही हैं। इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती। लेकिन कुछ समस्याएं जो आमजन से जुड़ी है, कुछ प्रक्रियाएं जो आमजन से जुड़ी है वह बनी रहती है। उनमें जो खासियत अथवा समस्याएं हैं वह भी मुंहबाए सामने तनी रहती हैं। ऐसे में प्रश्न यह उठता है की समस्याओं के समाधान के लिए व्यवस्थाओं में बदलाव कब और कैसे होगा।  शहर छोटा हो या बड़ा गांव...

जन-राज : रोटियां सेंकने के नैरेटिव... इनसे क्या हासिल कर लेंगे *वो लोग...हमलोग ?*

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-जन-राज : रोटियां सेंकने के नैरेटिव...  इनसे क्या हासिल कर लेंगे *वो लोग...हमलोग ?*  *खबरों में बीकानेर* - - जन-राज : रोटियां सेंकने के नैरेटिव...  इनसे क्या हासिल कर लेंगे *वो लोग...हमलोग ?*  - मोहन थानवी  जन-राज यानी जनता का राज। विश्व में लोकतंत्र की मातृ भूमि हमारा भारत है। और आज की तारीख में हम जन-राज के चलते विभिन्न राजनीतिक दलों के नैरेटिव में लगभग उलझे हुए रहने लगे हैं। कभी सत्ता पक्ष के कतिपय नेता विपक्ष के विरोध में ऐसे ऐसे नैरेटिव गढ़ते हैं की लगता है की आने वाले 24 घंटे में ही विपक्ष के कुछ संबंधित नेता कारावास में पहुंच जाएंगे। लेकिन गौर करिए, होता कुछ और ही रहा है।  इसी तरह विपक्ष के कुछ नेता भी सत्ता में बैठे प्रभावशाली कुछ नेताओं के ऊपर ऐसे ऐसे आरोप मंढ़ते हैं की एक बारगी तो हम राजनीति से कोसों दूर रहने वाले आमजन भी चकित रह जाते हैं। भला ऐसे नेता लोग हम आमजन को बताएं तो सही कि ऐसे नैरेटिव बनाने के पीछे वे हम लोगों का किस तरह का भला करना चाहते हैं?   राजनीतिक दल तो अपनी रोटियां सेंकने की उद्देश्य से नैरेटिव सैट करने में...