दो दशक के बाद कृष्ण मृग के शावक का हुआ जन्म कृष्ण मृग के संरक्षण एवं संवर्धन की ओर बढ़ते कदम
दो दशक के बाद कृष्ण मृग के शावक का हुआ जन्म कृष्ण मृग के संरक्षण एवं संवर्धन की ओर बढ़ते कदम - अब पक्षियों के साथ कृष्ण मृग की अठखेलियों से आबाद हो रहा केवलादेव राष्ट्रीय पक्षी उद्यान - लगभग दो दशक के बाद कृष्ण मृग के शावक का हुआ जन्म जयपुर, 19 जनवरी। देशी -विदेशी पक्षियों के स्वर्ग के नाम से पहचाने जाने वाला भरतपुर जिला स्थित केवलादेव राष्ट्रीय पक्षी उद्यान विश्व मानचित्र पर न केवल एक रामसर वेटलैंड साइट के रूप में जाना जाता है, बल्कि यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट के रूप में एक विशेष पहचान स्थापित किए हुए है। चार सौ से अधिक पक्षियों की प्रजातियों का यह घर एवं यहां का प्राकृतिक वातावरण कई विलुप्त होती प्रजातियों के लिए जीवनदान बन चुका है। ऐसे में वन विभाग द्वारा विलुप्त होती प्रजातियों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास किये जा रहे है। केवलादेव राष्ट्रीय पक्षी उद्यान के उप वन संरक्षक श्री मानस सिंह ने बताया कि लगभग दो दशक के बाद दो मादा कृष्ण मृगों ने एक-एक शावक को जन्म दिया है। ये दोनों मादा कृष...