“भारतीय संत परंपरा के उज्जवल नक्षत्र थे गुरुदेव श्री तुलसी” - गणेशमल बोथरा
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“भारतीय संत परंपरा के उज्जवल नक्षत्र थे गुरुदेव श्री तुलसी” - गणेशमल बोथरा
बीकानेर 2 जुलाई 2026
“भारतीय संत परंपरा के उज्जवल नक्षत्र थे गुरुदेव श्री तुलसी” - गणेशमल बोथरा
गणाधिपति गुरुदेव श्री तुलसी के 30वें महाप्रयाण दिवस के उपलक्ष में आचार्य तुलसी शांति प्रतिष्ठान, नैतिकता का शक्तिपीठ की ओर से त्रिदिवसीय कार्यक्रम की श्रृंखला में द्वितीय दिवस का कार्यक्रम आज बोथरा भवन में मुनि श्री अमृत कुमार जी के सान्निध्य में आयोजित हुआ .
मुनि श्री ने शुरुवात में म्हारी नैया खेवन हार गुरुवर तुलसी गणी गीत का संगान कर माहौल धर्म मय बना दिया.
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इस अवसर पर अपने वक्तव्य में आचार्य तुलसी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष श्री गणेशमल बोथरा ने कहा कि सेकड़ों वर्षों में ऐसी विरल और अद्वितीय घटना घटित होती है जब धरती पर तुलसी सरीखे संत पैदा होते है. जिन्होंने अपने जीवन में इतने इतने अवदान जन मानस के लिए सृजित किये जिनसे सम्पूर्ण मानव जाति लाभान्वित हुयी, नैतिक क्रांति, मानसिक शांति और व्यक्तित्व निर्माण की पृष्ठभूमि पर आचार्य श्री ने तीन अभियान चलाए - अणुव्रत आन्दोलन, प्रेक्षाध्यान और जीवन विज्ञान। ये तीनों ही अभियान अनुपम हैं, अपूर्व है और अपेक्षित हैं। अणुव्रत जाति, लिंग, रंग सम्प्रदाय आदि के भेदों से ऊपर उठकर मानव मात्र को चारित्रिक मूल्यों के संकट से उबारने का उपक्रम है। प्रेक्षाध्यान मानसिक एवं शारीरिक तनावों से ग्रसित मानवीय चेतना को शक्ति के पथ पर अग्रसर कर रहा है। जीवन विज्ञान के प्रयोग व्यक्तित्व के सर्वागीण विकास की प्रक्रिया है एवं शैक्षिक जगत की समस्याओं का समीचीन समाधान है । वे सचमुच क्रान्तिकारी और विलक्षण प्रतिभा संपन्न महान संत थे. छोटी वय में दीक्षा लेकर और फिर मात्र २२ वर्ष में संघ के आचार्य बनकर हर क्षेत्र में विकास के नए नए आयाम उद्घाटित किये इसीलिए उन्हें भारतीय संत परंपरा के उज्जवल नक्षत्र के रूप में कहा गया.
आचार्य तुलसी शांति प्रतिष्ठान के मीडिया प्रभारी धर्मेन्द्र डाकलिया ने इस अवसर पर कहा कि गुरुदेव तुलसी अपने परिचय में कहते थे - मैं सबसे पहले मानव हूं, उसके बाद धार्मिक हूं, उसके बाद जैन हूं, और उसके बाद तेरांपंथ का आचार्य हूं । आचार्यश्री तुलसी के इन्हीं क्रांतिकारी विचारों का परिणाम है कि जो तेरापंथ एक संघीय सीमा में आबद्ध था, वह आज न केवल राष्ट्रीय बल्कि अन्तराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कर चुका है। तेरापंथ के सिद्धातों को युग की भाषा में रखकर उसे जन-जन की आस्था का केन्द्र बनाना आचार्यश्री के युग की महान उपलब्धि है। उनके कई कई अवदानों में से एक जैन संस्कार विधि जन जन और हर घर की विधि बने यह अपेक्षित है . हिंसा के अल्पीकरण से हम अपने जीवन में आने वाले मांगलिक अवसरों को जैन संस्कार विधि से मना सकते हैं .
समर्पित और ओजस्वी वक्ता मनोज सेठीया नें आपने वक्तव्य में कहा कि गुरुदेव तुलसी का जब देवलोक गमन हुआ तब समाज और राष्ट्र में प्रतिकूल स्थितियाँ चल रही थी, समाज को और अपेक्षा थी उन जैसे संत पुरुष की कुछ समय के लिए ताकि वे समाज में नैतिक और मानवीय मूल्यों में कुछ और बदलाव ला सके. उस समय किसी कवि नें बहुत सटीक लिखा कि ए गुलशन ये क्या गुस्ताखी हुई तुमसे
फुल वही चुना जिससे यहाँ विरानी हुई...
आज का कार्यक्रम मुख्य रूप से हर एक श्रद्धालु जन के लिए खुला था जो अपनी प्रस्तुति दे सके . कार्यक्रम के प्रारम्भ में करनी दान रांका ने मंगलाचरण में म्हारे हिवडे रा हार बसग्या सुरगा में जार गीतिका से किया . जयश्री भुरा ने स्व रचित कविता का संगान किया , श्रीया गुलगुलिया और संजू लालाणी ने गुरदेव के अवदान उपासक श्रेणी के बारे में विस्तार से बतलाया और संकल्प लिया कि जितना हो सकेगा वो संघ के लिए समर्पित भाव से अपना योगदान देती रहेगी. मधुर गायक चैनरूप छाजेड, मनोज छाजेड, निर्मल बैद ने भाव पूर्ण गीत को प्रस्तुत कर वातवरण मंत्र मुघ्ध कर दिया. मनोज सेठिया, दिनेश सोनी, प्रेम बोथरा आदि और भी श्रद्धालु जनों ने इस अवसर पर अपने भावों की प्रस्तुति दी .
मंत्री दीपक आंचलिया ने शुक्रवार मुख्य दिवस के सुबह से लेकर रात्रि कालीन कार्यक्रमों की विस्तृत सुचना सभी जनों को दी और विनम्र आह्वान और निवेदन किया कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में सभी कार्यक्रमों में पधारे.
धर्मेन्द्र डाकलिया और विनोद भंसाली नें बताया कि शुक्रवार 3 जुलाई को सुबह 8.15 बजे से श्रद्धार्पण का कार्यक्रम तुलसी समाधी स्थल में सभी साधू साध्वियों की संयुक्त सन्निधि में आयोजित होगा और रात्रि में 7.30 बजे से भक्ति संध्या का आयोजन होगा जिसमे मुख्य कलाकार भीलवाड़ा के रिषी दुगड़, बीकानेर की सखी ग्रुप की बहने, डाकलिया बंधु और तुलसी आईडल 2026 के प्रथम द्वितीय, तृतीय विजेता संभागी अपनी प्रस्तुति देंगे.. इसमें गंगाशहर, बीकानेर, भीनासर, नाल, उदासर, देशनोक, नोखा, श्रीडूंगरगढ़, लाडनूं आदि और भी अनेक स्थानों से श्रद्धालु जन आने की सुचना प्राप्त हुयी है .





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