"जय जंगलधर बादशाह" बीकानेर के महाराजा कर्ण सिंह राठौड़ की 410वीं जयंती मनाई


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"जय जंगलधर बादशाह" बीकानेर के महाराजा कर्ण सिंह राठौड़ की 410वीं जयंती मनाई


बीकानेर 10 जुलाई 2026 शुक्रवार 

क्षत्रिय सभा एवं ट्रस्ट, बीकानेर संभाग द्वारा राष्ट्रीय नायक, सनातन धर्म रक्षक एवं बीकानेर के महाराजा कर्ण सिंह राठौड़ "जय जंगलधर बादशाह" की 410वीं जयंती श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाई गई।

समारोह के मुख्य वक्ता नरेंद्र सिंह बीका (करणीसर) ने अपने संबोधन में कहा कि औरंगजेब के गद्दी पर बैठने के बाद भले ही महाराजा कर्ण सिंह उसके साथ रहे और अनेक युद्ध अभियानों में भाग लिया, किंतु वे सदैव उसकी नीतियों के प्रति सतर्क रहे। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार औरंगजेब की इच्छा अनेक हिंदू राजाओं का धर्मांतरण कर उन्हें मुसलमान बनाने की थी, किंतु महाराजा कर्ण सिंह की दूरदर्शिता, स्वधर्म के प्रति अटूट निष्ठा एवं दृढ़ संकल्प के कारण उसके इस षड्यंत्र को सफलता नहीं मिल सकी।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए समुद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि महाराजा कर्ण सिंह केवल वीर शासक ही नहीं, बल्कि विद्वान एवं विद्या-अनुरागी शासक भी थे। वे विद्वानों के महान आश्रयदाता थे। उनके संरक्षण में अनेक महत्वपूर्ण ग्रंथों की रचना हुई, जिनमें "साहित्यकल्पद्रुम", पंडित गंगानाथ मैथिल कृत "कर्णभूषण", "काव्य डाकिनी" तथा भट्ट हौसिक कृत "कर्णवंतस" प्रमुख हैं। ये ग्रंथ आज भी बीकानेर के राजकीय पुस्तकालय में सुरक्षित हैं।

क्षत्रिय सभा एवं ट्रस्ट, बीकानेर संभाग के प्रवक्ता प्रदीप सिंह चौहान ने बताया कि सभा द्वारा वर्षभर महापुरुषों, राष्ट्रीय नायकों एवं समाज के अग्रणी लोकनायकों की जयंती मनाने का उद्देश्य युवा पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास, संस्कृति एवं प्रेरणादायी व्यक्तित्वों से परिचित कराना है, ताकि समाज अपनी ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा रहे।

कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों एवं उपस्थित जनों ने महाराजा कर्ण सिंह राठौड़ के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर विक्रम सिंह राजावत, उम्मेद सिंह राजपुरोहित, अग्रसेन सुथार, वीरेंद्र सिंह नरूका, गिरधारी सिंह खिंदासर, भंवर सिंह उदट, केसरी सिंह मोटासर, हनुमान सिंह सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे तथा अपने विचार व्यक्त किए।

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