दिहाड़ी मजदूर के बेटे से चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने तक: दृढ़ संकल्प, विश्वास और समाज की ताकत


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दिहाड़ी मजदूर के बेटे से चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने तक: दृढ़ संकल्प, विश्वास और समाज की ताकत

जोधपुर।
ये जानकर दिल भावनाओं से भर आता है कि ऋषिकेश प्रजापत ने आधिकारिक तौर पर अपनी सीए (CA) की परीक्षा पास कर ली है, वो भी हर स्तर को पहले ही प्रयास में पार करके। आज उसकी इस सफलता को देखना, असंभव सी दिखने वाली परिस्थितियों पर एक ऐतिहासिक जीत को देखने जैसा है। सालों पहले, सीए फाउंडेशन क्लियर करने के बाद, पारिवारिक वित्तीय तंगी के कड़वे सच ने ऋषिकेश को पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर कर दिया था। तीन लंबे सालों तक, उस सपने को रोकना पड़ा। उसके माता-पिता ने, जो दिहाड़ी मजदूर के रूप में थककर भी काम करते हैं, उसे सहारा देने के लिए अपना सब कुछ झोंक दिया, लेकिन आर्थिक तंगी का वह पहाड़ अकेले पार करना बहुत मुश्किल था।
सी ए अभिषेक राठी ने बताया कि ऋषिकेश ने तीन साल पहले तय किया कि यह सपना यहीं खत्म नहीं होगा,  फिर से इस मैदान में कदम रखा, भारी आर्थिक तंगी, स्वास्थ्य संकट और अनिश्चितता के उन गहरे पलों में भी, जब सब कुछ बिखरता हुआ लग रहा था, वह लगातार आगे बढ़ता रहा।
यह सफर उस बेहतरीन सपोर्ट सिस्टम के बिना पूरा नहीं हो सकता था, जो उसके पीछे चट्टान बनकर खड़ा रहा, मितेश सर और एक्सेल अकादमी की टीम का दिल से आभार, जिन्होंने सबसे मुश्किल वक्त में हर तरह से बिना किसी शर्त के साथ दिया। इस लंबे सफर के दौरान मदद का हाथ बढ़ाने वाले और सहयोग जुटाने वाले हर एक उदार मददगार को बहुत-बहुत धन्यवाद जिनकेअपनेपन ने  जीवन बदल दिया।
ऋषिकेश प्रजापत को सम्मानित करते हुए कला फाउंडेशन जोधपुर के अध्यक्ष हरीश देवनानी कहा कि
ऋषिकेश का सीए बनना उस बेहद निजी सपने के सच होने जैसा है, जिसे सालों पहले देखने की हिम्मत की थी। आज उसे इस मुकाम पर देखना, उम्मीद, विश्वास और मार्गदर्शन के निवेश पर एक अनंत रिटर्न मिलने जैसा महसूस हो रहा है। ऋषिकेश प्रजापत की यह यात्रा आने वाली कई पीढ़ियों को प्रेरित करेगी। इस मौके पर कला फाउंडेशन जोधपुर के सचिव नरेंद्र श्रीमाली, प्रेरक रमेश चंद्र राठी, मंजू राठी, रश्मि देवनानी, राजेंद्र शर्मा, डॉ मादाराम विश्नोई, सी ए भानु देवनानी सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे।

(हरीब देवनानी द्वारा प्रेषित)


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