जैन संतों की सुरक्षा के लिए "जैन संत सुरक्षा नीति" बनाई जाए "संत विहार पथ" विकसित करें जैन महासभा ने प्रशासन के माध्यम से सरकार तक पहुंचाई मांग प्रत्येक जिले में "जैन संत विहार एवं चातुर्मास समन्वय समिति" भी गठित की जाए


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जैन संतों की सुरक्षा के लिए "जैन संत सुरक्षा नीति" बनाई जाए
"संत विहार पथ" विकसित करें

जैन महासभा ने प्रशासन के माध्यम से सरकार तक पहुंचाई मांग
प्रत्येक जिले में "जैन संत विहार एवं चातुर्मास समन्वय समिति" भी गठित की जाए


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जैन संतों की सुरक्षा के लिए "जैन संत सुरक्षा नीति" बनाई जाए
"संत विहार पथ" विकसित करें

जैन महासभा ने प्रशासन के माध्यम से सरकार तक पहुंचाई मांग
प्रत्येक जिले में "जैन संत विहार एवं चातुर्मास समन्वय समिति" भी गठित की जाए


बीकानेर, 24 जून।

सकल जैन समाज की प्रतिनिधि संस्था जैन महासभा, बीकानेर के नेतृत्व में जैन संतों एवं साध्वियों की सुरक्षा तथा चातुर्मास व्यवस्थाओं के संबंध में आयोजित बैठक में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, जिला प्रशासन एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को विभिन्न महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपे गए।

जैन महासभा के अध्यक्ष कन्हैयालाल बोथरा ने बताया कि वर्ष 2025 एवं 2026 के दौरान रीवा (मध्यप्रदेश), अमरावती (महाराष्ट्र), भीलवाड़ा एवं पाली सहित विभिन्न स्थानों पर जैन संतों एवं साध्वियों के साथ हुई सड़क दुर्घटनाओं ने सम्पूर्ण जैन समाज को गहरी चिंता में डाल दिया है। जैन साधु-साध्वियां धार्मिक मर्यादानुसार पूर्णतः पैदल एवं नंगे पैर विहार करते हैं। ऐसे में बढ़ते यातायात एवं तेज गति से चलने वाले वाहनों के कारण उनकी सुरक्षा एक गंभीर राष्ट्रीय विषय बन चुकी है।

उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन में गंगाशहर रोड स्थित शिव वैली क्षेत्र अथवा अन्य उपयुक्त स्थान पर जैन समाज हेतु बहुउद्देशीय सभास्थल के लिए भूमि आवंटन सहित अनेक महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए गए हैं।

जैन महासभा के महामंत्री जतनलाल संचेती ने बताया कि  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रेषित ज्ञापन में देशभर के जैन संतों एवं साध्वियों की सुरक्षा हेतु राष्ट्रीय "जैन संत सुरक्षा नीति", राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों पर "संत विहार पथ" के निर्माण तथा प्रत्येक जिले में "जैन संत विहार एवं चातुर्मास समन्वय समिति" के गठन की मांग की गई है।

जैन महासभा के उपाध्यक्ष संजय जैन सांड ने बताया कि  मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को भेजे गए ज्ञापन में राजस्थान में राज्य स्तरीय जैन संत सुरक्षा नीति, सभी जिलों में समन्वय समितियों का गठन, संत विहार पथ निर्माण तथा विशेष यातायात सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने का आग्रह किया गया है। उन्होंने कहा कि जैन संतों एवं साध्वियों की सुरक्षा को केवल धार्मिक विषय न मानकर भारत की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण से जुड़े राष्ट्रीय विषय के रूप में देखा जाना चाहिए।

बैठक में उपस्थित अतिरिक्त जिला कलेक्टर उम्मेद सिंह रतनू को दिए गए विस्तृत ज्ञापन में जैन संतों के विहार मार्गों का चिन्हांकन, चेतावनी संकेतक बोर्ड, पुलिस सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी कैमरे, ट्रैफिक एवं पार्किंग प्रबंधन, चातुर्मास स्थलों पर प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छता, जल निकासी, चिकित्सा सुविधाएं, सड़क मरम्मत, विशेष नोडल अधिकारी की नियुक्ति एवं "जैन संत विहार एवं चातुर्मास समन्वय समिति" के गठन की मांग की गई। इस अवसर पर उन्होंने आश्वस्त किया कि समिति गठन एवं भूमि आवंटन संबंधी विषयों पर सकारात्मक कार्यवाही हेतु संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे।

पूर्व अध्यक्ष विनोद बाफना ने बताया कि जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी राजेश कालवा को सौंपे गए ज्ञापन में संत विहार मार्गों के सर्वेक्षण, चेतावनी बोर्ड, संत विहार पथ निर्माण, जिला स्तरीय समन्वय समिति एवं संत सुरक्षा हेतु मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने का सुझाव दिया गया। उन्होंने कहा कि जैन महासभा लंबे समय से भूमि आवंटन के लिए प्रयासरत है और अब इस विषय को और अधिक लंबित नहीं रखा जाना चाहिए।

भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के कार्यकारी अध्यक्ष मोहन सुराणा ने कहा कि यदि सरकार द्वारा भूमि आवंटन किया जाता है तो जैन महासभा के नेतृत्व में जैन समाज उस भूमि पर आवश्यक भवन निर्माण करवाने के लिए पूर्णतः तैयार है।

सुरेन्द्र दसानी ने सुरक्षा की दृष्टि से चातुर्मास काल में गोगागेट स्थित पुलिस चौकी को पुनः सक्रिय करने की मांग रखी। इस पर उपस्थित पुलिस अधिकारी किशन सिंह ने आश्वासन दिया कि उक्त पुलिस चौकी को शीघ्र सक्रिय किया जाएगा।

जैन महासभा के सह सचिव मनीष नाहटा ने सुझाव दिया कि राष्ट्रीय राजमार्गों के समीप स्थित सरकारी विद्यालयों को आवश्यकता पड़ने पर जैन संतों के विहार मार्ग में अस्थायी विश्राम स्थल के रूप में उपयोग हेतु चिन्हित किया जाए।

पूर्व सचिव मेघराज बोथरा ने चातुर्मास काल में महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रमुख चातुर्मास स्थलों पर महिला सुरक्षा कर्मियों की नियुक्ति की मांग रखी।

बैठक में जयचंद लाल सुखानी, डॉ. जे. एस. मेहता, संतोष बांठिया, प्रमोद चोरड़िया, अरुण जैन, विक्रम भुगड़ी, गगन कुमार सेठिया,अरुणा गुल्गुलिया खाजूवाला, सहित अनेक समाज प्रतिनिधियों ने अपने महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए।

इस अवसर पर कन्हैयालाल बोथरा, मोहन सुराणा,विनोद बाफना,संजय जैन सांड, हेमन्त कतेला, भीकमचंद लूणिया, शांतिलाल गुलगुलिया, नरेन्द्र सेठिया, योगेष बुच्चा, दिनेश कुमार जैन, नीरज जैन, अभिषेक डागा, राजेन्द्र बोथरा, सुनील कुमार सुराणा, बसन्त कुमार नवलखा,सुरेन्द्र कुमार दस्साणी, मेघराज बोथरा, किशन सिंह राठौड़, अजीज अहमद, मनोज कुमार,सकल जैन समाज के विभिन्न संप्रदायों, संस्थाओं एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर बैठक में गरिमामय सहभागिता दर्ज करवाई।

जैन महासभा, बीकानेर ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री एवं जिला प्रशासन इस संवेदनशील विषय पर सकारात्मक पहल करते हुए जैन संतों, साध्वियों एवं संपूर्ण जैन समाज की भावनाओं का सम्मान करेंगे तथा सुरक्षा एवं सुविधाओं के लिए प्रभावी एवं दूरगामी निर्णय लिए जाएंगे।

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