पाठ्यक्रमों में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन दर्शन और गीता दर्शन को शामिल किया जाए - डी.आर. यादव




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31 जनवरी 2026 शनिवार

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पाठ्यक्रमों में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन दर्शन और गीता दर्शन को शामिल किया जाए - डी.आर. यादव



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पाठ्यक्रमों में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन दर्शन और गीता दर्शन को शामिल किया जाए - डी.आर. यादव

 डी आर यादव प्रदेश संयोजक श्री कृष्ण योग पीठ राजस्थान एवं सेवानिवृत्त आईएएस संबद्ध सेवा ने शिक्षा मंत्री डॉ. मदन दिलावर एवं मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा से शिक्षा प्रणाली के पाठ्यक्रम में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन दर्शन, बचपन की लीलाओं और गीता दर्शन को शामिल करने का अनुरोध किया !
 यादव ने बताया कि आज यह ​​सर्वविदित हैं कि तनावपूर्ण वातावरण दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। समाज में आज छात्रों सहित, पेशेवर, नौकरशाह, राजनेता, व्यापारी, डॉक्टर, इंजीनियर और आम लोग सभी तनाव और चिंता का सामना कर रहे हैं।

यह हम सभी के लिए एक चुनौती है कि हमारी नई पीढ़ी को सर्वांगीण विकास और प्रगति के लिए आनंदमय और तनावमुक्त वातावरण प्रदान किया जाए।

 यादव ने यह भी बताया कि हम एक उपयुक्त और सार्थक प्रस्ताव प्रस्तुत करना चाहते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएँ, शिक्षाएँ, उनके जीवन दर्शन और सिद्धांतों तथा गीता दर्शन को शिक्षा प्रणाली के पाठ्यक्रम में निम्नलिखित तरीके से शामिल किया जाए, ताकि हमारे नैतिक,सांस्कृतिक-आध्यात्मिक मूल्यों को बढ़ावा मिले और युवा पीढ़ी, विशेषकर छात्रों का जीवन तनावमुक्त, आनंदमय और समग्र व्यक्तित्व विकास हो सके। स्कूली शिक्षा में
प्राथमिक शिक्षा से बारहवीं कक्षा या उच्च माध्यमिक शिक्षा तक स्कूली पाठ्यक्रम में भगवान श्रीकृष्ण की बचपन की लीलाओं, गीता के कर्म योग के तीसरे, चौथे और पाँचवें अध्यायों और गीता के सार को शामिल करना उपयुक्त होगा।उच्च शिक्षा में जीवन कला को जानने और छात्रों के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास यथा उच्च नैतिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक मूल्यों के लिए महाविद्यालय,विश्वविद्यालय और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में संपूर्ण गीता और भगवान श्रीकृष्ण के जीवन दर्शन को शामिल किया जाना चाहिए।

हमें आशा है कि शिक्षा मंत्री डॉ. मदन दिलावर एवं मुख्यमंत्री  भजन लाल शर्मा हमारे छात्रों और युवा पीढ़ी के सर्वांगीण विकास और प्रगति, विशेष रूप से राष्ट्र के नैतिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए आप इस प्रस्ताव पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेंगे।

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