समय के साथ कदमताल कर रही राजस्थानी कहानी
बीकानेर 12 जून 2018 राजस्थानी कहानी समय के साथ चल रही है साहित्य की गतिमान विधा कहानी को राजस्थानी रचनाकारों ने समकक्ष भाषाओं से अलग नहीं रहने दिया है बल्कि आधुनिक कहानी में राजस्थानी कहानी को अग्रिम पंक्ति में ला खड़ा किया है । कुछ ऐसे ही विचार वक्ताओं ने प्रज्ञालय संस्थान और राजस्थानी युवा लेखक संघ के अवरेख कार्यक्रम के तहत दो दिवसीय साहित्य समारोह के दूसरे दिन मंगलवार को तीन पीढ़ी कार्यक्रम में व्यक्त किए। इससे पहले संस्थान के कमल राम गाने राजस्थानी कहानी की यात्रा पर केंद्रित अपने पत्र का वाचन किया कार्यक्रम में राजेंद्र जोशी कासिम बीकानेरी और हरीशशर्मा ने अपनी-अपनी राजस्थानी कहानियों का वाचन कर मौजूद रचना धर्मियों की सराहना प्राप्त की । कहानियां और कार्यक्रम की अवधारणा पर विचार रखते हुए अतिथि डॉ मदन सैनी गुलाम हुसैन मधु आचार्य आशावादी ने वर्तमान में रची जा रही बीकानेर के रचनाकारों की राजस्थानी कहानियों को सराहा। आगंतुकों का आभार गिरिराज पारीक ने व्यक्त किया ।
पहले दिन :-
✍️ मोहन थानवी
पहले दिन :-
रेत में नहाकर कल को बुलाने वाले हरीश भादानी मतलब मजलूम मजदूर मजबूर की आवाज
बीकानेर 11 जून 2018। जनकवि हरीश भादानी न केवल रचनाकार थे बल्कि वे छात्र जीवन में छात्र नेता और उसके बाद मजलूम मजदूर मजबूर की आवाज उठाने वाले आंदोलन के अग्रणीय भी रहे। उन्होंने 80 के दशक में राजस्थानी भाषा साहित्य संस्कृति अकादमी को बीकानेर से स्थानांतरित होने से रोकने के लिए आत्मदाह की चेतावनी दी थी। हरीश भादानी को जन आंदोलन के तहत गिरफ्तारी से बचाने के लिए नंदकिशोर आचार्य सहित नगर के प्रबुद्ध जनों ने उन्हें एक शादी समारोह में से मकानों की छतों पर से लंघवा कर उनको भूमिगत किया था । इस तरह के और भी संस्मरण वरिष्ठ कवि संपादक साहित्यकार भवानी शंकर व्यास विनोद ने साझा किए। यह अवसर उपलब्ध करवाया प्रज्ञालय संस्थान एवं राजस्थानी युवा लेखक संघ ने 11 जून 2018 को नागरी भंडार कला दीर्घा में । दो दिवसीय अवरेख के पहले दिन नगर के संस्कृति कर्मियों और रचनाधर्मी वर्ग के प्रतिनिधियों ने ख़्यातनाम गीतकार एवं जनकवि हरीश भादाणी को नमन करते हुए उनके जन्मदिवस पर भादाणी की रचनाओं का हिंदी राजस्थानी अंग्रेजी संस्कृत पंजाबी आदि 7 भाषाओं में अनुवाद का रसास्वादन किया। आयोजकों व अतिथियों ने भादाणी की दोहित्री रितु व्यास का सम्मान किया। वक्ताओं ने भादाणी की सृजन-यात्रा को रेखांकित करते हुए उनकी कृतियों और उनके जन जन की जुबान पर चढ़े गीतो में प्रयुक्त प्रादेशिक स्थानीय बोली के शब्दों के समावेश के बारे में बताया और कहा कि वे आम जन के मन की बात अपने गीतों में उकेरते थे। उनकी मैंने नहीं कल ने बुलाया है... रेत में नहाया है मन... और ऐसी अनेक रचनाएं आज भी नगर के युवा कार्यक्रमों में गाकर भादाणी को नमन करते हैं। आगंतुकों का स्वागत डॉक्टर अजय जोशी ने किया। आरंभ में कमल रंगा ने भादाणी के गीत एवं नवगीत के संदर्भ में आलोचनात्मक पत्र का वाचन किया। उनके लोकप्रिय गीत एवं नवगीत की प्रस्तुति आनंद वी. आचार्य, अविनाश व्यास, निर्मल शर्मा ने दी।
इस कार्यक्रम में हरीश भादाणी की रचनाओं का सात भारतीय भाषाओं में अनुवाद का वाचन गिरधर रत्नू, ज़ाकिर अदीब ,डॉ. चंचला पाठक, इला पारीक, पुखराज सोलंकी, बी.डी. हर्ष एवं गिरिराज पारीक ने किया। मधु आचार्य आशावादी ने भादाणी के साहित्य और जन आंदोलन से भरी जीवनी को एक खुली किताब बताया। कार्यक्रम में भादाणी के साथ वातायन और अनेक साहित्यिक गतिविधियों में शामिल रहे सरल विशारद सहित नगर के संस्कृतिकर्मी और रचनाधर्मी बड़ी संख्या में मौजूद थे।
दूसरे दिन :-
-दूसरे दिन :-
बीकानेर 12 जून 2018 राजस्थानी कहानी समय के साथ चल रही है साहित्य की गतिमान विधा कहानी को राजस्थानी रचनाकारों ने समकक्ष भाषाओं से अलग नहीं रहने दिया है बल्कि आधुनिक कहानी में राजस्थानी कहानी को अग्रिम पंक्ति में ला खड़ा किया है । कुछ ऐसे ही विचार वक्ताओं ने प्रज्ञालय संस्थान और राजस्थानी युवा लेखक संघ के अवरेख कार्यक्रम के तहत दो दिवसीय साहित्य समारोह के दूसरे दिन मंगलवार को तीन पीढ़ी कार्यक्रम में व्यक्त किए। इससे पहले संस्थान के कमल राम गाने राजस्थानी कहानी की यात्रा पर केंद्रित अपने पत्र का वाचन किया कार्यक्रम में राजेंद्र जोशी कासिम बीकानेरी और हरीशशर्मा ने अपनी-अपनी राजस्थानी कहानियों का वाचन कर मौजूद रचना धर्मियों की सराहना प्राप्त की । कहानियां और कार्यक्रम की अवधारणा पर विचार रखते हुए अतिथि डॉ मदन सैनी गुलाम हुसैन मधु आचार्य आशावादी ने वर्तमान में रची जा रही बीकानेर के रचनाकारों की राजस्थानी कहानियों को सराहा। आगंतुकों का आभार गिरिराज पारीक ने व्यक्त किया । -
✍️ मोहन थानवी
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