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जब आम आदमी अधिकार मांगता है..

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Mohan Thanvi जब आम आदमी अधिकार मांगता है... अफरातफरी की इस बेला में राजनीति से बोझिल माहौल में भी जब आम आदमी खुद के दम पर अपने वर्ग, अपने समाज के हित में अधिकार मांगने के लिए मुट्ठियां तान लेता है तब भी...,  नहीं चाहते हुए भी राजनीति की बू से घिरा लगता है। क्यों... ? सवाल यह है कि...जब आम आदमी अधिकार मांगता है तो कैसा महसूस होता है... ? उसे खुद को, उसके साथियों को, उसके अधिकारियों को, उसके परिवारजनों को ? उसके पड़ोसियों को... उसके... उसके... उसके और उसके उन सब को... जो उसके आसपास हैं... जिनके दायरे में वह है ? जरूरी नहीं कि हर कोई वाजिब अधिकारों की ही मांग करता हो... दूसरे पहलू भी गौरतलब होते हैं। क्योंकि... अधिकार की बात जहां आती है वहां शासन और समाज के नियम कायदे, कानून, परंपरागत जीवनशैली पहले से मौजूद होना स्वाभाविक है। राजनीति होना भी बड़ी बात नहीं। पिछले दिनों ( बीकानेर में राजस्थान राज्य अभिलेखागार ) एक सेमिनार में सदियों पहले की परिस्थितियों में लोगों के एक रियासत से दूसरी रियासत की ओर पलायन पर विषय विशेषज्ञ की विवेचना सुनने का अवसर मिला। इन प्रखर वक्ता का कहना था, तत्काल...

bahubhashi: कूचु ऐं शिकस्त...1300 साल पहले...

bahubhashi: कूचु ऐं शिकस्त...1300 साल पहले... : पंजाब केसरी राजस्थान संस्करण में ...  18 Dec 2012   (श्री राजेंद्र सैन)  ऐतिहासिक उपन्यास कूचु ऐं शिकस्त...1300 साल पहले का कथानक ...

मन कबूतर पंख पसारता यहां...

Aawo meet... Geet vahi gaate hain... ये रोषनी हमारे लिए है... हमारे लिए है... ये खुषियां हमारे लिए है... हमारे लिए है... आषाओं का सागर लहराता यहां... मन कबूतर पंख पसारता यहां... विष्वास की मजबूत डोर से बंधे हैं सभी... निराषा की जगह यहां नहीं है नहीं... ये रोषनी हमारे लिए है... हमारे लिए है... ये खुषियां हमारे लिए है... हमारे लिए है...

bahubhashi: गौरैया के घोंसले पे

bahubhashi: गौरैया के घोंसले पे : धूप ने दीवार को सहलाया ... उसे मिली राहत ... गौरैया के घोंसले पे जमी बर्फ भी पिघल गई ... मतवाली हुई हवा ... आशा क...

गौरैया के घोंसले पे

धूप ने दीवार को सहलाया ... उसे मिली राहत ... गौरैया के घोंसले पे जमी बर्फ भी पिघल गई ... मतवाली हुई हवा ... आशा के गीत गूंज उठे ... दूर हुआ निराशा का साया !..

होली पर... इश्क में... क्या हाल बना लिया

होली पर इश्क में मोहन ऐसा क्या हाल बना लिया होली आई मगर पानी मिलना दुश्वार हो गया न छोटों की आंख में बड़ों के लिए पानी न नलों में ही आता पीने योग्य साफ पानी होली पर इश्क के रंग में रंग गया मोहन दुनिया को भूल गया मोहन मोहन करती रही गोपियां मोहन पिचकारी संग ले गया

होली पर... इश्क में... क्या हाल बना लिया

होली पर इश्क में मोहन ऐसा क्या हाल बना लिया होली आई मगर पानी मिलना दुश्वार हो गया न छोटों की आंख में बड़ों के लिए पानी न नलों में ही आता पीने योग्य साफ पानी होली पर इश्क के रंग में रंग गया मोहन दुनिया को भूल गया मोहन मोहन करती रही गोपियां मोहन पिचकारी संग ले गया