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नूरजहां का फरमान और इतिहास देख मुस्कराता है भविष्य

नूरजहां का फरमान और इतिहास देख मुस्कराता है भविष्य जहां शब्दों से होता है संवाद। ऐसे शिक्षा के मंदिर, शब्दों से संवाद करवाने वाले स्थल पर एक-दो मार्च 2014 को राष्ट्रीय - अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त इतिहासकार जुटेंगे और भविष्य के लिए इतिहास का मंथन करेंगे। नूरजहां के फरमान - मुगल बादशाह जहांगीर, शाहजहां, औरंगजेब, नूरजहां, बहादुरशाह द्वारा लिखे गए ऐतिहासिक फरमान, निशान और जयपुर, जोधपुर एवं सिरोही के राजाओं को लिखे पत्र इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। ये पत्र संरक्षित है और आनलाइन भी किए गए हैं। रियासतकालीन 35 लाख से भी अधिक ऐतिहासिक दस्तावेजों से शोधार्थी इतिहास में झांकते हैं। शब्दों से संवाद स्थापित कर अपना भविष्य बनाते हैं। ऐसा स्थान है बीकानेर में राजस्थान राज्य अभिलेखागार। यहां स्वतंत्रता संग्राम में अपना सबकुछ होम कर देने वाले 246 देशभक्तों के संस्मरण भी संरक्षित है और उन्हें सुना भी जा सकता है। इनमें गोकुल भाई भट्ट, सिद्धराज ढढ्ढा, रणछोड़दास गट्टाणी, मथुरादास माथुर, हीरालाल शास़्त्री शामिल हैं। इतिहास के शोधार्थियों के लिए अभिलेखागार में...

शिव पर वैज्ञानिक-शोध ! शिव ही सत्य है... !

शिव पर वैज्ञानिक-शोध ! शिव ही सत्य है... ! शिवजी का डमरू और त्रिशूल। शिवजी की जटाओं से निकलती गंगा। शिवजी का तीसरा नेत्र। नटराज रूप। शिवजी का तांडव नृत्य। और... और... और... अनेकानेक प्रसंग। जिन पौराणिक कथाओं को कुछ लोग कपोलकल्पित करार देने में पल भर भी नहीं लगाते, उन्हीं कथाओं के लघु से लघु प्रसंगों पर कतिपय वैज्ञानिक गहन शोध कार्य भी कर रहे हैं। सभी शोध-परिणाम सार्वजनिक भी नहीं किए जा रहे। क्यों? खासतौर से सिंधु सभ्यता, सिंधु संस्कृति, धार्मिक मान्यताओं पर किए जाने वाले शोधों की जानकारी, उनके परिणाम के बारे में हिंदी भाषी क्षेत्र के लोग तो लगभग अनजान ही रह जाते हैं। क्यों ? शिवजी संबंधी ही नहीं बल्कि सभी देवी-देवताओं और संसार भर में देवतुल्य अथवा मानव जीवन से श्रेष्ठ माने जाने वाले चरित्रों और उनसे जुड़ी वस्तुओं पर ऐसे शोध आज से नहीं बल्कि बीती सदियों से जारी हैं। यह अलग बाल है है कि कतिपय वैज्ञानिकों ने ऐसी रोमांचक, अद्भुत और अचंभित कर देने वाली बातों, चीजों, जीवों को एलियन से भी जोड़ा है, जो कि इस तरह के वैज्ञानिक शोधों के कोटि कोटि पहलुओं में से एक है। ऐसे शोधों में इस तरह के पहलू ह...

संगीत ज़रिए इलाज - Dr Kamla Goklani

डॉ कमला गोकलानी जे सिंधु दूत में प्रकाशित आलेख मूं चूंडयलि संगीत ज़रिए इलाज - अजु माहिर ऐं खोजनीक जंहिं म्यूज़िक थेरेपीअ जी गाल्हि कनि था, उहा सदियूं अगु लोकगीतनि जरिए आम वाहिपे में हुई, जंहिंजो फकत हिकु मिसालु डियां थी - बार खे नंढी माता, वडी माता लाखिड़ो वगैरह थियण ते सजो बदनु गाढ़ो थी वेंदो आहे। फोफीड़ा, दाणा, चुघ थी पवंदा आहिनि। बुखार जा मच हुअण करे छितो थी पवंदो आहे, निंड न ईंदी अथसि, तडहिं माता जा ओराणा - ठारि माता ठारि पंहिंजे बचनि खे ठारि । अमां अगे बि ठारियो थई हाणे बि ठारि ।। बुधी बार ते जादूअ जहिड़ो असरु थींदो आहे ऐं खेसि मिठिड़ी निंड पंहिंजे आगोश में समेटे वठंदी आहे। सागियो असरु मनो रोगियुनि ते बि थींदो आहे। ‘‘सिंधी लोक गीतनि में अहिड़ो त लुत्फु ऐं सोजु समायलु हूंदो आहे ऐं अहिड़ो त रसु ऐं लइ भरियल हूंदी आहे, जो बुधण वारे जी दिलि ऐं दिमाग तासिर जे अंतहाई गहिरायुनि में गुमु थियो वञनि एं हू पाण खे उन्हीअ घड़ीअ माहौल में तसिवर करण लगंदो आहे, जिते फितिरत पंहिंजे हकीकी ऐं लाफानी लिबास में गाईंदे, नचंदे, टिपंदे ऐं मुस्कराईंदे नजर ईंदी आहे। इन्हनि सभिनी जबलतनि जो कारण ही आहे जो उन्हनि में ह...

एक दीपक

एक दीपक समग्र समाज को दीपावली की लाख-लाख बधाइयां। दीपावली हमें एक दीपक जरूर प्रज्वलित करने का संदेश दे रही है। भलेशक आज के जमाने मंे बिजली और जेनरेटर जैसे संसाधन रोशनी के लिए मुहैया हैं। भलेशक प्रत्येक व्यक्ति लखपति-करोड़पति है मगर मानवीयता के लिए जज्बा भी जिंदा रहना जरूरी है। जीवन और प्राणियों के लिए दया भावना हजारों वॉट के बल्वों की रोशनी से अधिक जीवन को रोशन करती है। वक्त आने पर आलीशान अट्टालिकाओं की चमक दमक एक दीपक की रोशनी के आगे फीकी पड़ जाती है। एक दीपक - आलीशान महल में राजा-रानी का बड़ा और सुसज्जित कक्ष रोशन फानूस से चमक रहा था। फानूस इतरा कर अपने तले में धूल से सने मिट्टी के दीपक को चिढ़ा रहा था। दीपक अपनी चिर परिचित सादगी से अपने तेल और बाती को सदैव मुस्तैद रहने का सबक सिखा और वक्त पर काम आने की हिदायत दे रहा था। बाहर आंधी-बरसात आ रही थी और इस वजह से घुप अंधेरा भी था। रानी ने राजा को कहा - कोई दास-दासी आस पास नहीं है। बुलाने पर भी नहीं आ रहा। मुझे बाहर टंगा हुआ मैना का पिंजरा अंदर मंगवाना है। आप फानूस उठा कर रोशनी में पिंजरा उठा कर ले आओ। फानूस ने राजा के लिए रानी का यह निर्देश ...

Bharat me angreji raj ... Lekhak pt sundar lal ji... pt sundar lal ji ki book bahut likhi hui hain or unke prashanshak bhi kafi sankhya me hai A पंडित सुंदरलाल जी के बारे में संध्या नवोदिता जी ने गूगल पर सर्च किया मगर सर्च इंजन वांछत विद्वान के बारे में अनजान रहा। यह इसलिए कि पंडित संुदरलाल जी के बारे में सर्च इंजन पर किसी ने कोई जानकारी डाली ही नहीं होगी। हिंदी या अंग्रेजी में गूंगल ़ और ब्लॉग या अपने या किसी साथी के वेबसाइट पर सामग्री अपलाड करने के बाद वह सामग्री सर्च करने पर उपलब्ध हो जाती है। ऐसा मेरा स्वयं का अनुभव गूगल पर रहा है। उदाहरण के तौर पर संभवतया मेरी यह पोस्ट भी सर्च करने पर सामने आ सकती है। pt sundar lal ji ki book bahut likhi hui hain or unke prashanshak bhi kafi sankhya me hai A

Rang Rajasthani: 26-08-2013

Rang Rajasthani: 26-08-2013

पहाकनि जी बरसाति

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पहाकनि जी बरसाति। अजु तव्हांखे पहाकनि में बरसाति जी गाल्हियूं था बुधायूं। असांजो मकसद सिन्धु भाषा, बोली ऐं संस्कृतिअ जियूं खासियतूनि खे तव्हां तांई पूजायणो आहे। राय-मशविरा इनि बारे में असांखे मिलन्दी त घणी खुशी थीन्दी। -  डखिण मींह न वसिणा, जे वसे त बोेड़े, काइर धकु न हणिणा, जे हणे त झोरे। सिन्धु में घणो करेेे डखण-ओलह खां बरसाति न पवन्दी आहे। पर जे इन तर्फ जी बरसाति पई त चंगी बोड़ बोड़ा करे छडीन्दी आहे। याद रखिण जी गाल्हि आहे, असांजो अजमेर समेत ओलह जो राजस्थान बि इन्हींअ ई भौगोलिक स्थितिअ में वसयलि आहे। खास तौर बीकानेर, जैसलमेर वगैरह। बुठो त थरु, न त बरु थरपारकर वारो धणो जिलो वारीअ वारो आहे। हिते आबादीअ जो घणो दारोमदार बरसाति ते आहें थर में जे बरसात पेई त उहो सजो इलाइको सुख्यो सताबो ऐं सुन्दर बणिजी पवन्दो, न त उव्हो रेगिस्तान ई आहे। वसे त कोहु, न त रोहु बरसाति में इलाइको सुहिणो, न त सुकलु मुल्क। सियारे में सीउ पवे, आड़हड़ में आरायूं सन्धु बिन्हीं में को न को, कंहिं खे साराहियूं! सिन्धु जे उत्तर में सर्दी ऐं गर्मी बई घणियूं थीन्दियूं आहिनि, जेेके परेशान कन्दड़ आहिनि।...