गमों का दौर भी मुस्कुराहट से हारा इल्म्स की 106 वीं संगीतमय प्रस्तुति में नूतन-राज याद आए


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गमों का दौर भी मुस्कुराहट से हारा

इल्म्स की 106 वीं संगीतमय प्रस्तुति में नूतन-राज याद आए


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गमों का दौर भी मुस्कुराहट से हारा

इल्म्स की 106 वीं संगीतमय प्रस्तुति में नूतन-राज याद आए

 अजमेर । 

थीम आधारित सांस्कृतिक, सामाजिक एवं स्वास्थ्य जागरूकता गतिविधियों के लिए चर्चित इंडिया इंटरनेशनल म्यूजिक लवर्स सोसायटी (IIMLS) की 106वीं संगीतमय संध्या अजमेर क्लब में उत्साह और भावनाओं के अनूठे संगम के साथ आयोजित हुई। 



इस रंगीन बेबी वॉकर के साथ अपने नन्हे-मुन्नों के पहले कदमों को मज़ेदार और सुरक्षित बनाएं। मज़बूत धातु के फ्रेम, सुचारू पहियों और आकर्षक लटकते खिलौनों से सुसज्जित यह वॉकर बच्चों का मनोरंजन करते हुए उनके संतुलन और चलने के कौशल को बेहतर बनाने में मदद करता है। हल्का, टिकाऊ और आसानी से ले जाने योग्य, यह वॉकर छोटे बच्चों के लिए एकदम सही है और बढ़ते बच्चों के लिए एक शानदार उपहार है।


संस्था के सेवा कार्यों और "म्यूजिक इज़ मेडिटेशन एंड थेरेपी" की अवधारणा की आमजन में अब निरंतर सराहना हो रही है। कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण तब आया जब शहर के एक प्रतिष्ठित गायक, जो डायबिटीज और लगातार धूम्रपान से अपंग बैसाखियों और सदस्य मोहन मिश्रा के सहारे कार्यक्रम में पहुंचकर "न मुँह छिपा के जियो" प्रस्तुत किया। उनकी जिजीविषा और संगीत के प्रति समर्पण देखकर उपस्थित सभी श्रोताओं ने खड़े होकर तालियों से उनका अभिनंदन किया। 

सुर, ताल संगीत के इस कार्यक्रम में नए और अनुभवी कलाकारों ने राज कपूर, नूतन, सुमन कल्याणपुर, सुनील दत्त तथा मणिरत्नम से जुड़े सदाबहार गीतों की स्वरांजली प्रस्तुत की। विभिन्न विभागों के अधिकारी, चिकित्सक, नर्सिंग कर्मी, पत्रकार एवं संगीत प्रेमी उपस्थित रहे। इनमें लिवर किडनी ब्रेस्ट कैंसर पीड़ित गायक भी शामिल थे ।

संस्थापक डॉ लाल थदानी स्वयं लिवर की बीमारी और 1 सप्ताह से बुखार के बावजूद डॉ. लाल थदानी ने "राम करे ऐसा हो जाए" तथा दिव्या गोपलानी के साथ "तेरे संग प्यार मैं नहीं तोड़ना" एकल और युगल प्रस्तुत कर संगीत साधना के प्रति अपने समर्पण का परिचय दिया। 

युगल गीतों में डॉ. दीपा थदानी एवं जेक्लीन (डीजे जोड़ी) द्वारा प्रस्तुत "ये रात भीगी-भीगी" तथा "ये रातें ये मौसम" को विशेष सराहना मिली। युधिष्ठिर चौहान एवं पूजा जैसवाल ने "तेरे प्यार का मुझपे" तथा "मेरा प्यार भी तू है" प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरीं।

नवागंतुक पूनम मिश्रा ने मोहन मिश्रा के साथ "आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे" प्रस्तुत किया तो श्रोता भी झूम उठे। वहीं शरद शर्मा के साथ "छोड़ दो आँचल" की प्रस्तुति ने उनके उज्ज्वल संगीत भविष्य के संकेत दिए। मीना कंजानी एवं एन.के. भार्गव ने "नींद न मुझको आए", मोहन मिश्रा के साथ "हम तुम युग-युग से" तथा "दिल की नज़र से" जैसे गीतों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। 
 
डाल चंद सवासिया /दिव्या गोपालानी : इन हवाओ मे, इन फ़िज़ाओं मे ( SD) संजीव वर्षा निहालानी डालचंद :मोहब्बत है क्या चीज़ और एन के भार्गव के साथ नींद न मुझ को आए लोग बाद में भी गुनगुनाते नजर आए ।


एकल प्रस्तुतियों में सेवानिवृत्त डिप्टी एसपी (विजिलेंस) लोकेश त्रिपाठी ने "फलक में जितने भी" के ऊँचे सुरों से अपनी गायकी का लोहा मनवाया। नवोदित गायक मनोहर गोकलानी ने "ऐ अजनबी तू भी कभी" प्रस्तुत कर प्रभावित किया। लक्ष्मण हरजानी ए भाई ज़रा देख के चलो में राजकपूर की हुबहू शैली में गाकर माहौल गमगीन कर दिया । संजीव है अपना दिल तो आवारा, नरेश रत्नानी ने मैं ज़िंदगी का साथ , उमेश चंदनानी ने तुम अगर साथ देने का वादा करो भी प्रभावशाली रहे ।

अरुण गुप्ता ने "तेरी आँखों के सिवा", ओ.पी. चास्टा ने "मुबारक हो सबको समाँ ये", श्याम कुमार पारीक ने "मेरे मन की गंगा", कुमकुम जैन ने "तेरा मेरा साथ रहे", कालूराम गुनरात ने "कहना है कहना है", रविन्द्र माथुर ने "मुझे तुमसे कुछ भी न चाहिए", डॉ. जयसिंह ने "आपके पहलू में आकर", निखिल माथुर ने "दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में" सहित अनेक कलाकारों ने शानदार प्रस्तुतियाँ दीं।

कार्यक्रम का भावुक समापन प्रसिद्ध नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. दिनेश बेदी की स्मृति को समर्पित "पूछो न मोहब्बत का असर" की सामूहिक प्रस्तुति के साथ हुआ। उपस्थित सदस्यों ने नम आँखों से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। नर्सिंग कर्मी मुकेश कोली द्वारा प्रस्तुत "राम तेरी गंगा मैली हो गई" तथा दीपा पारवानी के "इक दिन बिक जाएगा" गीतों में सभी सदस्यों ने सामूहिक स्वर देकर वातावरण को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम की व्यवस्थाएँ रेलवे अधिकारी डालचंद सिवासिया ने संभाली, साउंड व्यवस्था दिनेश शर्मा ने की तथा संचालन नर्सिंग कर्मी कालूराम ने किया।

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