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Bhagwan Atlani

https://youtu.be/-SGcTuFC2ek

बीकानेर में सागर संगीतालय का उद्धाटन 21/8/16

https://youtu.be/o5p7D2THsVg

Hum

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बीकानेर। विश्वास वाचनालय में 1995 की प्रकाशित सहेजी नाट्य पुस्तक; जिसे बाद में लेखक मधु आचार्य को भें किया। यह उनकी अनुपलब्ध कृति है।

पुस्तक मित्र

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Gift :-- Book's from Respected Sahityakar Dr Neeraj Daiya & Vyangyakar Bulaki Sharma :- on my Retirement 8/7/2016 At my house.

रोने से रोजी नहीं बढ़ती

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रोने से रोज़ी नहीं बढ़ती   अनथक कर्म करने के बावजूद वांछित प्रतिफल नहीं मिलने की शिकायत करने वाले बहुतेरे होंगे लेकिन कोई उनसे पूछे क्या रोना रोने से रोज़ी बढ़ती है ! दरअसल मैनेजमेंट कोर्स, अध्यात्म और व्यक्तित्व विकास जैसे प्रशिक्षणों में सकारात्मक विचारों की महत्ता बताई ही जाती है। ये सकारात्मक विचार-पाठ कोई आज के ईजाद पाठ्यक्रमों में प्रयुक्त नहीं होते बल्कि ‘‘उस्ताद-शागिर्द’’ काल से भी बहुत - बहुत पहले ‘‘गुरु-शिष्य’’ युग से सकारात्मकता को महत्व मिला हुआ है। पुराण कथाओं, ऐतिहासिक एवं लोककथाओं में भी सकारात्मक विचार अपनाने संबंधी सीख देने वाले उद्धहरण भरे पड़े हैं। आज का युग कल कारखानों में सिक्के ढालता है तो कभी श्रमिक वर्ग को खेत खलिहान में पसीना बहाकर या व्यापार के लिए दुरूह यात्राएं कर सेठ साहूकारों के लिए ‘‘गिन्नियों की थैलियां’’ भर लानी होती थी। श्रमिक वर्ग तब भी वांछित लाभ से वंचित रहता और आज भी कमोबेस ऐसा होता है। साथ ही यह भी तय है कि जगह जगह ऐसा रोना रोने वाले को लाभ भी बढ़ा हुआ नहीं मिलता। अर्थात युग और काम का रूप बदल गया लेकिन व्यवस्था ले देकर वहीं की वहीं रही ! प्रवृत...

इनामी सिंधी नाटकनि जा किताब छपजणु खपनि

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इनामी सिंधी नाटकनि जा किताब छपजणु खपनि ajmernama.com /guest-writer/150323/ associate बीकानेर।  जातल-सुंञातल सिंधी साहित्यकार, आलोचक अहमदबाद जे जेठो लालवानी चयो त राजस्थान सिंधी अकादमी जयपुर सां गडोगडु तमाम संस्थाउंनि पारां मेड़यल चटाभेटीअ में इनाम खट्यल सिंधी नाटकनि खे किताबी शिक्ल में पाठकनि ऐं रंगजगत जे साम्हूं आनणु खपे। ईआ जिम्मेदारी नाटकनि सां बावस्ता सभिनी लेखकनि, कलाकारनि जी आहे। जेठो लालवानी राजस्थान सिंधी नाटक सब्जैक्ट ते साहित्य अकादमी मुंबई, विशाल सिंध समाज सांस्कृतिक मंच बीकानेर ऐं सुजाग सिंधी मासिक जे गड्यल आयोजन जे समापन सत्र जी अध्यक्षता कंदे मौजूद रंग-प्रेमिनी खे संबोधित कनि पया। आयोजन बाबत पहिंजो रायो रखंदे वरिष्ठ साहित्यकार भगवान अटलानीअ चयो त हालात मुजिबु सभिनी खां अगु पहिंजी भाषा, कला, साहित्य ऐं संस्कृतिअ खे बचाइण लाइ कदम खणण जरूरी आहिनि। नाटक नवीस ऐं लेखक भाषा जी गरिमा जो बि ध्यानु रखंदे लिखनि ऐं नईं टेहीअ खे सिंधु संस्कृतिअ जे सुहिणनि रंगनि सां वाकिफु कराइनि। छह नाटकनि जो वाचन कयो वियो ऐं बाहिरियूं आयलि सिंधी साहित्यकारनि पहिंजा परचा पेश कया। परचनि...

अंजाम

धैर्यवान काठ की हाँडी बार बार खुद को आग से परे रहकर जलने से बचती और खिचड़ी पकाकर स्वार्थी को देती रही। एक दिन उसे लोगोँ को बेवकूफ बनाने वाले स्वार्थी पर हँसी आ गई। उसने स्वार्थी की खिचड़ी नष्ट कर अपनी महत्ता बताकर ख्याति पाने की गरज से आग से दूरी घटा ली। वो अधिक देर मुस्करा न सकी और जल गई। अट्टृ – काठ की हाँडी क्योँ मुस्कराई? पट्टृ – स्वार्थी को हदेँ पार करने मेँ लाज न आती देख। अट्टृ – फिर जली क्योँ? पट्टृ – खुद भी स्वार्थी होकर। 00000000000 अट्टू बीमार पत्नी पट्टू की तीमारदारी करते करते खुद बीमार हो गया। सेवा की बारी पत्नी की थी। पट्टू – ऐ जी उठो, नीँद की गोली खाए बिना ही सो गए।