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कुछ बहुत, कुछ - कुछ; कुछ बहुत कुछ, बहुत - कुछ

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कुछ बहुत कुछ कहते हैं... बहुत कुछ कुछ नहीं कहते...!!!...कुछ लोग कुछ विशेष  कार्य न करके भी कुछ न कुछ खासियत जोड़ कर कुछ न कुछ अपने ही बारे में बहुत  लोगो को  कुछ बताते रहते हैं !!!.. जबकि ... बहुत लोग बहुत कुछ उल्लेखनीय कार्य  करने के बाद भी कुछ लोगो को भी कुछ नहीं बताते...!!! कुछ बहुत कुछ में से  निकालने के लिए कुछ बहुत कुछ कुछ कार्य करते हैं...कुछ बहुत कुछ कार्य होते  हुवे भी कुछ नहीं करते...

camel fastival :- बर्फानी ओढणी सूं बारै आ पूग्या मरुधरा रौ जहाज देखण नै

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photo - Aalam Husain Sindhi BKN photo - Aalam Husain Sindhi BKN बर्फानी ओढणी सूं बारै आ पूग्या मरुधरा रौ जहाज देखण नै बीकानेर।  अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव मांय राजस्थानी, खास तौर सूं मरुनगरी रा लोक रंग मांय देश विदेश रै पावणां नै आपणोपण दिस्यौ। लोकवाद्यों री ताण सुकून दिरायो। बाळू रा लहरदार धोरां माथै दिन भर मुळकती धूप अ‘र  ठंडी टीर रात्यां मांय इनै सूं बिनै थिरकती चांदनी। फेस्टीवल रौ आखिरी दिन स्टेडियम में परंपरागत रूप सूं सज्योड़ा धज्योड़ा ऊंट। उमंग-उल्लास अ‘र उत्साह सूं गावंता नाचता लोक कलाकार। इण सब रौ हिवड़ै तांईं खुशी भरियोड़ा आनंद सूं निहारता सैलानियों रा झुंड। रेत रै इण समन्दर बिचाळै बस्योड़ो बीकाणे रौ ओ रूप ही तो सावन बीकानेर री लोकोक्ति पछै अबै पूस री रात बीकानेर री नूवीं नकोर-उक्ति रच रैयो है। मरुनगरी बीकानेर। राव बीकाजी रौ बीकाणो। अठै सावन मांय  प्रवासी तो पूगणा तय ही है। अबै नूवां आयाम स्थापित कर रैया है देश विदेश रा सैलानी। सावन नीं पण पूस री रात बितावणनै। हां जी। विगत मंे कुछ बरसां सूं अठै  पौष मास में यानी जनवरी महीने में अंतरराष्...

गढ़ों में गुमटियां ज्यों प्रहरियों की यारों

गढ़ों में गुमटियां ज्यों प्रहरियों की यारों    जलसों में गुटबंदी   त्यों   रहबरों की यारों         जख्मे जिगर कह रहे थे शहर पनाह पे चिल्ला के नजराना शय ही ऐसी है सनद रहे यारों 

हर दफतर में, नांगनि सां बिर भरियल आहिनि

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*BAHUBHASHI* *खबरों में बीकानेर*🎤 🌐   ✍️   🙏 मोहन थानवी 🙏   #Covid-19 #pm_modi #crime #बहुभाषी #Bikaner #novel #किसान #City #state #literature #zee Khabron Me Bikaner 🎤  सच्चाई पढ़ें । सकारात्मक रहें। संभावनाएं तलाशें ।   ✍️  हर दफतर में, नांगनि सां बिर भरियल आहिनि * पंध परे जा * ** पुस्तक परिचय शाइरु - मुरली गोविंदाणी  प्रकाषक - ेंग 34 आदिपुर 370205 कछ गुजरात         टेलीफोन 0236 261150 संस्करण - 2012  पंध परे जा असां कीअं सडायूं त सिंधी आहियूं / न असां खे मिलियो सिंधु देश जो टुकरो / न रहियो आ असां जो वेसु को हिकड़ो / असां त हर देश जा पांधी आहियूं /असां कीअं सडायूं त सिंधी आहियूं ।  इनि पंजकिड़े मंझ सिंधी समाज जो उवो सूरु साम्हूं अचे थो जेको विरहांङे बैद वधंदो इ रहियो आहे। तकरीबनि 66 वरिहयह अगु जेको सूरु दिल डुखाइंदो रहियो आहे उनिजो को इलाजु बि को हकीमु वैदु कोन करे सघंदो। सिंधी साहित्यकारनि इनि सूरु खे पहिंजे रचनाकर्म म...

तारीख भी क्या कमाल करती...रोशन राहों पे ला सजा देती है...

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तारीख भी क्या कमाल करती है  तारीख भी क्या कमाल करती है चेहरे पे चेहरे लगा औरों को मोहरा बनाने वालों को स्याह कोठरी से निकाल रोशन राहों पे ला सजा देती है तारीख भी क्या कमाल करती है कैलेंडर के पन्नों में खुद बदल जाती दुनिया में इतिहास बदल देती है घंटे पहले डुबो देती सूरज और छह घंटे बाद फिर सूरज उगा देती है तारीख भी क्या कमाल करती है चेहरे पे चेहरे लगा औरों को मोहरा बनाने वालों को स्याह कोठरी से निकाल रोशन राहों पे ला सजा देती है

हजार हवेलियों का शहर के रचनाकार श्री उपध्यानचंद्र कोचर

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Shri U C Kochar - Bikaner Raj.                                                                                                                                                                                                                                                                                    ...

ये प्यास है ही बड़ी ... आब की बात है प्यास की बात है

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प्यास प्रेम की हो या सूखे कंठ की ऋतु हो सर्द या बासंतिक चले हवा ऋतु हो परिवर्तन दौर में या हिम सा ठंडा हो प्रांगण चलती जब हवा गर्म इसी प्यास के  बहाने पिघलते हिमालय के दहाने ये प्यास है ही बड़ी ... आब की बात है प्यास की बात है