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सिंधी नाटक कृपालु संत साधु वासवाणी

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सिंधी नाटक कृपालु संत जे पहिरियें सीन जो आखिरी भांङों पेशु आहे -- ( इयो नाटक हिंदू अजमेर में अरबी सिंधीअ में साया थिअलि आहे ) ... दादा साहिब चवनि था, डिसो। जहिं संत माण्हूंनि खे इ न बल्कि हरेकु प्राणीअ खे हिकु जेहिड़ो भगवान जो सृजन बुधायो हो, उन्हींअ इ संत लाइ झूनी ऐं नई टहीअ में तकरार जी गाल्हि बुधी मूखे खिल इ त इन्दी। माण्हूं चवनि था, दादा तव्हां असांखे साधु वासवाणी साहिब बाबत जाण ड्यो। दादा जे पी वासवानी साहिब चवनि था, - संत साधु वासवानी त पाण चवन्दा हुआ, जीव मात्र में फर्कु न कजे। ऐं तव्हां उननि इ संतनि जी गाल्हियूंनि खे दरकिनार करे जीव मात्र इ न बल्कि खुद उननि संतनि जे नाले ते बि झेड़ो था कयो। इननि संतनि त पहिंजी सजी हयाती तप करे भगवान खां माण्हूनि जो भलो घुर्यो। माण्हुनि जे वरी जोर डिहण ते दादा साहिब कृपालु संत साधु वासवानी जी हयाती ऐं उननि जे उपदेशनि बाबत तफसील सां गाल्हियूं बुधाइनि था। इनि वक्ति इ पार्टी में दादा श्याम जो भजन गूंजे थो, - अलख धाम मां नाल्हे मौत तिनि लाइ, अंखियूंनि जिनि जूं निहारनि, पहाड़नि त तिनि डे, जीअं प्यारनि खे पुकारनि! रहनि रहम में से त आल्यिूंनि अं...

अजब कीमियासाज ...

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sckech by & PIYU अजब कीमियासाज हैं 'वे' लोग । मिट्टी को सोना बताते हैं ...  । लेकिन इससे नुकसान न सोने को होता न मिट्टी को । क्योंकि तिजारत पसंद हैं बाकी लोग... अपने मिट्टी के ढेलों की भी कीमत  कीमियासाजों  से ही सोने के भाव वसूल लेते हैं ।  = आखिर नुकसान कीमियासाज को ही होता है ।
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प्रकृति पहले स्वयं बदलती है फिर हमें बदलना ही पड़ता है। Novelist Mohan Thanvi Bikaner प्रकृति पहले स्वयं बदलती है फिर हमें बदलना ही पड़ता है।

पांच रुपए की दीर्घ कथा

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Hindi / Sindhi / Rajasthani Novelist Mohan Thanvi  पांच रुपए की दीर्घ कथा-   बाबूजी साग वाले से बोले -  बेटा चार टाइम के लिए 2-2 रुपए की मिर्च धनियां अदरक और 5-5रुपए की पालक मैथी मूली तोल दोगे या ज्यादा का लूँ ? साग वाले ने कहा काफी है बाबूजी । आपको न दूंगा तो जीवन कैसे सुधारूंगा । और एक रुपया खुला न हो तो 20 रुपए ही दे देना । रुपए चुका कर साग से भरा थैला संभाल बाबूजी बोले - महंगाई को तो पंख लगे हैं । वृद्धावस्था पेंशन के हम दोनों को मिलने वाले 500 रुपए से हम दोनों का गुजारा नहीं होता बेटा । जाने लगे कि एक बच्चे ने साग वाले की पीठ पर चढ़ते हुए कहा , बाबा स्कूल जा रहा हूं खर्ची दो । साग वाले ने उसे लाड़ करते हुए 5 रुपए दिए । बच्चा तुनक कर बोला - ये क्या बाबा, 5 रुपए की तो मिर्ची भी नहीं आती और मुझे लेनी है चॉकलेट। कम से कम 50 रुपए लूंगा । साग वाले ने बाबूजी से नजरें चुराते हुए 50 रुपए देकर बच्चे को विदा किया । बाबूजी भी रुके नहीं । साग वाला मुझसे बोला - देख लो मास्टर जी । चॉकलेट 50 और साग 5 का, इसलिए महंगाई तो बढ़ेगी ही । 

गीत जीत रा गावां ला जी... करणी माता जावांला...

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गीत जीत रा गावां ला जी... करणी माता जावांला... देशनोक में करणीमाता जी के भी दर्शन किए तो अहमदबाद से आए भतीजे पिंटू ने काबा के दर्शनार्थ बहुत जतन किए... श्वेत काबा को तो कैमरे में नहीं ला सके...

गीत जीत रा गावां ला जी... करणी माता जावांला...

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गीत जीत रा गावां ला जी... करणी माता जावांला... देशनोक में करणीमाता जी के भी दर्शन किए तो अहमदबाद से आए भतीजे पिंटू ने काबा के दर्शनार्थ बहुत जतन किए... श्वेत काबा को तो कैमरे में नहीं ला सके...

लहरें सागर की / उनका ख्याल भी ...

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उनका ख्याल भी  लहरें सागर की ...     उनकी मुस्कान भी  कहकहा  मान  दिल  धड़क धड़क जाता है ...   वो  आंख की कोर से देखते हैं  आहट पे ...  फिजां खुशबूदार हो जाती है ...   वो तो हैं हीं बलखाती उमंगें ...  उनका ख्याल भी  लहरें सागर की  लगता है ...  दिल  धड़क धड़क जाता है ...