Posts

भासा अ’र देस री बात्यां कागद माथै उकेर आजादी री अलख जगाई / राजस्थानी उपन्यास *कुसुम संतो* से

याद राखणौ जरूरी है कै 1857 रै जुद्ध रै बाद भारतेन्दु अष्र दूजा कवि भासा अष्र परतंत्र देस री बात्यां कागद माथै उकेर लोगां रै मन में आजादी री अलख जगाई ही ! ( राजस्थानी उपन्यास ’कुसुम संतो’ से   )... भाषा साहित्य मिनख.मिनख नै जोड़ै! देस री एकता रै वास्तै भासा अेक जरियो बणै! आ बात कैई जा सकै। जियांष्क विदेसियां रै आक्रमण सूं जद आपणै देस रो जनए या कैवां कै म्है लोग जद त्रस्त हुईग्या हाए बीं बखत साहित्यकार जगत जिकी एकता रो दरसण आपणी कलम सूं करायोए बा बात कोई दो.चार सताब्दियां में भी भूलीजणी आसान कोनी। बीं बखत किरसण भगवान रो बखान बिपती रै दिनां सूं छुटकारो पावण रो एक उपाय जियां लागै कैवां तो सायद गलत कोनी समझो जावैळा। सूरदास उण बगत स्री किरसनजी री लीलावां नै कागद माथै उकेर जीव.जगत नै जीवण रो नूवांे अंदाज दिरायो। राजपाट नै एक तरफां राख इब्राहीम मियां जद रसखान बण सकै तो समझणोें कै ओ भगती रो ई ज बखान है।  केरल रा एक महाराजा राम वर्मा ष्स्वाति तिरुनालष् रै नाम सूं कविता करता हा।  महारास्टर रा संत ज्ञानेस्वरए नामदेव अष्र सिन्धु प्रदेस  रा श्रीलालजी भी कवि ही नीं किरस...

कृपालु संत साधु वासवानी जी / दादा श्याम जो भजन

कृपालु संत साधु वासवानी जी का यह भजन पूना से प्रकाशित श्याम साप्ताहिक से अरबी सिंधी से देवनागरी में रूपांतरित कर अपने नाटक कपालु संत में शामिल किया । यह नाटक अजमेर से प्रकाशित दैनिक हिंदू में अरबी सिंधी में  ( मोहन थानवी जी कलम मां कॉलम में ) 2011 प्रकाशित हो चुका है।  अलख धाम मां नाल्हे मौत तिनि लाइ, अंखियूंनि जिनि जूं निहारनि, पहाड़नि त तिनि डे, जीअं प्यारनि खे पुकारनि! रहनि रहम में से त आल्यिूंनि अंख्यिूंनि, सबक इक त सिक जो, से आहिनि सुख्यूं! पया था त कोठनि, प्रभुअ जा पहाड़ा! अचनि यादु वरी वरी, पया से त प्यारा! करे केरु दूर, प्यारनि जी जुदाई ! जीवन आहे जिनि जी, प्रभुअ में समाये! मरे ही बदनु थो, जिस्मु ही जले, पर आत्मा अमर, सदा पयो हले! काल डिस जो घर, फकत काल ढाहे, पर आत्मा अजरु ऐं अविनाशी आहे! मरे कीअं कोई ऊंव, न कोई कीअं सड़े, न कोई मौत परदो, रखी उन परे अलख धाम मां आहे, नूरी निमाणी रहे रोज रोषन, न रह तूं वेगाणी।

साथ जुड़ना ... हेनरी फ़ोर्ड (mahapurushon ki wani )

Image
साथ जुड़ना एक शुरूआत है; साथ रहना प्रगति है और साथ काम करना ही सफलता है- हेनरी फ़ोर्ड

eid mubaraq ईद मुबारक

Image
eid mubaraq eid mubaraq ईद मुबारक eid mubaraq ईद मुबारक eid mubaraq ईद मुबारक eid mubaraq  ईद मुबारक eid mubaraq   ईद मुबारक eid mubaraq   ईद मुबारक eid mubaraq  ईद मुबारक eid mubaraq ईद मुबारक eid mubaraq ईद मुबारक eid mubaraq ईद मुबारक eid mubaraq ईद मुबारक eid mubaraq ईद मुबारक ईद मुबारक

हम और हमारा विश्वास

Image
हम और हमारा विश्वास

वैश्वीकरण... दिखाउं जो आईना तो बड़ी बात

Image
देखू जो आईना तो कोई बड़ी बात नहीं कहती है दुनिया दिखाउं जो आईना तो बड़ी बात मान लेती है दुनिया... ...                       अल्बर्ट कैमस के क्रास प्रपोज पर आधारित हरिकांत जेठवानी रचित पांच पात्रीय सिंधी नाटक हत्या एक सपने की... पढ़ते समय अहसास हुआ कि हिंदी अंग्रेजी सिंधी राजस्थानी गुजराती मराठी या किन्हीं भी भाषाओं में रचे साहित्य को किसी भी भाषा में अनूदित कर साहित्यकार किस तरह सहजता सरलता से वैश्वीकरण में पाठक की महत्वपूर्ण भूमिका बना देते हैं । 

मां, रोटी भी क्यों गोल !

Image
घर में तू बनाती पेट भरने को मां, वह रोटी भी क्यों गोल !... Panting :- Kritika Thanvi : Shishu Vihar BKN क्या हम भूख को देते धोखा सच्ची बोल मां, रोटी भी क्यों गोल! मां, सारी दुनिया देती धोखा चारों और हो रहा गोलमाल लंबी, चपटी सब चीजों में भरी पोल घर में तू बनाती पेट भरने को मां, वह रोटी भी क्यों गोल! क्या हम भूख को देते धोखा सच्ची बोल सीखा तुझसे तोलमोल के बोल मां, फिर भी सारी दुनिया देती धोखा मानव-मानव में अपने पराये का जहर घोल प्रकृति का खजाना स्वार्थ की चाबी से खोल चांद-सूरज ठंडे-गरम मगर हैं वे भी गोल मां, ऐसा कर कुछ समझे दुनिया सच्चाई का मोल मां, सारी दुनिया में हो अपनापन कहीं न हो कोई परेशान सब तुझ-से हों निश्छल, ममतामयी तू दे ऐसी घुट्टी बच्चों को मां और घर में तू बनाती पेट भरने को मां, वह रोटी भी क्यों गोल !... क्या हम भूख को देते धोखा सच्ची बोल मां, रोटी भी क्यों गोल! मां, सारी दुनिया देती धोखा चारों और हो रहा गोलमाल लंबी, चपटी सब चीजों में भरी पोल घर में तू बनाती पेट भरने को मां, वह रोटी भी क्यों गोल! क्या हम ...