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इतिहास के वातायन से झांकती नारी शक्ति: सिंधी नॉवेल से अंश...

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इतिहास के वातायन से झांकती नारी शक्ति: सिंधी नॉवेल से अंश... इनि वक्ति बई निराण भाजाइयूं गुझे सुफे में ई वेठियूं गाल्हियंू पइयूं कनि। उननिसां गडु लिखमी ऐं मेवी बि हुई। जाहिरु आहेए सिंधु जियूं इअे चारई वीर जालियूं अगिते लाइ रणनीति बणाइण में मशगूल हुइयूं। लिखमी     .     माई पदमा जी गाल्हि तवज्जो डिहण वारी आहे। दुश्मन इनि वक्ति अल्लोर जे         किले डाहुं वधण जी कोशिश कंदो। हालात इन्हींअ डाहुं साफ साफ इशारो         कनि था। दुश्मन जी फितरत खे डिसंदे इनि गाल्हि में बि को शुबहो कोने कि         महलात या किले जे खास माण्हूंनि खे बरगलाए करे दुश्मन पहिंजी साजिश में         शामिल करण लाइ फतकंदो हूंदो। माई .         दुश्मन जी फितरत खे पोइनि कुझु महीननि खां तव्हां ऐं मां चंङी तरहां सुञाणे         परखे वड़तो आहे। हालांकि महाराजा दाहर बि दुश्मन जी हरेकु साजिश खे      ...

कर्म बिना फल का नहीं होता...

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जीवन प्रबंधन से ही व्यवस्थित और सुखमय हो सकता है। बिना प्रबंधन के तो चींटी भी नहीं जीती। चींटी ही क्यों, प्रत्येक प्राणी को समूह में जीते ही हम देखते हैं। ऐसा कोई प्राणी नहीं जो अकेला जीता हो या आज तक जीया हो। पेड़-पौधों को भी समूह में लहलहाना अच्छा लगता है क्योंकि वे भी बीज रूप से प्रस्फुटित होने से लेकर मुरझाने तक एक कुषल प्रबंधन प्रणाली से विकसित होते हैं, फल देते हैं। जीवन का मकसद ही फल देना है। गीता का संदेश है, कर्म किए जाओ फल की इच्छा मत करो... साथ ही यह भी कोई भी कर्म बिना फल का नहीं होता।

आप आपकी मूंछो कै सै ताव दे

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Rajasthani Bhasha sahity ke gahne.. inhen rajasthani blog se hi liya hai - SAABHAAR आप आपकी मूंछो कै सै ताव दे हैं। आप आपकी रोट्यां नीचे सै आंच देवै। आप आपके दाणै पाणी मे मसत है। आप आपको जी सै नैं प्यारो। आप कमाया कामड़ा, दई न दीजै दोस।

साजिश / साजिशी / सज्जन... साजगिरी

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साजिश  में  मशगूल / साजिशी  को  फुर्सत  नहीं  थी / सज्जन  साजगिरी  गुंजाता / सादगी  से  'पार ' पहुँच  गया... ......( दूसरो को भटकाने वाला अपने ही लक्ष्य से भटक जाता है और  कभी मंजिल तक नहीं पहुचता जबकि अपने काम से काम रखते हुव़े लगातार लक्ष्य की ओर बढ़ने वाले को निश्चय ही मंजिल मिल जाती है...)

"" हम सभी जुड़े हैं ! हम बस इसे देख नहीं पाते...

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"" हम सभी जुड़े हैं ! हम बस इसे देख नहीं पाते हैं ! "बाहर वहां" और "अन्दर यहाँ" का कोई भेद नहीं है ! ब्रह्माण्ड में हर चीज़ जुडी है ! यह ऍक वृहद् ऊर्जा क्षेत्र है !""  -   जाँन असाराफ""  ( साभार - The Secret  रहस्य ...pustak  से ) ""

दाणो पाणी परसराम बाह पकड़ ले जात!!!

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मायड भाषा -- अंजळ बडो बलवान ! ..... जहा का दाना-पानी लिखा हो मनुष्य को वहीँ जाना होता है! ....  कित कासी कित कासमीर खुरासाण गुजरात -- दाणो पाणी परसराम बाह पकड़ ले जात!!!

आवाजों के जंगल मे ...

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ख़ामोशी  के  सुर ... अच्छे  लगते  है ... चुप  रहके  भी ... बहुत  कहते  हैं ... जुबां  फिसलती  नहीं ... ...फिसलने  के  बहाने ... किस्सा -ऐ -दिल  बनते  हैं ... आवाजों  के  जंगल  मे ... ख़ामोशी  के  मकान  बनते  हैं ... ख़ामोशी  के  सुर ... अच्छे  लगते  हैं ... 'वो '  उनसे  कुछ  कहते  नहीं ... 'वे '  फिर  भी  'उनकी  अनकाही  को  सुनते  हैं