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'महाभारत की तरह ही लॉकडाउन हटाने या बढ़ाने पर मोदी सरकार धर्मसंकट में'
खास खबर
इकॉनमी भी बचानी है और कोरोना का कहर भी रोकना है
जाने माने पैनलिस्टों ने कहा कि कोरोना नहीं तो गरीबी मार डालेगी
नई दिल्ली। कोरोना वायरस की
वजह से सरकार के लिए धर्म संकट खड़ा हो गया
है। इकॉनमी को बचाने के लिए लॉकडाउन खत्म
किया जाता है तो वायरस फैलने का खतरा पैदा हो
जाएगा और अगर लॉकडाउन बढ़ाते हैं तो इकॉनमी
को इतना नुकसान पहुंच सकता है कि बाद में
जीवन जीने लायक ही न रहे। कोरोना वायरस को
लेकर बेनेट यूनिवर्सिटी के ग्लोबल ऑनलाइन
कॉन्फ्रेंस 'कोविड-19: फॉलआउट ऐंड यूचर
में जाने-माने पैनलिस्टों की यह सर्वसम्मत राय
थी। चर्चित लेखक और टिप्पणीकार गुरचरन दास
ने तो महाभारत का जिक्र करते हुए सरकार के इस
'धर्म संकट' के बारे में बताया।
भारत ने कोरोना वायरस को रोकने के लिए
दुनिया में सबसे कड़े लॉकडाउन को लागू किया
है। दास ने कहा, अगर आप बीमारी से 100 लोगों
की जिंदगियां बचाते हैं लेकिन बेरोजगारी की
वजह से 200 लोगों की मौत हो जाती है तो
आपको दोनों विकल्पों में से उसे चुनना चाहिए
जिसमें कम लोगों की जान जाए। लेकिन जब मैं
इसे व्यक्तिगत तौर पर सोचता हूं कि क्या मुझे
अपने ही बेटे को कोरोना वायरस से मरने देना
चाहिए या नहीं तो विकल्प बदल जाता है। मैं तब
मौजूदा जिंदगियों को बचाने का विकल्प चुनूंगा न
कि भविष्य की जिंदगियों को लेकर फिक्र करूंगा।
गुरचरण दास ने आगे कहा, महाभारत में
विदुर (तत्कालीन हस्तिनापुर राज्य के प्रधान
सलाहकार) इसके उलट फैसला लेते। उन्होंने
कहा था कि वह एक पूरे गांव को बचाने के लिए
एक व्यक्ति का बलिदान कर देंगे। यह एक धर्म
संकट है। दोनों ही सूरत में आपका नुकसान है।
सरकार इस वक्त किस धर्म संकट के दौर
से गुजर रही है, इसे समझाते हुए दास ने कहा, इस
लॉकडाउन के दौरान बिहार के एक गरीब प्रवासी
मजदूर ने यह कहा कि अगर कोरोना मुझे नहीं मार
पाया तो भूख मुझे जरूर मार देगी। किसे जिंदा
रहना चाहिए और किसने मरने देना चाहिए, मोदी
सरकार इसी सवाल का सामना कर रही है।
गुरचरण दास ने चेताया कि कई बार
लॉकडाउन बढ़ाने से भीषण मंदी आएगी और
करीब 25 करोड़ दिहाड़ी मजदूर भूख से मरने
लगेंगे। इस तरह महामारी भारत को दशकों पीछे
ढकेल देगी। दास ने कहा, जब मैंने इस दुविधा
के बारे में सोचा तो मुझे भी नहीं समझ में आया
कि अगर जिंदगियों को बचाने की प्राथमिकता का
नतीजा यह निकले कि आगे जिंदगी जीने लायक
ही नहीं रह जाए तो जिंदगी बचाना कितना जरूरी
है। क्या इलाज बीमारी से भी ज्यादा बुरी है, यही
दुविधा है। दास ने आगे कहा, सरकार को आंशिक
या चुनिंदा लॉकडाउन अपनाना चाहिए। हमने इतने
कम लोगों की जांच की है कि हमें नहीं पता कि
असल में स्थिति कितनी खराब है। हालांकि, अगर
बड़े पैमाने पर टेस्टिंग हो तो 2 हफ्ते में तस्वीर
साफ हो सकती है। लेकिन मौजूदा आंकड़ों को
मुताबिक हम आंशिक लॉकडाउन का जुआ खेल
सकते हैं।
इकॉनमी का 50-55 प्रतिशत हिस्सा
बर्बाद हो चुका है: पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा,
इकॉनमी का 1/6 हिस्सा डिजिटल है जो अभी
काम कर रही है। लेकिन इकॉनमी का 50-55
हिस्सा बिखर चुका है। इससे मेरा अनुमान है कि
एक महीने के वक्त में ही जीडीपी को करीब 6
प्रतिशत का नुकसान पहुंचेगा।
आरबीआई मॉनिटरी पॉलिसी रिपोर्ट,
कोरोना ने फेर दिया पानी, जीडीपी
ग्रोथ का अनुमान लगाना मुश्किल कोरोना वायरस की वजह से भारतीय
अर्थव्यवस्था को झटका लगने वाला है। खासकर
जीडीपी के मोर्चे पर भारतीय रिजर्व बैंक ने आगाह
कर दिया है। मंदी के दौर से गुजर रही
अर्थ व्यवस्था को कोरोना ने और पीछे धकेला।
कोरोना वायरस की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था
को झटका लगने वाला है। खासकर जीडीपी के
मोर्चे पर भारतीय रिजर्व बैंक ने आगाह कर दिया
है। वहीं ग्लोबल इकोनॉमी 2020 में स्लोडाउन में
जा सकती है।
साभार हिस युगपक्ष
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