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✒️@Mohan Thanvi
मृत्यु निश्चित होने के बाद भी हम नहीं करते स्वीकार : पं व्यास
मृत्यु निश्चित होने के बाद भी हम नहीं करते स्वीकार : पं व्यास
बीकानेर। श्री आदि गणेश मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन भक्ति, धर्म और मानवीय आदर्शों से जुड़े प्रेरणादायक प्रसंगों का वर्णन किया गया। इस दौरान कथा पंडाल श्याम ला गिरधारी... जैसे भजनों से गूंज उठा,जिस पर श्रद्धालु भक्तिभाव में लीन होकर झूमते रहे। कथा वाचक पं सुनील व्यास बताया कि मनुष्य माया को शाश्वत मान लेता है और अपने शरीर को प्रधान मान लेता है। जबकि शरीर नश्वर है। कथा में भगवान नरसिंह अवतार का प्रसंग सुनाया गया,जिसमें भक्त प्रह्लाद की अटूट श्रद्धा और विश्वास का वर्णन किया गया। उन्होंने कहा कि विडंबना ये है कि मृत्यु निश्चित होने के बाद भी हम उसे स्वीकार नहीं करते हैं।
व्यास पीठाधीश्वर ने भागवत कथा के दौरान कपिल चरित्र,सती चरित्र,धु्रव चरित्र,जड़ भरत चरित्र,नृसिंह अवतार आदि प्रसंगों की व्याख्या की।
जब भगवान शिव के विवाह की झांकी निकाली गई, तो माहौल एकदम उत्सव जैसा हो गया। शिव विवाह प्रसंग में भजनों पर श्रद्धालु देर तक नाचते-झूमते रहे।रामसा व्यास के साथ आई भजन मंडली की ओर से प्रस्तुत किए गए भजनों पर श्रोता भाव विभोर होकर नाचने लगे।






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