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6 जनवरी 2026 मंगलवार
खबरों में बीकानेर
✒️@Mohan Thanvi
गुरुदेव तुलसी के अवदान जन जन के कल्याण के लिए थे - उग्रविहारी तपोमूर्ति कमल मुनि
गुरुदेव तुलसी के अवदान जन जन के कल्याण के लिए थे - उग्रविहारी तपोमूर्ति कमल मुनि
*श्रावक जीवनमल जी सहज़, सरल, मितभाषी और आत्मलीन प्रवर्ति के इंसान थे*
(स्मृति सभा में मुनि कमल के उद्घार)
आचार्य श्री तुलसी की मासिक पुण्यतिथि के अवसर पर आशीर्वाद भवन में उद्बोधन देते हुए उग्रविहारी तपोमूर्ति मुनिश्री कमलकुमार जी स्वामी ने कहा कि गुरुदेव श्री तुलसी संत परंपरा के उज्जवल नक्षत्र थे, जीवन पर्यंत उन्होंने स्वयं के आत्मकल्याण के साथ जन जन के कल्याण के लिए अथक श्रम किया, वे मानव मात्र में नैतिकता और मानवीय मूल्यों की प्रतिष्ठा के लिए लगे रहे इसलिए उनके अवदान भले अणुव्रत हो, जीवन विज्ञानं हो, प्रेक्षा ध्यान हो चाहे नया मोड़ हो ये सभी उस समय की परिस्थिति और कुरुढ़ियों को दूर करने के लिए आम आदमी के हित के लिए थे. आचार्य तुलसी का आचार्य काल तेरापंथ धर्मसंघ में आज तक सबसे लम्बे समय का रहा है और उनके अवदानों की श्रखला भी बहुत लम्बी रही है -----
आज के कार्यक्रम में आचार्य श्री तुलसी शान्ति प्रतिष्ठान के मंत्री दीपक आंचलिया के पिता जी स्व. जीवनमल आंचलिया की स्मृति सभा में में बोलते हुए मुनि श्री कमल कुमार जी नें कहा कि जीवनमल जी के पिता जी सुगनचन्द जी आंचलिया एवं उनकी धर्मपत्नी मनोहरी देवी आंचलिया का धर्मसंघ में बेजोड़ योगदान रहा है। समाज ने उन्हें "समाज भूषण" की उपाधि प्रदान की, गुरूओं ने "शासन भक्त" से संबोधित किया। मनोहरी देवी को "नारीरत्न" की उपाधि मिली हुई थी। धर्म संघ में उन दोनों का प्रशंसनीय और उल्लेखनीय योगदान रहा है। श्राविका मनोहरी देवी मासखमण तपस्या में भी रोज साधु संतों के दर्शन करने वाली और प्रवचन सुनने वाली श्राविका थी। श्रावक जीवनमल जी सहज सरल, मितभाषी व आत्मा में लीन श्रावक थे । बहुत ऊँचे परिणामों से जीवन का अंतिम समय बिताया.
मुनि श्री ने कहा कि भगवान् महावीर ने बताया कि जिसका जन्म होता है वह मृत्यु को भी प्राप्त होता है। भगवान् महावीर ने कहा कि संयमी जीवन सर्वश्रेष्ठ होता है। असंयमी का क्षण भर भी जीना कष्टकारी होता है।
मुनि श्री ने कहा कि "समया धम्म मुदाहरे मुणी" अर्थात समता में ही धर्म है। लाभ अलाभ, सुख- दुख में सम भाव रखना चाहिए।
जब व्यक्ति का अंतिम समय दृष्टिगोचर होना लगने लग जाये उस समय परिवार के सदस्यों को जागरूक व मनोबल से त्याग, तपस्या, ध्यान स्वाध्याय व संथारे संलेखना की ओर आगे बढ़ना चाहिए। मुनि श्री नें इस अवसर पर श्री जीवन मल जी के पुत्र दीपक पुत्रवधु मिनाक्षी और पौत्र गुनीत सहित पुरे परिवार में धार्मिक संस्कारों की प्रति प्रसन्नता प्रकट की.
मुनि श्री श्रेयांस कुमार जी ने गीतिका का संगान किया। मुनि श्री नें दिवंगत आत्मा की स्मृति में एक लॉगस का ध्यान करवाया..
स्मृति सभा में जय तुलसी फाउंडेशन की ओर से सुरेन्द्र जी दूगड़ ने अपने विचार व्यक्त किऐ। श्री तुलसी दूगड़ ने गुरूदेव से प्राप्त संदेश का वाचन किया। आचार्य तुलसी शान्तिप्रतिष्ठान से अध्यक्ष गणेश जी बोथरा ने व जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा गंगाशहर की ओर से सभा के मंत्री जतनलाल संचेती ने अपने विचार व्यक्त किये ।
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