खबरों में बीकानेर
मन रंगों में नहा रहा, रंग बहुतेरे, राम-राम

जय जय प्रयागराज 🙏 pic.twitter.com/47uNRNfxKP
— Mohan Thanvi / खबरों में बीकानेर 🎤 🌐 (@Mohanthanvi) February 23, 2025
मन रंगों में नहा रहा, रंग बहुतेरे
आज मन रंगों में नहा रहा। मन के रंग बहुतेरे होते हैं न। लोग तो दुनिया के रंग देख कौतुक करते हैं। मन अपने ही आईने में अपने ही रंगों को देख धक धक धुकता है। कोई कोई मन धिक्कारता भी होगा ! मन जिसका है उसीका आईना भी तो है। यूं तो सभी जानते हैं रंग सात होते हैं। साथ साथ ही होते हैं। यह इतर है कि विरला कोई मन का काला होता है। यूं तो रँग हर शय मेँ होते ही हैं न। बचपन मेँ रंगों का अलग ही आकर्षण होता है। फिर जवानी मेँ
रंग चटक होते लगते हैं। तौबा तौबा, किसी किसी को बुढापे मेँ तो दुनिया के रंग तौबा करवाने की कुव्वत रखने लगते हैं। और हां, हर मौसम मेँ रंग अलहदा दिखने लगते हैं। और हर बात मेँ तो अपना एक अलग ही रंग भरा होता है। वैसे मेरा तो यह मानना है कि रंग जीवन को निखारते
चमकाते हैं। रंगों की मुस्कान से ही हम एक दूसरे के पास आते हैं। रंग ही हमें आपके और आपको हमारे
पास बुलाते हैं न। फिर हम दीपावली के दियोँ मेँ भी तो खुशी के रंग झिलमिलाते देखा करते हैं। कुछ कुछ ऐसे ही रंगों से ईद की खुशी मेँ मन रंग जाता है। और गुरुपर्व मेँ तो रंग नाचते दिखते हैं। भंगड़ा करते हैं। रंगों की छटा क्रिसमस ट्री मेँ अलहदा नजारा करवाती है। और खासतौर से रंग होली मेँ तो मन को उल्हासित करते थकते नहीं। मन के रँगों का कोई ओर न छोर।
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होली खेल सीखे जीना हम
रंगों जैसे हिलमिल रहते हम
खुशरंग बन खिलखिलाते हम
होली की राम राम कर रहे हम
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मोहन थानवी






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