नईदिल्ली । विपक्षी दलों के भारी विरोध के बीच सरकार ने गुरुवार को लोकसभा में 'वक्फ (संशोधन) विधेयक-2024' और 'मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक-2024' को पेश किया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा नाम पुकारे जाने पर अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू जब सदन में 'वक्फ (संशोधन) विधेयक-2024' को पेश करने के लिए खड़े हुए तो राहुल
गांधी और अखिलेश यादव सहित पूरा विपक्ष विरोध में सदन में खड़े हो गए।
विपक्षी दलों की तरफ से बोलते हुए कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल एवं इमरान मसूद, सपा से अखिलेश यादव एवं मोहिब्बुल्लाह, टीएमसी से सुदीप बंदोपाध्याय, एनसीपी (शरद पवार) से सुप्रिया सुले और एआईएमआईएम से असदुद्दीन ओवैसी के अलावा डीएमके,
आईयूएमएल, सीपीआई, सीपीआई (एम), आरएसपी, वीसीके सहित अन्य कई विपक्षी दलों के सांसदों ने इसे संविधान और मुसलमान विरोधी बताते हुए इसे पेश करने का विरोध किया।
लोकसभा में अटका बिल वक्फ बोर्ड बिल जिसे लोकसभा
में पेश किया गया था, वो अटक गया है। अब यह बिल संयुक्त संसदीय समिति को भेजा जाएगा। विधेयक में शामिल प्रावधानों पर विपक्षी दलों की आपत्ति के बाद किरेन रिजिजू ने प्रस्ताव रखा कि इसको ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी को भेज दिया जाए।
इस पर स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि हां, जल्द ही कमेटी बनाऊंगा। स्पीकर अब दोनों सदनों के सदस्यों की एक जेपीसी बनाएंगे जो इस विधेयक के पहलुओं और सांसदों की आपत्तियों पर विचार करेगी और संसद को अपनी सिफारिश सौंपेगी।
किन-किन दलों ने किया बिल का समर्थन मोदी सरकार द्वारा लाई गयी इस
संशोधन बिल का कांग्रेस, टीएमसी, समाजवादी पार्टी, डीएमके, माकपा, भाकपा, वाईएसआर कांग्रेस आदि पार्टियों ने विरोध किया, वहीं सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में शामिल जनता दल यूनाइटेड, तेलुगु देशम और शिवसेना ने समर्थन किया। श्रीकांत एकनाथ शिंदे ने इंडिया गठबंधन पर जोरदार हमला करते हुए कहा, जो देश की व्यवस्थाओं को जाति-धर्म के आधार पर चलाना चाहते हैं, उन्हें शर्म आनी चाहिए।
इस विधेयक का मकसद पारदर्शिता एवं जवाबदेही लाना है लेकिन संविधान पर भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है। जो लोग विरोध कर रहे हैं, उनकी सरकार ने जब महाराष्ट्र में शिर्डी, महालक्ष्मी मंदिरों में प्रशासक बैठाये थे।
हिस
युगपक्ष






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