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वेटरनरी विश्वविद्यालय में गोबर-गौमूत्र प्रसंस्करण का मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण
बीकानेर गौबर-गौमूत्र प्रसंस्करण कार्य का बनेगा मॉडल
बीकानेर। वेटरनरी विश्वविद्यालय में गोबर-गौमूत्र के जैविक उत्पादों के बनाने के लिए शनिवार को मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण कार्यशाला होगी। विषय विशेषज्ञ डा इंद्र मोहन वर्मा मास्टर ट्रेनर को प्रशिक्षण देंगे। यह मास्टर ट्रेनर जिले की 9 ब्लाक में जाकर प्रत्येक गांव के दो दो युवाओं
को गोबर से खाद और गोमूत्र से कीट नियंत्रक बनाने का प्रशिक्षण देंगे। इससे हर गांव में गोबर खाद और गोमूत्र से कीट नियंत्रक किसानों के लिए उपलब्ध हो सकेंगे। युवाओं के लिए रोजगार का सृजन होगा। गोपालकों को गोबर गोमूत्र का मूल्य मिल सकेगा। वेटरनरी विश्वविद्यालय और राजस्थान गौ-सेवा परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित प्रशिक्षण में कृषि, पशुपालन, नाबार्ड, कृषि विश्वविद्यालय, आत्मा, महिला बाल विकास, आदि विभागों के सहयोग से इस नवाचार की पहल की गई है। यह प्रशिक्षण संभागीय आयुक्त डॉ. नीरज के. पवन और कुलपति प्रो. सतीश के. गर्ग, डा ए. के. गहलोत के समन्वित प्रयासों से दिया जा रहा है। गोबर-गोमूत्र प्रसंस्करण प्रशिक्षण से बीकानेर संभाग को एक मॉडल रूप में विकसित करने के लिए ग्रामीण स्तर पर गौ उत्पादों के जैविक प्रसंस्करण कार्यों के लिए युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बीकानेर जिले के 9 ब्लॉक में यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये जाने हैं। इसमें वेटरनरी विश्वविद्यालय के साथ-साथ नाबार्ड, कृषि एवं पशुपाल विभाग सहयोगी रहेंगे। गांवों में गोबर एवं गोमूत्र पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है ग्रामीण युवाओं के प्रशिक्षण उपरान्त इसका समुचित उपयोग हो सकेगा। जिससे पशुपालकों को आर्थिक फायदा पहुचेगा। पशुपालकों की हितार्थ यह एक महत्वाकांक्षी परियोजना है जिससे सभी विभागों के सहयोग से ग्राम स्तर पर इसका क्रियान्वयन किया जाएगा।








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