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धरना : अभिनव राजस्थान पार्टी का एक दिवसीय धरने का आयोजन
वार्ड पंचों के सम्मान और अधिकार के साथ साथ वार्ड सभाओं के आयोजन को लेकर आज अभिनव राजस्थान पार्टी ने एक दिवसीय धरने का आयोजन किया । ज़िला परिषद् के सामने पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन के माध्यम से प्रदेश सरकार का ध्यान इस ओर दिलाने का प्रयास किया ।
इस अवसर ज़िले के चार वार्ड पंचों का प्रतीकात्मक सम्मान करके वार्ड सभा जैसा आयोजन भी किया गया । ज़िले के पुंदलसर गाँव में वार्ड पंच रूप सिंह शेखावत, गजेंद्र सिंह शेखावत, कतरियासर के भागीरथ ज्यानी और कोलायत के वार्ड पंच पिंकु माली को आज की सभा की अध्यक्षता करवाई गई ।
इस दौरान अभिनव राजस्थान पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ अशोक चौधरी ने कहा कि गांधीजी का ग्राम स्वराज का सपना अभी अधूरा है और सत्ता दिल्ली जयपुर के क़ब्ज़े में है । इस वजह से गाँव का विकास उचित ढंग से नहीं हो पा रहा है । 1993 में नया पंचायती राज अधिनियम बनने के तीस साल होने के बावजूद गाँवों में वार्ड सभा का आयोजन नहीं हो रहा है । वार्ड पंच के पद का कोई अर्थ नहीं रह गया है । यह गांधीजी के साथ साथ संसद का भी सरासर अपमान है ।
धरने को संबोधित करते हुए राजस्थान किसान यूनियन के उपाध्यक्ष जीवन राम बाँगड़ा ने सरकार को इस बाबत कार्रवाई करने का अनुरोध किया । पूर्व आर ए एस अधिकारी राजीव भाकल ने गाँव गाँव अलख जगाने के लिए कार्यक्रम बनाने ला आव्हान किया और इसकी ज़िम्मेदारी लेने की घोषणा की । बीकानेर के उपखण्ड अधिकारी रहे मदन लाल सिहाग ने पंचायती क़ानून की बारीकियों को समझाया । किसान नेता चन्द्राराम आर्य ने इस आंदोलन को पूरे राजस्थान में फैलाने के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं को तैयार रहने को कहा । इस अवसर पर पार्टी के उपाध्यक्ष एस एस शर्मा, महासचिव हनुमान शर्मा , अंकुर शुक्ला, सूर्य प्रकाश सोनी, बलवंत नाई, राजेंद्र पचार, नरेश सेन, श्रवण सिंह शेखावत, पूर्व चिकित्सा निदेशक एम पी बुढ़ानिया, पूर्व प्रधान दानाराम भांबू, पूर्व ज़िला परिषद सदस्य रावता राम, बद्रीराम सुथार, शेर सिंह सोऊ, प्रेम सिहाग, सिताराम सिहाग, शंकर धामू, सांग सिंह भाटी, जगदीश सिंह भाटी, सीता राम सिहाग, दुलाराम सारण, जयनारायण सारण आदि सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे ।
क्या होती है वार्ड सभा और क्या होते हैं वार्ड पंच ले अधिकार ?
साल में चार बार वार्ड के सभी मतदाताओं की बैठक अनिवार्य होती है । इसकी अध्यक्षता वार्ड पंच करते हैं । इसमें सभी विभागों के स्थानीय अधिकारी उपस्थित रहते हैं - ग्राम विकास अधिकारी, पटवारी, कृषि पर्यवेक्षक, स्कूल प्रधानाध्यापक, बिजली पानी विभाग के कर्मचारी आदि ।
वार्ड सभा विकास और कल्याण के प्रस्ताव लेकर भेजती है और उस वार्ड में इनके अलावा कोई काम नहीं हो सकता है । काम होने के बाद वार्ड सभा के अनुमोदन पर ही पैसा दिया जाता है । वार्ड सभा के फ़ैसले का उल्लंघन कोई नहीं कर सकता ।
क्यों आयोजित नहीं होती ये सभाएँ ?
राजस्थान में लगभग अस्सी हज़ार वार्ड पंचों को चुनाव के बाद कोई नहीं पूछता है । उनको अपने अधिकारों की जानकारी नहीं होने से ऐसा होता है ।
क्या फ़ायदा होगा वार्ड सभा से ?
१. वार्ड की ज़रूरत के अनुसार काम होंगे ।
२. काम की गुणवत्ता बढ़ेगी और पारदर्शिता बढ़ेगी ।
३. लोकतंत्र की समझ बढ़ेगी और ज़िम्मेदार जागरूक नागरिकों का निर्माण होगा ।
४. सरपंच पर सारा भार नहीं आएगा और उसके काम का बँटवारा हो सकेगा ।
५. गाँव का विकास समरूप तरीक़े से होगा ।








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