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लावारिस मिली बच्ची लक्ष्मी पहुंची अमेरिका
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लावारिस मिली बच्ची लक्ष्मी पहुंची अमेरिका
झुंझुनूं। हमारे समाज आज भी ऐसे कई माता-पिता या फिर परिवार है, जो बच्चियों को बोझ समझते है। लेकिन अमेरिका के एक दंपिा को बेटी की चाह सात समंदर पार झुंझुनू ले आई। जिस बच्ची को उसके माता-पिता मरने के लिए एक मंदिर में लावारिस छोड़कर चले गए थे। वो अब अमेरिका पहुंच गए है। जहां वह अपने गोद लेने वाले माता- पिता के साथ ना केवल खुश है। बल्कि उसे खूब लाड प्यार मिल रहा है। 12 अप्रेल 2018 को बुहाना के समीप बड़बर गांव में भवानीपुरा के शिव मंदिर में एक मासूम बच्ची लावारिस हालत में मिली थी। बच्ची को उसके माता-पिता मरने के लिए लावारिस छोड़कर चले गए थे। लेकिन इस बच्ची को पहले झुंझुनूं के बीडीके अस्पताल में लाड प्यार मिला तो अब यह बच्ची अमेरिका पहुंच गई है।
बाल अधिकारिता विभाग झुंझुनंू की सहायक निदेशक प्रिया चौधरी ने बताया कि अप्रेल 2018 में यह बच्ची लावारिस मिली थी। जिसके बाद इसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। स्वस्थ
होने पर इसे बाल शिशु गृह सीकर भेजा गया। लेकिन झुंझुनंू में बाल शिशु गृह खुलने के बाद यह वापिस झुंझुनंू आ गई थी। इस बच्ची की जानकारी जब कारा वेबसाइट पर दी गई तो इसे लेने के लिए अमेरिका के दंपिा ने इच्छा जाहिर की। बच्ची स्पेशल एबिलिटी में भी थी। उसकी आंखों में भैंगापन और पैर में मोच होने के बावजूद बच्ची का पालन पोषण करने को लेकर दंपिा का प्यार उन्हें रोक नहीं पाया। वे सात समंदर पार कर झुंझुनंू पहुंचे। और इस बच्ची को गोद लिया। उन्होंने बताया कि गोद देने से
पहले हमने दंपिा की होम स्टडी रिपोर्ट, आर्थिक, पालन-पोषण में सक्षम है या नही। आदि की जानकारी ली। वहीं हर छह महीने से फॉलोअप खुद भी करते है और अमेरिकन एजेंसी से भी लेते है। बच्ची के आंखों के भैंगापन और पैरों की मोच का इलाज के लिए अब दंपती ने फिजियोथैपिस्ट भी लगा रखा है। सहायक निदेशक प्रिया चौधरी ने बताया कि इस बच्ची को गोद लेने वाले परिजन भी समय-समय पर उन्हें बच्ची की फोटो भेजते है। इस दंपिा के पहले से तीन बच्चे है। लेकिन बेटी की चाह
उन्हें झुंझुनू तक खींच लाई। साथ ही दंपिा उसके लिए खिलौने, फोटोज के एलबम और इंडिया से आने वाले बच्चों से मेल-मिलाप भी करवाते है। ताकि वह अमेरिका में खुद को असहज महसूस ना करें। इस मौके पर प्रिया चौधरी ने इस बच्ची के असली माता-पिता तो उसे मंदिर की सीढिय़ों पर छोड़कर चले गए थे। वे नहीं चाह रहे थे कि बच्ची जिंदा भी रहे। लेकिन फिर भी बच्ची आज
जिंदा है और अमेरिका में है। इस बच्ची का करीब 27 दिनों तक बीडीके अस्पताल में इलाज भी चला था। इस दौरान भी यहां पर इसे खूब प्यार मिला था। स्टाफ ने इस बच्ची का नाम लक्ष्मी रख दिया था। वहीं करीब 15 दिनों तक इस बच्ची को सुनिता नाम की महिला ने स्तनपान भी कराया। सुनिता भी एक बेटी की चाह में चार बेटों को जन्म दे चुकी थी। इसलिए इस बेटी के साथ उसका आत्मीय रिश्ता जुड़
गया था। इस दौरान भी बीडीके अस्पताल में 8 से 10 लोग इस बच्ची को गोद लेने आए थे। लेकिन नियमों के कारण वे गोद नहीं ले सके।
C P MEDIA
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