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कोरोना का दुष्प्रभाव छंटने की संभावनाएं
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कोरोना का दुष्प्रभाव छंटने की संभावनाएं
नई दिल्ली । उद्योग मंडल फिक्की के
मुताबिक वित्त वर्ष 2021-22 में भारत के
सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 9.1 प्रतिशत
की दर से बढऩे की उम्मीद है। वहीं, फिच रेटिंग्स
ने देश की जीडीपी ग्रोथ अनुमान को कम कर
दिया है। हालांकि, फिच ने भी माना है कि देश
की इकोनॉमी पटरी पर है।
त्योहारी सीजन का फायदा
फिक्की ने कहा कि महामारी की दूसरी
लहर के बाद अब आर्थिक सुधार अपनी पकड़
मजबूत करता दिखाई दे रहा है। फिक्की के
आर्थिक परिदृश्य सर्वेक्षण में यह भी कहा कि
मौजूदा त्योहारी सत्र में रफ्तार को समर्थन
मिलेगा। हालांकि उद्योग संघ ने आगाह किया कि
दिवाली के दौरान लोगों की आवाजाही बढऩे के
चलते कोविड मामलों में वृद्धि हो सकती है।
उद्योग मंडल ने कहा, ''फिक्की के आर्थिक
परिदृश्य सर्वेक्षण के ताजा दौर में 2021-22 के
लिए 9.1 प्रतिशत की वार्षिक औसत जीडीपी
वृद्धि का अनुमान लगाया है। पिछले सर्वेक्षण
(जुलाई 2021) में नौ प्रतिशत वृद्धि का
अनुमान जताया गया था। फिक्की ने कहा कि
दूसरे हिस्से में मानसूनी बारिश में तेजी और
खरीफ के रकबे में बढ़ोतरी से कृषि क्षेत्र की वृद्धि
की उम्मीदें बरकरार हैं। इस बीच, फिच रेटिंग्स
ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत के आर्थिक
विकास के अनुमान को घटाकर 8.7 प्रतिशत
कर दिया है। हालांकि, रेटिंग एजेंसी ने वित्त वर्ष
2023 के लिए विकास दर का अनुमान 10
फीसदी किया है। एजेंसी का कहना है कि
कोविड19 की दूसरी लहर की वजह से इकोनॉमी
की रिकवरी में देरी हुई है, हालांकि इकोनॉमी
पटरी पर है।
C P MEDIA
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