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*पापा को पहले ही खो चुका, मम्मी को कुछ हो जाता तो परिवार टूट जाता*
*बेटे ने कहा, जिंदगी भर रहूंगा जिला प्रशासन का ऋणी*
‘कोरोना पाॅजिटिव होने के बाद मेरी मम्मी की तबीयत लगातार बिगड़ रही थी और मैं घर पर टाइफाइड से पीड़ित पड़ा था। मै चिंतित था कि अब मेरी मम्मी का ध्यान कौन रखेगा? लेकिन मैं शुक्रगुजार हूं, जिला प्रशासन और पीबीएम अस्पताल के डाॅक्टरों का, उन्होंने मेरी मम्मी को ठीक करके वापस भेजा। अगर उन्हें कुछ हो जाता तो हम सभी टूट जाते। मम्मी को जीवन दान देने के लिए, मैं उम्र भर इन सभी का ऋणी रहूंगा।’
यह कहना है रत्ताणी व्यासों के चौक में रहने वाले दीपक हर्ष का। दीपक ने बताया, ‘मेरी मम्मी इंद्रा देवी हर्ष, बहिन और बेटा कोरोना पाॅजिटिव हो गए। मम्मी को एक दिन घर में रखा। आॅक्सीजन की व्यवस्था की, लेकिन अचानक उनकी आवाज बंद होने लगी। आॅक्सीजन का स्तर गिरकर 75 तक पहुंच गया। ऐसी स्थिति में मम्मी को कोविड हाॅस्पिटल भर्ती करवाया।’ दीपक ने बताया कि फोन करने के पंद्रह मिनट में ही 108 एम्बूलेंस पहुंच गई।
दूसरे ही दिन दीपक को भी टाइफाइड हो गया, तो मानो परिवार की चिंता की लकीरें और गहरी होती गईं। उन्हें डर सता रहा था, कि अब क्या होगा? लेकिन पीबीएम अस्पताल प्रशासन के समर्पण और बेहतर चिकित्सकीय व्यवस्था की बदौलत मां पूर्णतया स्वस्थ हो गई। दीपक ने बताया कि मम्मी को प्लाज्मा चढ़ाया गया और डाॅक्टरों ने नियमित देखभाल की।
इंद्रा देवी ने बताया कि कोविड हाॅस्पिटल की सभी व्यवस्था अच्छी थी। लगातार बीमारी के कारण जब उन्हें पीबीएम अस्पताल का खाना नहीं भाया, तो एक महिला चिकित्सक ने अपने टिफिन में से खाना खिलाया। एक बार पास के बैड पर भर्ती कोरोना से ग्रसित एक मरीज की मौत हो गई, तो वह डर गई। ऐसे में दो महिला चिकित्सक साढे तीन घंटे उसके पास बैठी रहीं और संबल दिया।
दीपक ने कहा कि उनका पूरा परिवार जिंदगी भर जिला प्रशासन और डॉक्टरों का ऋणी रहेगा। प्रशासन की सख्त मोनिटरिंग और अस्पताल की बेहतरीन व्यवस्थाओं की वजह से ही मम्मी को नया जीवन मिला है। उसने रूंधे गले से कहा कि वह पहले ही अपने पिताजी को खो चुका है। यदि उसकी मम्मी को कुछ हो जाता तो मानों परिवार के तीन सदस्य जीते जी मर जाते।
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