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बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय लागू करेगा प्रदेश में “ज्ञान दीक्षा कार्यक्रम”
देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार एवं बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय के मध्य संपन्न हुए समझोता ज्ञापन के अंतर्गत प्रदेश के सभी सम्बद्ध इंजीनियरिंग कॉलेजो में नए सत्र के आरम्भ में आयोजित किया जाएगा “ज्ञान दीक्षा कार्यक्रम”
धर्म, अध्यात्म, सामाजिक एवं वैदिक संस्कृति विषयों पर दोनों विश्वविद्यालयों के सांस्कृतिक आदान-प्रदान का हिस्सा है “ज्ञान दीक्षा कार्यक्रम”
सांस्कृतिक आदान-प्रदान, शिक्षा और संस्कृति के समन्वय से उच्च एवं तकनीकी शिक्षा का बदलते स्वरूप में विद्यर्थियो में वैदिक पुनर्जागरण आवश्यक -कुलपति प्रो. एच.डी.चारण
बीकानेर, 08 अक्टूबर, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा जगत में किये जाने वाले नवाचार के लिए “नवाचार के नवाब” के नाम से प्रख्यात शिक्षाविद एवं बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एच.डी.चारण एक बार पुन: विद्यार्थियों में धर्म और अध्यात्म के प्रति जुड़ाव और उनकी वैदिक संस्कृति के प्रति उत्तरदायित्वों में जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार एवं बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय के मध्य संपन्न हुए समझौता ज्ञापन के दुवारा प्रदेश के सभी सम्बद्ध इंजीनियरिंग कॉलेजो में सत्रारम्भ में विश्वविद्यालय का नवाचार “ज्ञान दीक्षा कार्यक्रम” लागू करने जा रहे है, जो की पूर्व में नवीन अकादमिक सत्र के सत्रारम्भ पर परम्परागत रूप से आयोजित किए जाने वाले “आमुखीकरण कार्यक्रम” की जगह लागू किया जाएगा । विश्वविद्यालय के सहायक जनसंपर्क अधिकारी विक्रम राठौड़ ने आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया की हाल ही में देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार के प्रति कुलपति चिन्मय पंड्या एवं बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एच. डी. चारण नें एक समझौता ज्ञापन संपन्न किया है जिसके अंतर्गत देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार में किये जाने वाले “ज्ञान दीक्षा कार्यक्रम” को विश्वविद्यालय ने सभी सम्बद्ध इंजीनियरिंग कॉलेजो में नवाचार के रूप में लागू करने का निश्चय किया गया है, इस हेतु हाल ही कुलपति महोदय की अध्यक्षता में एक शिष्टमंडल नें देव संस्कृति विश्वविद्यालय में इस कार्यक्रम का विस्तृत अध्ययन किया गया है और सम्बद्ध महाविद्यालय में क्रियान्वन हेतु रुपरेखा भी निर्धारित की गयी है।
कुलपति प्रो. एच.डी. चारण ने कहा की विद्यार्थी जब स्नातक बनने के लिए एक संकल्प के साथ महाविद्यालय में प्रवेश लेता है, तभी वह स्नातक साधना के लिए दीक्षित होता है । जिस प्रकार अध्ययन समाप्त होने के पश्चात “दीक्षांत समारोह” आयोजित किया जाता है उसी प्रकार यह अध्ययन के प्रारम्भ होने पर “दीक्षारंभ समारोह” का नवीन रूप “ज्ञान दीक्षा कार्यक्रम”है, जो की विद्यार्थियों को गुरु और शिष्य के संबंधो का एह्सास कराती है। यह एक वैदिक विचारधारा है जो की हमारे भारतवर्ष की एतिहासिक शिक्षा संस्कृति पर बल देती है और उसके विद्यार्थियों में पुनर्जागरण का प्रयास करती है। हमारी भारतीय सभ्यता संस्कृति और शिक्षा व्यवस्था काफी पुरातन है और एक वृहत सांस्कृतिक स्वरूप को लिए हुए हैं एवं हमारी प्राचीनतम शिक्षा व्यवस्था हमारे संतो ऋषियों और मुनियों द्वारा ज्ञान पर आधारित है । आधुनिकतम शिक्षा व्यवस्था के साथ विद्यार्थी अपनी मूल संस्कृति सभ्यता और आध्यात्मिक धर्म से इन प्रतिनिधि विमुख होता जा रहा है इस कारण उन्हें सांस्कृतिक पुनर्जागरण की मुख्यधारा में शामिल करना अति आवश्यक हो गया है। दुर्भाग्य से आज, शिक्षा को छात्रों की कमाई क्षमता बढ़ाने के लिए एक तरीके के रूप में देखा जा रहा है। इसलिए विश्वविद्यालय का मानना है कि शिक्षा के साथ हमारे पैतृक ज्ञान को लागू करने के लिए हमें एक लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। हमारे भारतवर्ष के नालंदा, तक्षशिला, विक्रमशिला, वल्लभी, सोमपुरा, जग्गदल्ला, ओदांतापुरी, पुष्पगिरी जैसे विख्यात विश्वविद्यालय और उनकी एतिहासिक शिक्षा संस्कृति है जिसने देश विदेश में भारतवर्ष के शिक्षा व्यवस्था को एक वैश्विक मान्यता और पहचान दी है। यह कार्यक्रम विद्यार्थी के सर्वांगींण विकास और वैदिक् उन्नयन पर आधारित है जो उनमें
देव संस्कृति विश्वविद्यालय के साथ किए समझौता ज्ञापन के माध्यम से हमने एक प्रयास किया है कि हमारे विश्वविद्यालय के विद्यार्थी और शिक्षकगण हमारी सभ्यता और संस्कृति को एक बार पुनः पहचानने का प्रयास करेंगे और अपने अनुसंधान के माध्यम से अपने आध्यात्मिक ज्ञान को विकसित करेंगे। हम शैक्षणिक अनुसन्धान, अकादमिक कार्यक्रम, पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण, अकादमिक परियोजनाए, विषय विशेषज्ञ व्याख्यान, सामजिक एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान के दुवारा समझौता ज्ञापन के तहत विश्वविद्यालय मिलकर धर्म और अध्यात्म के पुनर्जागरण पर कार्य करेंगे, जिससे शिक्षक और विद्यार्थी में अपनी संस्कृति के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित होगी।
देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डॉ श्री चिन्मय पंड्या ने कहा कि हमारे “ज्ञान दीक्षा कार्यक्रम” को देश के अनेको उच्च एवं तकनिकी शैक्षिक संस्थाओ ने अपनाया है और उसके आशाजनक परिणाम सामने आए है । इस ज्ञापन से दोनों विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों शिक्षक लाभान्वित होंगे हमारी संस्कृति विश्वविद्यालय का उद्देश्य है कि हम विद्यार्थियों ने अपनी धर्म और संस्कृति के प्रति जागरूकता पैदा कर सकें और उन्हें एक अच्छा नागरिक बनाकर देश के विकास में सर्वस्व समर्पित करने के लिए तैयार कर सकें। गौरतलब है कि बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय अपने नवाचारों और अभिनव कार्य योजनाओ को लेकर निरंतर तकनीकी शिक्षा के उन्नयन हेतु प्रयत्नशील है।
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