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मानवीय समाज व प्रकृति के साथ व्यवहार करना मानवीय मूल्यों की शिक्षा में निहित - डॉ गुलाब कोठारी
बीटीयू में “तकनीकी शिक्षा में सार्वभौमिक मानवीय मूल्य” विषयक एक सप्ताह की ऑनलाइन कार्यशाला
बीटीयू में “तकनीकी शिक्षा में सार्वभौमिक मानवीय मूल्य” विषयक एक सप्ताह की ऑनलाइन कार्यशाला
*जीवन जीने के लक्ष्य व उपयोगिता का पता होना आवश्यक, इसके उत्तर में ही चरित्र निर्माण की नींव : डॉ गुलाब कोठारी*
*_बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित “तकनीकी शिक्षा में सार्वभौमिक मानवीय मूल्य” विषयक एक सप्ताह की ऑनलाइन कार्यशाला का डॉ. गुलाब कोठारी की अध्यक्षता में हुआ समापन *_*
मानवीय मूल्यों की शिक्षा का मूल उद्धेश्य स्वयं, समाज, प्रकृति व अस्तित्व में सही समझ रख सुखी होना है l प्रत्येक विद्यार्थी को जीवन जीने की उपयोगिता और लक्ष्य क्या है पता होना चाहिए क्यों की यही उस विद्याथी की आधार भूमि बनायेंगे l ये विचार राजस्थान पत्रिका के प्रधान संपादक डॉ. गुलाब कोठारी ने बतौर मुख्य अतिथि बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय द्वारा ऑनलाइन माध्यम से आयोजित हो रही एक सप्ताह के “तकनीकी शिक्षा में सार्वभौमिक मानवीय मूल्य” विषयक कार्यशाला के समापन समारोह में कही l श्री कोठारी ने कहा की कई बार हम कौशल आधारित शिक्षा ले कर इतना व्यस्त हो जाते हैं की अपना मूल चरित्र खो बैठते हैं l इसलिए कौशल आधारित शिक्षा के साथ साथ मानवीय मूल्यों आधारित शिक्षा ही चरित्र का निर्माण करती है व अंतर्मन के व्यक्तित्व को बाहर निकालती है l आजीविका के लिए काम व नौकरी तो कौशल आधारित शिक्षा दिलवा सकती है, लेकिन मानवीय समाज व प्रकृति के साथ व्यवहार करना मानवीय मूल्यों की शिक्षा में निहित है l अहम् भ्रमास्मी का उदाहरण देते हुए श्री कोठारी ने बताया की हर मानविकी में ईश्वर का अंश विद्यमान है केवल मात्र स्वयं का अध्ययन कर उसे खोजने की आवश्यकता है l सह-अस्तित्व में ही अस्तित्व की मौजूदगी है l हमे स्वयं, समाज, प्रकृति व अस्तित्व में सामंजस्य व तालमेल बता कर चलना होगा l
समापन समारोह के प्रथम सत्र को संबोधित करते हुए बीटीयु के कुलपति प्रो. एच. डी. चारण ने बताया की बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय द्वारा चलाये जा रहे हर कोर्स में मानवीय मूल्यों की शिक्षा अनिवार्य है l देश में पहली बार 5000 विद्यार्थिओं के लिए मानवीय मूल्यों की शिक्षा का ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित किया गया है l एक तरफ जहाँ हर तरफ विकास हो रहा है चाहे वो इंफ्रास्ट्रक्चर हो, शिक्षा हो, ट्रांसपोर्टेशन हो या चाहे कम्युनिकेशन l लेकिन समय के साथ नैतिक मूल्यों की गिरावट आयी है l आज हमे पशुओं से इतना भय नहीं है जितना मानव के व्यवहार या आचरण से है l इसलिए हर विद्यार्थी को समझ, सम्बन्ध व सुविधा को समझकर इनमे तालमेल बैठाना होगा l इसलिए मानवीय मूल्यों आधारित शिक्षा देश के मानसिक विकास के लिए संजीवनी बूटी हैं l
समारोह के अंत में अतिथियों, विशषज्ञों, तथा प्रतिभागियों धन्यवाद ज्ञापन करते हुए बीटीयु के अकादमिक निदेशक डॉ. यदुनाथ सिंह ने कहा की मानवीय मूल्यों की शिक्षा को अपनाते हुए बीटीयु भारत में गुणवत्तापूर्ण तकीनीकी शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान और नवाचार सुनिश्चित करने की दृष्टि से इस संस्थान को एक उत्कृष्ट केन्द्र के रूप में स्थापित करने हेतु अपनी प्रतिबद्धता और समर्पण पर खरा उतरने हेतु कटिबद्ध है.
समापन कार्यक्रम का सञ्चालन कार्यक्रम समन्वयक डॉ अलका स्वामी ने करते हुए बताया की इस वर्कशॉप में राजस्थान के लगभग 5000 विद्यार्थी, अभिभावक, शिक्षक इत्यादि ने लाभार्जन लिया. डॉ अल्का ने बताया की इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को मानवीय मूलों की शिक्षा प्रदान करने के साथ साथ विभिन्न सामाजिक, सास्कृतिक, कार्य कुशलता आदि क्षेत्रों पर विस्तृत विचार-विमर्श एवं चर्चा करना था ताकि मानवीय मूल्यों पर आधारित शिक्षा व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा सके। कार्यशाला को राष्ट्रीय स्तर के मानवीय मूल्यों के शिक्षाविदों ने संबोधित किया। इस अवसर पर बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय के तथा एफिलिएटेड महाविद्यालयों के विभिन्न संकायों के डीन, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण एवं विद्यार्थी ऑनलाइन माध्यम से उपस्थित थे.
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