✒️खबरों में बीकानेर 🎤 🌐
📰
<
🙏 मोहन थानवी 🙏
सच्चाई पढ़ें । सकारात्मक रहें । संभावनाएं तलाशें ।
🙏
twitter, Podcast, YouTube, साहित्य-सभागार के साथ-साथ Facebook, Pinterest, LinkedIn और Instagram पर भी आपकी खबरें Khabron Me Bikaner 🎤
🇮🇳
खबरों में बीकानेर 🎤 🌐
✍️
📰
सच्चाई पढ़ें । सकारात्मक रहें । संभावनाएं तलाशें ।
खबरों में बीकानेर 🎤 🌐
✍️
यह भी पढ़ें 👉 👇 कोरोना को हराएंगे : यात्रा दो साल टाल दे, बाहर का खाना एक साल भूल जाएं https://bahubhashi.blogspot.com/2020/05/dr-lal-thadani-public-health-expert.html
खबरों में बीकानेर 🎤 🌐
📒
<
📰 📑 पढ़ना और पढ़ाना जीवन सफल बनाना 📚 📖 📓
खबरों में बीकानेर 🎤 🌐
कृषि को आवश्यक सेवा के रूप में छूट दिए जाने की दरकार
ये खेतीहर मजदूरों की सुध लेने का समय
कार्यविहीन हुए खेतीहर मजदूर, कोविड-19 किसान नीति बनाना जरूरीः प्रो. सिंह
‘नेशनल वेबकाॅन’ में कुलपति ने दिए सुझाव, तकनीकी सत्र की अध्यक्षता भी की
बीकानेर, 7 मई। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर के तीन दिवसीय ‘नेशनल वेबकाॅन’ के दूसरे दिन गुरुवार को स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर. पी. सिंह सहित देशभर के कृषि वैज्ञानिकों ने अपनी बात रखी। प्रो. सिंह ने ‘कोविड-19 के बाद कृषि’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने एक तकनीकी सत्र की अध्यक्षता भी की।
इस अवसर पर प्रो. सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य संकट के साथ शुरू हुआ कोविड-19 अब घोर आर्थिक संकट में बदल चुका है। वैश्विक परिदृश्य में देखें तो इसका कुप्रभाव पर्यटन, होटल एवं रेस्टोरेंट, विमानन, तेल, गैस, मोटर वाहन एवं इलेक्ट्राॅनिक उत्पादों से लेकर हर छोटे-बड़े व्यापार एवं उद्योग पर पड़ा है। इसने रोजगार के अवसरों को भी प्रभावित किया है, जिससे अकल्पनीय आर्थिक नुकसान हो रहा है। इससे प्रभावित देशों में दीवालिया होने का संकट मंडराने लगा है।
कुलपति ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों ने लाखों खेतीहर मजदूरों को कार्यविहीन कर दिया है। इससे भविष्य की चिंता की लकीरें भी साफ दिख रही हैं। संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम के अनुसार, कोविड-19 के कारण भोजन की कमी का खतरा पैदा होगा, जो द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद सबसे गंभीर स्थिति हो सकती है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के दुष्प्रभावों से बचने के लिए समय रहते उपयुक्त किसान नीति बनाने की जरूरत है।
कुलपति ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में सामग्री की आपूर्ति चैन प्रभावित होना, श्रम एवं उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता में कमी, सामग्रियों तक उपभोक्ताओं की पहुंच एवं भुगतान क्षमता की कमी के साथ विभिन्न व्यापारिक प्रतिबंध प्रमुख चुनौतियां हैं। इनसे पार पाने के लिए बाजार से मांग सुनिश्चित करने और आपूर्ति श्रृंखला की पहुंच किसानों तक करने, कृषि को आवश्यक सेवा के रूप में छूट दिए जाने, किसानों को समय पर इनपुट, कच्चा माल, प्रौद्योगिकी के लिए नियमों और नीतियों को लागू करने, नरम एवं लचीले नियामक दृष्टिकोण से नवाचार एवं तकनीकी विकास को प्रोत्साहित करने जैसे कदम उठाने होंगे।
कुलपति ने कहा कि ‘नेशनल वेबकाॅन’ जैसे नवाचार आज के दौर में सार्थक हैं। ऐसे प्रयासों से देशभर के कृषि वैज्ञानिकों, किसानों, उपभोक्ताओं, रिसर्च स्काॅलर्स, प्रौद्योगिकीय संगठनों, नीति निर्धारकों एवं एनजीओ आदि में वैचारिक आदान-प्रदान हो सकता है। उन्होंने कोविड-19 के बाद की संभावित स्थितियों के बारे में विस्तारपूर्वक बताया तथा दुष्प्रभावों से बचाव के उपाय सुझाए।
इन्होंने रखी बात
नेशनल वेबकाॅन के दूसरे दिन के तकनीकी सत्र की अध्यक्षता कुलपति प्रो. आर. पी. सिंह ने की। इसमें प्रो. सिंह के अलावा सेंट्रल आइसलैण्ड एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट पोर्ट ब्लेयर के डाॅ. बी. ए. जेरार्ड, आइएआरआई पुणे के जी. के. महापात्रो, सेंट्रल साइट्रस रिसर्च इंस्टीट्यूट की डाॅ. संगीता भट्टाचार्य तथा सीएसएयचूएएंडटी कानपुर के डाॅ. नौशाद खान ने बात रखी।
📒





यहां व्यक्त कीजिए - खबर आपकी नजर में...