📰
सच्चाई पढ़ें । सकारात्मक रहें । संभावनाएं तलाशें ।
खबरों में बीकानेर 🎤 🌐
✍️
कोरोना काल : कल होगा संघर्ष
जीने के लिए नए और सुरक्षित तरीके अपनाने होंगे
अनिवार्य सामान के सिवाय हर चीज विलासिता की
आज युगपक्ष
-✍️ मोहन थानवी
अतीत को आज ही से पाठ्य पुस्तकों में खंगालिए क्योंकि अनुभव ही कोरोना काल के चलते आने वाले कल के जीवन की राह बताएगा। जनता मतलब आम आदमी और सरकार दोनों के लिए अनुभव ही गति प्रदाता बनेगा। वर्तमान संक्रमण काल है। कोरोना के लिहाज से भी और जीवनशैली परिवर्तन के नजरिए से भी। हमें अपनी जरूरतों को संक्षिप्त करने के साथ साथ अपनी खर्च करने की आदतों को स्वयं अभी से बदलना ही है। हम एक समय से दूसरे समय में प्रविष्ट हो रहे हैं। इसका प्रभाव जीवन के हर अंग पर, दुनिया के हर देश और हर क्षेत्र में दिखाई भी दे रहा है। हमारे बच्चे अपनी शिक्षा अब किन और कैसी व्यवस्थाओं के साथ पूरी कर डॉक्टर, वैज्ञानिक, इंजीनियर आदि बन सकेंगे। हम नौकरी और व्यापार करने दूसरे शहरों और विदेशों में जा भी पाएंगे या नहीं...? अथवा किन सुरक्षा संसाधनों के साथ आ जा सकेंगे। दूरस्थ संबंधियों के बीच बच्चों के विवाह संबंध किस तरह हो सकेंगे...? इसी तरह हमारी अन्य अनेकानेक सामाजिक-धार्मिक गतिविधियों के लिए किस प्रकार के विकल्प सामने आएंगे। ऐसी अन्यान्य आवश्यक जरूरतों के अलावा हमें कीमतें बढ़ने से महंगाई और बेरोजगारी बेतहाशा बढ़ने के कारण अपनी आय अर्जित करने के तरीकों को भी परिमार्जित करना ही होगा। क्योंकि कितने ही तरह के सामानों का विक्रय कोरोनावायरस संक्रमण की आशंका के चलते अब नए और सुरक्षित तरीके से करना होगा।
इसका एक उदाहरण शराब की आनलाइन बिक्री के रूप में सामने आ ही गया है। इसी प्रकार गली मोहल्लों और बाजारों में कोल्ड ड्रिंक - फ्रूट ज्यूस की दुकानें, सड़क किनारे शाम को सजने वाली फास्ट फूड की रेहड़ियां, पानीपुरी गोलगप्पे के खोमचे वाले इस कोरोना आतंक के चलते कैसे अपनी आजीविका चलाएंगे। खेती-किसानी, कल-कारखाने, कार्यालय, प्रतिष्ठान, हवाई और रेल यात्रा सहित हमारी तमाम गतिवियां एकबारगी ठप होकर शनैः शनैः नवीन स्वरूप में गतिमान होने को हैं। संभवतया बहुत सी व्यवस्थाएं भी परिवर्तित हो सकती हैं। संशोधन के साथ ऐसी व्यवस्थाएं हमारे दैनिक जीवन को प्रभावित तो करेंगी ही साथ ही हमारी आय और व्यय पर भी इन सब का बहुत बड़ा प्रभाव पड़ने वाला है । वर्तमान की बात करें तो सरकार मदिरा की बिक्री खोल कर और मदिरा की कीमत बढ़ाकर राजस्व प्राप्ति के इस स्त्रोत को सबसे पहले अपना चुकी है ।
एक प्रयास पेट्रोल डीजल की कीमतों में वृद्धि के रूप में भी सामने आ रहा है। सवाल उठता है कि सरकार राजस्व प्राप्ति के लिए और ऐसे क्या क्या कदम उठा सकती है जो हमारी आय और हमारी खर्च करने की शक्ति को प्रभावित करेंगे। यह आज ही विचार कर लेने पर जो स्वरूप दृष्टिगोचर होता है वह है हम मूलभूत आवश्यकताओं की चीजें खरीदने के अलावा जो कुछ भी क्रय करने के लिए बाजार में जाएंगे हमें वे वनिस्पत आज के अधिक कीमत में मिल सकेगा। मतलब हमारे जीने के लिए अनिवार्य दाल रोटी जैसी चीजों के अलावा बाकी चीजें कम आय और अधिक कीमत के कारण विलास की श्रेणी में मानी जा सकती है ? एकबारगी तो जेब खाली हो ही रही है। और बेरोजगारी बढ़ने का संकट भी सामने है। इन सब और विचारणीय अन्य स्थितियों को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि आने वाला कल संघर्ष का कल है । संघर्ष करना ही होगा । लेकिन यह संघर्ष हड़तालों और बंद से सफलता के करीब भी न जा पाएगा।
व्यवस्था की खामियों को दूर करवाना सभी नागरिकों का भी दायित्व मान लें तब भी काम बंद - शहर बंद करने जैसी नकारात्मकता से दूर रहना होगा। हमें स्वयं में परिवर्तन लाने की भावना बढानी होगी। ऐसे सकारात्मक रहते हुए ही इस संघर्ष पर विजय प्राप्ति हो सकती है। अतीत में झांकेंगे तो संघर्षों पर विजय की स्वर्णाक्षरों में लिखी अनेक कहानियां हौसला बढ़ाएंगी। अतीत का अनुभव ही कल को बेहतर बनाएगा।
📒










यहां व्यक्त कीजिए - खबर आपकी नजर में...