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तब उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव थी अब उसकी स्टोरी पॉजिटिव है...
उसे पांच साल के पोते और तीन साल की पोती ने हिम्मत बंधाई, अस्पताल में फोन कर कहा दादी हौसला रखो, आप कोरोना को हरा सकती हो, हम कोरोना को डांट देंगे, तो वह भाग जाएगा...
और उसने कोरोना को हरा दिया
खुलासा
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जयपुर। कोरोना महामारी से निपटने के लिए हर कोई तैयार है। चिकित्सकों के साथ नर्सिंग स्टाफ भी कोरोना की जंग में कंधे से कंधा मिलाकर लड़ रहा है। कोरोना का संक्रमण भी इन वॉरियर्स के हौंसले को पस्त नहीं कर सकता। ऐसी ही एक कोरोना वॉरियर्स 52 वर्षीय अलवर निवासी नर्सिंगकर्मी हैं। आठ अप्रेल को कोरोना फ्री होकर जब अपने घर पहुंची तो परिवारवालों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। बुजुर्ग महिला का जोर-शोर से स्वागत किया गया। भावनात्मक पल को देखकर महिला की आंखों में भी खुशी के आसूं टिक न सके। 52 वर्षीय नर्स को जब कोरोना पॉजिटिव होने की जानकारी मिली तो उन्होंने जीने की उम्मीद ही छोड़ दी थी। नकारात्मक विचार आने लगे थे, लेकिन बेटा-बहू और खासतौर पर पांच साल के पोते और तीन साल की पोती ने हिम्मत बंधाई। अस्पताल में फोन कर कहा दादी हौंसला रखो, आप कोरोना को हरा सकती हो। हम कोरोना को डांट देंगे, तो वह भाग जाएगा। पोता-पोती की बातों ने नर्स के मन में ठीक होने का जोश भर दिया और पांच दिन में ही कोरोना को हरा दिया। उनकी अलवर के खेड़ली कस्बे में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में ड्यूटी थी। उन्होंने पॉजिटिव होने के बाद सोचा था कि अब घर नहीं पहुंच पाऊंगी, लेकिन सकारात्मक सोच ने उन्हें जिता दिया। पॉजिटिव आने के बाद सीधा सीएचसी से एसएमएस अस्पताल के लिए चिकित्सकों ने रवाना कर दिया था। उन्होंने पत्रिका को बताया कि एसएमएस पहुंचने पर वे काफी उदास थीं। लेकिन चिकित्सकों ने उनको हिम्मत बंधाई और उन्होंने कोरोना की जंग को जीत लिया।
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