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खास खबर
कोरोना पर काम कर रहीं चीफ साइंटिस्ट ने पूरी दुनिया को चेताया
शायद दुनिया को कोरोना की वैक्सीन कभी नहीं मिल सकेगी /
एक और वायरस मिला...
नईदिल्ली । एचआईवी
से हर साल औसतन 8 लाख लोग मर
रहे हैं, पिछले 40 साल से। अब तक
एचआईवी की कोई वैक्सीन नहीं मिल
पाई है। इसी बात का जिक्र करते हुए
कोरोना वायरस की वैक्सीन तलाश रही
टीम का नेतृत्व कर रहीं प्रमुख साइंटिस्ट
जेन हाल्टन ने कहा है कि शायद कोरोना
की वैक्सीन भी कभी ना मिल पाए।
उन्होंने कहा- विज्ञान में कुछ भी निश्चित
नहीं है। जेन हाल्टन कोरोना वैसीन की
खोज के लिए काम कर रही अंतरराष्ट्रीय
टीम का नेतृत्व कर रही हैं. इस टीम को
बिल गेट्स की ओर फंड मिला है। जेन
ऑस्ट्रेलिया की सबसे अनुभवी महामारी
एक्सपर्ट के तौर पर भी जानी जाती है।
वह विश्व स्वास्थ्य संगठन के
एग्जेक्यूटिव बोर्ड में भी रह चुकी हैं और
वल्र्ड हेल्थ असेंबली की प्रेसिडेंट के पद
पर भी काम कर चुकी है। जेन हाल्टन ने
यह चेतावनी इसलिए दी है ताकि कोरोना
के खिलाफ तमाम देश सिर्फ वैम्सीन की
उम्मीद में ना बैठे रहें। बल्कि कोरोना को
हराने के लिए प्लान क्च पर भी काम किया
जाए। दुनियाभर में कोरोना वायरस तेजी
से फैल रहा है। 17 लाख से अधिक
लोग संक्रमित हो चुके हैं। एक लाख से
अधिक लोगों की जान जा चुकी है।
हालांकि, कई देशों में कोरोना वैक्सीन
तलाश करने के लिए ट्रायल चलाए जा
रहे हैं।
साइंटिस्ट जेन हाल्टन कहती हैं
कि स्वास्थ्य अधिकारियों को प्लान क्च पर
तेजी से काम करने की जरूरत है क्योंकि
हो सकता है हम कोरोना की वैसीन ना
तलाश पाएं। हालांकि, दुनिया के कई
हेल्थ एम्सपर्ट उम्मीद जता रहे हैं कि
2021 तक कोरोना वैक्सीन तैयार करने
में दुनिया को सफलता मिल सकती है।
लेकिन जेन हाल्टन कहती हैं कि इतने
कम समय में कोरोना की वैसीन तैयार
करना अविश्वसनीय है।
उन्होंने कहा है कि अवास्तविक
उम्मीदें दी जा रही हैं। उन्होंने यह भी कहा
कि कोविड-19 के अलावा अन्य
कोरोना वायरस की वैसीन भी अब
तक नहीं बनी है। वहीं, एचआईवी से
सिर्फ 2008 में दुनिया में 7.7 लाख
लोगों की मौत हो गई। बीते 40 साल में
3 करोड़ 20 लाख लोग एचआईवी से
जान गंवा चुके हैं, लेकिन वैज्ञानिकों को
आज तक एचआईवी की वैसीन नहीं
मिली है।
हंता के बाद एक और वायरस मिला
पेइचिंग । दुनिया में सबसे पहले कोरोना वायरस का शिकार बने चीन की
परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। यहां एक के बाद एक वायरस आते
जा रहे हैं। कोरोना के बाद हंतावायरस इन्फेक्शन के कारण एक शख्स की मौत
हो गई थी। अब फसलों में लगने वाला वायरस यहां आ पहुंचा जिससे बचने के
लिए टनों फसल नष्ट करनी पड़ गई। चीन के अखबार ग्लोबल टाइम्स के
मुताबिक चिली से करीब 4 टन कॉर्न के बीज मंगाए गए थे। चीन पहुंचने पर
शंघाई के कस्टम ऑफिसर्स ने पाया कि इसमें फसलों का खतरनाक वायरस मौजूद
है। मेज ड्वार्फ मौजैक वायरस पूरी की पूरी फसल तबाह कर सकता है। इसके
चलते फसलों को होने वाले नुकसान से भारी आर्थिक चपत भी लग सकती है।
इसे फैलने से रोकने के लिए कस्टम ऑफिसर्स ने 2 बैचों में आए बीजों को नष्ट
कर दिया। चीन के युन्नान प्रांत में मंगलवार को हंतावायरस से एक शख्स की
मौत हो गई। यह चीन में हंतावायरस का पहला मामला नहीं है। सबसे पहले 1976
में इसका केस पाया गया था जिसके बाद पिछले कुछ दशकों में हजारों मामले दर्ज
किए जा चुके हैं। कोरोना वायरस की शुरुआत चीन में ही हुई। चीन के वुहान से
शुरू हुआ कोरोना वायरस आधी दुनिया में फैल चुका है। इसके कारण दुनिया के
कई देशों में लॉकडाउन है।
साभार (हिस) युगपक्ष
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