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नाटक सुभागी-बेटी नहीं बेटा का मंचन 17 को
यूएस अकादमी और राजश्री कला मंदिर के बैनर तले 17 दिसम्बर को शाम 7 बजे मुंशी प्रेमचंद की मूल कथा पर केंद्रित लेखक- निर्देशक दयानंद शर्मा द्वारा रूपांतरित नाटक "सुभागी' का मंचन टाउन हॉल में किया जाएगा । राजस्थान संगीत नाटक अकादमी के ओम शिवपुरी स्मृति नाट्य समारोह 2019 में इसी नाटक को 19 दिसम्बर को जोधपुर के टाउन हॉल में प्रदर्शित किया जाना है। कलम के जादूगर मुंशी प्रेमचंद की कथा "सुभागी ' के इस नाट्य रूपांतरण की प्रस्तुति लगभग डेढ़ घंटे की की रहेगी। सुभागी के नाट्य रूपांतरकार एवं निर्देशक दयानंद शर्मा के अनुसार इस फुल लैंग्थ प्ले में सुभागी की केन्द्रीय भूमिका अभिनीत कर रही है युवा अभिनेत्री रेशु माथुर । अन्य प्रमुख भूमिकाओं में रेशु माथुर ,संतोष गौड़ ,डॉ.दिनेश शर्मा ,मीनू गौड़ ,अविक गोस्वामी ,जयपाल सिंह भाटी ,पूनम चौधरी ,रोहित सिंह ,साहिल चौहान भावना नायक, तपस्या,विमल ,भावना नाई आदि।संगीत सोनू मेहरा का ,प्रकाश प्रभाव जय खत्री ,वेशभूषा संगीता शर्मा तथा प्रस्तुति प्रभारी तरूण गौड़ हैं।
ग्रामीण परिवेश को दिखाने वाले इस नाटक में है ये सब
सुभागी का विवाह बचपन में ही हो गया है। एक दिन उसका गौणा होने वाला है। लेकिन, खबर आती है कि उसके पति की मृत्यु हो गई है। इस खबर से परिवार में सभी दुखी हो जाते हैं। कुछ समय बीतने के साथ सुभागी का भाई रामू उससे चिढ़ने लगता है। सुभागी का बाप तुलसी महतो बंटवारा करवा लेता है। सुभागी अपने हिस्से में अपने मां-बाप की सेवा करके रहने लगती है। एक दिन उसके पिता और फिर मां बीमारी से दम तोड़ देती हैं। सज्जन सिंह जो तुलसी महतो के मित्र हैं, इस परिवार का ख्याल रखते हैं। दुखी सुभागी का जीवन यहांं से संघर्षमय होता जाता है...। निर्देशकीय कौसल से समृद्ध दयानंद शर्मा सुभागी नाटक में मुख्य पात्रों द्वारा किस प्रकार जीवट से परिस्थितियों का सामना करते हुए बेटी को बेटी नहीं बेटा मानने का संदेश संप्रेषित करते हैं, यह सब नाट्य मंचन देखने पर ही अनुभूत किया जा सकता है।
- मोहन थानवी
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