सच्चाई पढ़ें । सकारात्मक रहें । संभावनाएं तलाशें ।
खबरों में बीकानेर 🎤 🌐
✍️
सोशल मीडिया और मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बोले विशेषज्ञ डॉक्टर, विश्व मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह कार्यक्रम की शुरूआत
बीकानेर 06.10.2019 । शिव किशन मिण्डाराम दम्मानी गवर्नमेन्ट इन्स्टीट््युट ऑफ मेन्टल हेल्थ, ऐलाइड एण्ड न्यूरोसाईन्सेज, पी0बी0एम0, बीकानेर में विश्व मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह का विधिवत उद्घाटन डॉ. श्री गोपाल गोयल, एवं डॉ. हरफूल सिंह बिश्नोई ने दीप प्रज्वलित कर किया।
वर्तमान दौर में जहां एक ओर नित नई टेक्नोलॉजी हमारी जीवन शैली का हिस्सा बनकर हमारे जीवन को आसान बना रही है वही दूसरी ओर इस टेक्नोलॉजी के कारण विशेषकर इन्टरनेट और उससे सम्बन्धित एप्स जैसे फेसबुक, वाट्सअप, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, आनलाईन गेम आदि हमारे चारो ओर एक आभासी दुनिया का जाल बुनता जा रहा है ऊपर से देखने पर ये सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बहुत सुन्दर दिखाई देता है तथा साथ ही हम सभी को आधुनिकता की दौड में पूरी दुनिया के बराबर लाकर खड़ा कर देता है परन्तु यह इसका एक पक्ष है अगर हम इसके दूसरे पक्ष की ओर देखें तो इन सोशल प्लेटफॉर्म के कारण विशेषकर युवाओं का एक विशेष वर्ग प्रतिदिन इस टेक्नोलॉजी के मायाजाल को अच्छे से ना समझ पाने के कारण धीरे-धीरे इसका आदि होता जा रहा है ओर इस आदत के कारण युवा ज्यादातर समय इन पर बिता रहा है जिससे बाकी दूसरी चीजों जैसे परिवार, रिश्तेदार, दोस्तो आदि से वास्तविक दुनिया में दूर होता जा रहा है इस दूरी के कारण वह अकेलेपन का शिकार होता जा रहा है और साथ ही वह अन्य कई प्रकार की मानसिक परेशानियों जैसे अवसाद, साइबर बुलिग, धोखाधड़ी, नशा, उन्माद, आनलाईन गेम आदि का जाने-अनजाने शिकार हो जाता है और कभी-कभी तो समय पर सही मार्गदर्शन ना मिल पाने की वजह से आत्महत्या जैसे गम्भीर कदम उठाने को मजबूर हो जाता है इन्डियन जनरल ऑफ पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित एक ताजा अध्ययन के मुताबिक 16 से 26 वर्ष आयुवर्ग के लगभग 8-10 प्रतिशत युवा वर्ग इन्टरनेट का आदी है जो कि नशे की श्रेणी में आता है ये आंकड़े दिनों दिन तीव्र गति से बढते जा रहे है वैश्विक स्तर पर इन आंकड़ो की गम्भीरता को ध्यान में रखकर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस गंभीर समस्या के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्धेश्य से इस वर्ष विश्व मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह की मूल विषय वस्तु “आत्महत्या रोकथाम“ रखी है। हमारे देश में जहाँ 40 प्रतिशत से अधिक आबादी युवा वर्ग है वहाँ यह समस्या और विकराल रूप ना ले ले अतः समय रहते हमारे देशवासियों को जागरूक करने की अत्यन्त आवश्यकता है।
इसी श्रृखंला में डॉ श्री गोपाल गोयल, सह आचार्य ने आत्महत्या अवसाद के बारे में विस्तार से बताया एवं आत्महत्या रोकने के उपाय बताए। इन्होने बताया कि विश्व में प्रति 40 सैकेण्ड में एक व्यक्ति आत्महत्या कर रहा है, जिसको सम्मलित प्रयास से रोका जा सकता है।
डॉ0 हरफूल सिंह बिश्नोई, सह आचार्य ने बताया कि विभिन्न मानसिक रोगों की पहचान कैसे कि जाए जिसमें अवसाद व आत्महत्या रोकने हेतु विस्तृत रूप से बताया।
डॉ0 अनन्त कुमार राठी, सहायक आचार्य ने विश्व में प्रतिदिन होने वाली आत्महत्या की भयावता के बारे में व इसके रोकथाम के बारे में बताया।
डॉ0 मुरलीधर स्वामी, सीनियर रेजीडेन्ट ने भी इस विषय पर अपने विचार व्यक्त किए।
इस कार्यक्रम में रेजीडेन्टस डॉ. देवानन्द, डॉ सन्दीप, डॉ प्रेम, डॉ. प्रीतम, डॉ लक्ष्मी, डॉ दिव्या, डॉ मंजू, डॉ हरप्रीत ने भी हिस्सा लिया।
📒 📰 📑 पढ़ना और पढ़ाना जीवन सफल बनाना 📚 📖 📓








यहां व्यक्त कीजिए - खबर आपकी नजर में...