🇮🇳
खबरों में बीकानेर 🎤 🌐
✍️
खबरों में बीकानेर 🎤 🌐
तपस्या आत्मशोधन का प्रमुख मार्ग-प्रवर्तिनी साध्वीश्री शशि प्रभा
श्रावक जयचंद लाल बैद के शोभायात्रा के बाद किया तपस्या का पारणा
बीकानेर, 7 सितम्बर। जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के गच्छाधिपति आचार्यश्री जिन मणि प्रभ सूरिश्वरजी म.सा. की आज्ञानुवर्ती प्रवर्तिनी वरिष्ठ साध्वीश्री शशि प्रभा म.सा.के सान्निध्य में रविवार को 15 दिन की तपस्या करने वाले हिसार निवासी बीकानेर मूल के जयचंद लाल बैद व स्थानीय श्राविका श्रीमती मंजू पारख ने देव मंदिरों में जुलूस के साथ लड्डू चढाकर, देव, गुरु व धर्म की वंदना कर पारणा किया।
श्रावक जयचंद लाल बैद बग्गी पर सवार थे, उनके आगे बैंड पार्टी नवंकार महामंत्र की धुन बजा रहीं थी। श्रावक तपस्वी अमर रहे के नारे लगा रहे थे । वहीं महिलाएं मंगल गीत गा रही थीं। बैदों के चौक के भगवान महावीरजी मंदिर, नाहटा चौक के भगवान आदिश्वर मंदिर, भुजिया बाजार के चिंतामणिजी मंदिर, रांगड़ी चौक के सुगनजी महाराज के भगवान अजीत नाथ व क्षमाकल्याणजी मंदिर, ढढ्ढों के चौक में शांति गुरुदेव के मंदिर में चैत्य परिपाटी के तहत दर्शन किए तथा लड्डू चढ़ाएं। तपस्वियों ने ढढ्ढा चौक में साध्वीश्री शशि प्रभा म.सा. से आशीर्वाद लिया तथा महामांगलिक पाठ सुना।
साध्वीश्री ने तपस्वियों को आशीर्वचन में कहा कि तपस्या, जैन धर्म में आत्म शोधन का प्रमुख मार्ग है। देव व गुरु की कृपा, उच्च मनोबल तथा पुण्योदय से ही 15-15 दिन तक बिना किसी आहार के केवल सीमित जल पर रहकर आत्म व परमात्म चिंतन किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जप, स्वाध्याय, ध्यान, देव-दर्शन, समताभाव रखने से तपस्या का फल अधिक मिलता है। तपस्या करने वालों, करवाने वालों व अनुमोदना करने वालों को भी पुण्य मिलता है। हमें अधिकाधिक तपस्या की अनुमोदना करते हुए तपस्वियों के आत्मबल को बढ़ाने में सहभागी बनना चाहिए । साध्वी सौम्यगुणा ने ढढ्ढा कोटड़ी में तपस्या की अनुमोदना करते हुए कहा कि किसी से ईर्ष्या व द्वेष नहीं रखना चाहिए। ईर्ष्या व द्वेष से कर्मबंधन होता है, वहीं श्रावक-श्राविकाओं की तपस्या, भक्ति, जप-तप की साधना, आराधना की अनुमोदना करने से पुण्योदय होता है तथा कर्मबंधन कटते हैं।
कपल शिविर- के दूसरे दिन साध्वश्री श्रमणी प्रज्ञा ने निर्थक पाप कर्मों से बचने के सीधे व मूल्यवान 14 उपाए बताएं। उन्होंने कहा कि सचित, द्रव्य, विगय, वाणह, तंबोल, वस्त्र कुसुम, वाहन, शयन, विलेपन, ब्रह्मचर्य, दिशा, स्नान और भक्तपान नियमों की पालना सचेष्टता से करें। अपरिग्रह व त्याग की वृति, समता भाव को अपनाएं।
✍️





यहां व्यक्त कीजिए - खबर आपकी नजर में...