🇮🇳
खबरों में बीकानेर 🎤 🌐
✍️
खबरों में बीकानेर 🎤 🌐
✍️
"स्वयं को बदलना है तो ध्यान जरूरी है", प्रेक्षाध्यान कार्यशाला का हुआ शुभारम्भ
गंगाशहर। रविवार को प्रेक्षाध्यान कार्यशाला का शुभारम्भ मुनिश्री ने नमस्कार महामंत्र से किया। इसके बाद कन्या मंडल द्वारा मंगलाचरण प्रस्तुत किया गया। सभा अध्यक्ष डॉ. पीसी तातेड़ ने सभी का स्वागत किया। महिला मंडल अध्यक्ष ममता रांका ने वरिष्ठ प्रेक्षाध्यान प्रशिक्षक के.सी. जैन का परिचय दिया। शान्ति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष लूणकरण छाजेड़ ने प्रेक्षाध्यान सम्बन्धी विचार व्यक्त किए। मुनिश्री कुशल कुमारजी ने कहा कि ध्यान जीवन में उतारने की चीज है, यह परिवर्तन का माध्यम है। स्वयं को बदलना है तो ध्यान जरूरी है। श्वांस पर ध्यान दें जिससे विचारों पर नियंत्रण बनेगा। जीवन में भोजन का मूल्य है। हम निराहार का मूल्य समझें। जीवन में बोलने का महत्व है, हम मौन के महत्व को समझें। भोजन ही बिगाड़ता है व बनाता है। हमें प्राकृतिक चीजें जैसे कच्ची सब्जी, फल, अंकुरित अनाज आदि हमारे शरीर में मेडिसिन का काम करते हैं। मुनिश्री ने कहा कि आचार्यश्री ने भोजन के तीन सूत्र बताए जिनमें आहार से निराहार की ओर, वाणी से मौन की ओर तथा विचार से निर्विचार की ओर। मुनिश्री ने कहा कि वैज्ञानिक शोध में भी पता चला है कि उपवास करने से हमारा शरीर बीमार कोशिकाओं को खोलता है। आहार विशेषज्ञ डॉ. सुनीता गुप्ता ने बताया कि हमारे भोजन में विटामिन, प्रोटीन, केल्शियम आदि पूर्ण मात्रा में हो तो हमें शूगर, बीपी आदि बीमारियों के लिए चिकित्सा की आवश्यकता नहीं रहेगी।
के.सी. जैन ने बताया कि शरीर और आत्मा दोनों पर ध्यान देने की बात कही। ध्यान में पहले स्थिरिकरण फिर शिथिलीकरण फिर चैतन्य के प्रति जागरुकता बढ़ती है। विज्ञान कहता है एक मिनट में 40 विचार आते हैं। के.सी. जैन ने नमस्कार महामंत्र का महत्व बताया। उन्होंने पांच रंगों के साथ पांच केन्द्रों पर ध्यान करवाया जो बीमारियों के इलाज में काफी लाभदायक सिद्ध होता है। कार्यशाला में करीब साढ़े तीन सौ प्रतिभागी उदासर, भीनासर, नोखा, लूणकरनसर, कालू से शामिल हुए।
प्रेक्षाध्यान कार्यशाला में प्रशिक्षकों द्वारा योगासन, प्राणायाम के प्रयोग करवाए गए। कार्यशाला में आगन्तुकों का तेयुप के देवेन्द्र डागा ने आभार जताया तथा संचालन किशन बैद ने किया।








यहां व्यक्त कीजिए - खबर आपकी नजर में...