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सोशल मीडिया पर कारनामा : जो हुआ नहीं उस पर हौव्वा... आखिरकार... गलत रिपोर्टों पर स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा...
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सोशल मीडिया पर कारनामा : जो हुआ नहीं उस पर हौव्वा... आखिरकार... गलत रिपोर्टों पर स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा...
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सोशल मीडिया पर कारनामा : जो हुआ नहीं उस पर हौव्वा... आखिरकार... गलत रिपोर्टों पर स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा...
केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने आज बताया कि 01 अप्रैल, 2019 को अधिसूचना जारी करने अर्थात कर आकलन वर्ष 2019-20 के प्रथम दिन से लेकर अब तक आईटीआर-2 और आईटीआर-3 सहित किसी भी आयकर रिटर्न (आईटीआर) फॉर्म में कोई भी परिवर्तन नहीं किया गया है। सोशल मीडिया में इस आशय की रिपोर्ट आई थीं कि 11 जुलाई, 2019 को आईटीआर फॉर्म में व्यापक बदलाव किए जाने के कारण आईटीआर-2 और आईटीआर-3 में आयकर रिटर्न भरने में करदाताओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
बताया गया है कि सभी आईटीआर फॉर्म की ई-फाइलिंग के लिए संबंधित सॉफ्टवेयर यूटिलिटी को काफी पहले ही जारी कर दिया गया है। आईटीआर-2 और आईटीआर-3 की ई-फाइलिंग के लिए संबंधित यूटिलिटी को क्रमशः 02 मई और 10 मई, 2019 को जारी किया गया था। हालांकि, सॉफ्टवेयर यूटिलिटी को अद्यतन करना एक गतिशील प्रक्रिया है। उपयोगकर्ताओं (यूजर)/ रिटर्न दाखिल करने वालों की ओर से प्राप्त जानकारियों के अनुसार इसका निरंतर अद्यतन किया जाता है।
यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यूटिलिटी को अद्यतन करने से रिटर्न दाखिल करने में कोई परेशानी नहीं होती है, क्योंकि करदाताओं को उस समय उपलब्ध यूटिलिटी का उपयोग करते हुए रिटर्न दाखिल करने की अनुमति दी जाती है। उदाहरण के लिए, संबंधित यूटिलिटी का उपयोग कर अब तक 85 लाख से भी अधिक करदाताओं ने रिटर्न दाखिल किए हैं, जबकि इस यूटिलिटी को भी बाद में अपडेट या अद्यतन किया गया है। अतः यह धारणा गलत है कि आईटीआर फॉर्म में परिवर्तन किए जाने के कारण करदाता रिटर्न दाखिल करने में समर्थ नहीं हो पा रहे हैं। दरअसल उस समय तक जारी यूटिलिटी का उपयोग कर 1.38 करोड़ से भी अधिक करदाता अपने रिटर्न बाकायदा दाखिल कर चुके हैं। भले ही करदाताओं की सहूलियत के लिए यूटिलिटी को नियमित रूप से अपडेट किया जाता रहा है, लेकिन यूटिलिटी के पिछले वर्जन का उपयोग कर दाखिल किए गए रिटर्न आगे भी वैध माने जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि आवश्यक जानकारियां (फीडबैक) मिलने पर ही आईटीआर फॉर्म की यूटिलिटी को अपडेट किया जाता है और इसका मुख्य उद्देश्य ई-फाइलिंग को आसान करते हुए करदाताओं पर अनुपालन बोझ को कम करना होता है। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष पहले से ही भरे हुए रिटर्न फॉर्म उपलब्ध कराने की सुविधा दी गई है, जो टीडीएस स्टेटमेंट में उपलब्ध कराई गई सूचनाओं पर आधारित हैं। बाद में संबंधित यूटिलिटी में इस सुविधा को अपडेट कर दिया गया है। इससे रिटर्न फॉर्म भरने में करदाताओं को निश्चित तौर पर काफी सहूलियत होगी।
यह बात दोहराई जाती है कि अधिसूचित आईटीआर फॉर्म में कोई बदलाव नहीं किया गया है। केवल संबंधित यूटिलिटी को अपडेट किया गया है, ताकि करदाताओं को सहूलियत हो सके। अतः यह कहना कि 11 जुलाई, 2019 को आईटीआर-2 और आईटीआर-3 में अनेक बदलाव किए गए हैं, उससे सही तस्वीर उभर कर सामने नहीं आती है।
PIB
बताया गया है कि सभी आईटीआर फॉर्म की ई-फाइलिंग के लिए संबंधित सॉफ्टवेयर यूटिलिटी को काफी पहले ही जारी कर दिया गया है। आईटीआर-2 और आईटीआर-3 की ई-फाइलिंग के लिए संबंधित यूटिलिटी को क्रमशः 02 मई और 10 मई, 2019 को जारी किया गया था। हालांकि, सॉफ्टवेयर यूटिलिटी को अद्यतन करना एक गतिशील प्रक्रिया है। उपयोगकर्ताओं (यूजर)/ रिटर्न दाखिल करने वालों की ओर से प्राप्त जानकारियों के अनुसार इसका निरंतर अद्यतन किया जाता है।
यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यूटिलिटी को अद्यतन करने से रिटर्न दाखिल करने में कोई परेशानी नहीं होती है, क्योंकि करदाताओं को उस समय उपलब्ध यूटिलिटी का उपयोग करते हुए रिटर्न दाखिल करने की अनुमति दी जाती है। उदाहरण के लिए, संबंधित यूटिलिटी का उपयोग कर अब तक 85 लाख से भी अधिक करदाताओं ने रिटर्न दाखिल किए हैं, जबकि इस यूटिलिटी को भी बाद में अपडेट या अद्यतन किया गया है। अतः यह धारणा गलत है कि आईटीआर फॉर्म में परिवर्तन किए जाने के कारण करदाता रिटर्न दाखिल करने में समर्थ नहीं हो पा रहे हैं। दरअसल उस समय तक जारी यूटिलिटी का उपयोग कर 1.38 करोड़ से भी अधिक करदाता अपने रिटर्न बाकायदा दाखिल कर चुके हैं। भले ही करदाताओं की सहूलियत के लिए यूटिलिटी को नियमित रूप से अपडेट किया जाता रहा है, लेकिन यूटिलिटी के पिछले वर्जन का उपयोग कर दाखिल किए गए रिटर्न आगे भी वैध माने जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि आवश्यक जानकारियां (फीडबैक) मिलने पर ही आईटीआर फॉर्म की यूटिलिटी को अपडेट किया जाता है और इसका मुख्य उद्देश्य ई-फाइलिंग को आसान करते हुए करदाताओं पर अनुपालन बोझ को कम करना होता है। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष पहले से ही भरे हुए रिटर्न फॉर्म उपलब्ध कराने की सुविधा दी गई है, जो टीडीएस स्टेटमेंट में उपलब्ध कराई गई सूचनाओं पर आधारित हैं। बाद में संबंधित यूटिलिटी में इस सुविधा को अपडेट कर दिया गया है। इससे रिटर्न फॉर्म भरने में करदाताओं को निश्चित तौर पर काफी सहूलियत होगी।
यह बात दोहराई जाती है कि अधिसूचित आईटीआर फॉर्म में कोई बदलाव नहीं किया गया है। केवल संबंधित यूटिलिटी को अपडेट किया गया है, ताकि करदाताओं को सहूलियत हो सके। अतः यह कहना कि 11 जुलाई, 2019 को आईटीआर-2 और आईटीआर-3 में अनेक बदलाव किए गए हैं, उससे सही तस्वीर उभर कर सामने नहीं आती है।
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