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तीन हज़ार से अधिक गीत ग़ज़ल छंदों के रचयिता राजेन्द्र स्वर्णकार सम्मानित
खबरों में बीकानेर 🎤 🌐 ✍️
तीन हज़ार से अधिक गीत ग़ज़ल छंदों के रचयिता राजेन्द्र स्वर्णकार सम्मानित
बीकानेर में कवि चौपाल द्वारा लगभग तीन सौ मौलिक धुनों के निर्माता एवं तीन हज़ार से अधिक गीत ग़ज़ल छंदों के रचयिता ब्राह्मण स्वर्णकार समाज के कवि गीतकार राजेन्द्र स्वर्णकार का किया गया सम्मान !
इस अवसर पर स्वर्णकार ने अपने काव्यपाठ का प्रारंभ कविता की व्याख्या में लिखे दोहे से किया -
"कथ्य, शिल्प, लय, भाव का, कविता मन का खेल !!"
तत्पश्चात दुर्मिल सवैया रचना प्रस्तुत की ।
"सकुचाय रही, शरमाय रही, हरषाय रही, मन मांय अली
छलिया मनमोहन आय अचानक आन मिल्यो मधु कुंज गली"
राजेन्द्र स्वर्णकार द्वारा लिखे गए कृष्ण राधा और बांसुरी संबंधी मनहरण कवित्त की शृंखला सर्वत्र पसंद की जाती है, यहां भी इन छंदों की फ़रमाइश हुई ।
"किस किस लीला का बखान करूं सांवरा तो, चतुर सयाना पक्का पूरा लीलाधारी है !"
"सूरदास मीरा रसखान ने किया ज्यों ; वैसा, कृष्ण-गुण-गान कवि कौन कर पाएगा ?"
"नहीं ब्रज-सम माटी मेरे मरुधर की रे !
हमारे लिए तो यही केशर-चंदन है !"
सहित नौ-दस कवित्त के सस्वर सरस प्रस्तुतिकरण को मंच और उपस्थित जनसमूह द्वारा पसंद किया गया... ... ...
कार्यक्रम की अध्यक्षता समालोचक डॉ.उमाकांत गुप्त ने की, और विशिष्ट अतिथि थे संस्कृत के विद्वान डॉ.रजनीरमण झा । मंच पर प्रमोद शर्मा और राजस्थानी के व्याख्याता गौरीशंकर प्रजापत भी थे ।
कवि चौपाल के अध्यक्ष रामेश्वर बाड़मेरा ने स्वर्णकार के लिए लिखे प्रशस्तिपत्र का वाचन किया...
संचालनराजस्थली पत्रिका के संपादक साहित्यकार रवि पुरोहित ने किया ।
कवि चौपाल के संरक्षक नेमचंद गहलोत ने स्वर्णकार के सम्मान में उपहार दिए। कार्यक्रम में राजेन्द्र स्वर्णकार की सहधर्मिणी श्रीमती संपतदेवी का भी शॉल पुष्पमाला द्वारा सम्मान किया गया ।
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तीन हज़ार से अधिक गीत ग़ज़ल छंदों के रचयिता राजेन्द्र स्वर्णकार सम्मानित
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तीन हज़ार से अधिक गीत ग़ज़ल छंदों के रचयिता राजेन्द्र स्वर्णकार सम्मानित
बीकानेर में कवि चौपाल द्वारा लगभग तीन सौ मौलिक धुनों के निर्माता एवं तीन हज़ार से अधिक गीत ग़ज़ल छंदों के रचयिता ब्राह्मण स्वर्णकार समाज के कवि गीतकार राजेन्द्र स्वर्णकार का किया गया सम्मान !
इस अवसर पर स्वर्णकार ने अपने काव्यपाठ का प्रारंभ कविता की व्याख्या में लिखे दोहे से किया -
"कथ्य, शिल्प, लय, भाव का, कविता मन का खेल !!"
तत्पश्चात दुर्मिल सवैया रचना प्रस्तुत की ।
"सकुचाय रही, शरमाय रही, हरषाय रही, मन मांय अली
छलिया मनमोहन आय अचानक आन मिल्यो मधु कुंज गली"
राजेन्द्र स्वर्णकार द्वारा लिखे गए कृष्ण राधा और बांसुरी संबंधी मनहरण कवित्त की शृंखला सर्वत्र पसंद की जाती है, यहां भी इन छंदों की फ़रमाइश हुई ।
"किस किस लीला का बखान करूं सांवरा तो, चतुर सयाना पक्का पूरा लीलाधारी है !"
"सूरदास मीरा रसखान ने किया ज्यों ; वैसा, कृष्ण-गुण-गान कवि कौन कर पाएगा ?"
"नहीं ब्रज-सम माटी मेरे मरुधर की रे !
हमारे लिए तो यही केशर-चंदन है !"
सहित नौ-दस कवित्त के सस्वर सरस प्रस्तुतिकरण को मंच और उपस्थित जनसमूह द्वारा पसंद किया गया... ... ...
कार्यक्रम की अध्यक्षता समालोचक डॉ.उमाकांत गुप्त ने की, और विशिष्ट अतिथि थे संस्कृत के विद्वान डॉ.रजनीरमण झा । मंच पर प्रमोद शर्मा और राजस्थानी के व्याख्याता गौरीशंकर प्रजापत भी थे ।
कवि चौपाल के अध्यक्ष रामेश्वर बाड़मेरा ने स्वर्णकार के लिए लिखे प्रशस्तिपत्र का वाचन किया...
संचालनराजस्थली पत्रिका के संपादक साहित्यकार रवि पुरोहित ने किया ।
कवि चौपाल के संरक्षक नेमचंद गहलोत ने स्वर्णकार के सम्मान में उपहार दिए। कार्यक्रम में राजेन्द्र स्वर्णकार की सहधर्मिणी श्रीमती संपतदेवी का भी शॉल पुष्पमाला द्वारा सम्मान किया गया ।
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