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ओशो सुरधाम ध्यान केंद्र में कवियों ने समा बांधा
अजमेर । *नवमानव सृजनशील चेतना समिति* की ओर से 21-7-19 को भदादा बाग़ के पीछे स्थित *ओशो सुरधाम ध्यान केंद्र* में मासिक काव्य-गोष्ठी का आयोजन किया गया। अध्यक्षता व संचालन संस्था संयोजक डॉ एसके लोहानी ख़ालिस ने किया, मुख्य अतिथि थे राधेश्याम गर्ग अभिनव,विशिष्ट अतिथि थे फतेहसिंह लोढ़ा व नरेंद्र दाधीच। अभिनव की सरस्वती वंदना के साथ काव्यगोष्ठी का शुभारंभ हुआ।
योगेन्द्र सक्सेना योगी ने 'हर-हर मोदी घर-घर मोदी गूंज रहा है नारा,प्रचण्ड बहुमत पाकर मोदी हो गया जन-जन का प्यारा', श्यामसुन्दर तिवाडी मधुप ने 'मतवाले पेड़', ओम उज्जवल ने 'गुरु ज्ञान का भंडार है,अनगढ पत्थर को बनाए हीरा', गुलाब मीरचन्दानी ने 'गणतन्त्र आज गनतंत्र हो गया,मेरे देश को ये क्या हो गया', निपुण शुक्ला ने 'होना हो नाराज तो बेशक होइये,पर यूं बैठकर न मुकद्दर पे रोइये', डॉ महावीर बैरागी ने 'दर्द की पीड़ को तबस्सुम बनाओ तो जानें,सूखे हुए लबों पे कुछ फूल खिलाओ तो जानें', डॉ एसके लोहानी ख़ालिस ने गजलें 'उसके प्यार का ये अजब सिलसिला है,उसको शिकवा ना हमको गिला है' एवं 'ऐ खुदा मैं नहीं जानता तू कहाँ बसता है,मेरा दिल बस तेरी याद में रमा रहता है', प्रह्लाद सागर ने 'मुझे एक पत्थर बनाना जमीं पर,जरुरत जहां हो लगाना जमीं पर', अरुण अजीब ने जो मुकम्मल हो वही तस्वीर बन जायेंगे हम,रफ्ता-रफ्ता ख्वाब के काबिल बन जायेंगे हम', अजीज जख्मी ने 'तुझे खबर ही नहीं है तेरे लिए शब भर,चिराग दिल के जला किए शब भर' जैसी बेहतरीन रचनायें सुनाकर गोष्ठी में चार चांद लगा दिए।
इसी प्रकार राष्ट्रीय कवि नरेंद्र दाधीच ने सुमधुर गीत 'जब तुम्हारा खत मिला इतिहास वाली पुस्तको में,उसमें थी जो हाँ लिखी वो देर कर दी पढते-पढते', महेन्द्र शर्मा ने बेटी विदाई गीत 'जैसे इस घर को मह्काया उसको भी महकाती रहना,पलकें भीग भले जाएं मगर तुम मुस्काती रहना', राधेश्याम गर्ग अभिनव ने 'कश्ती है मझधार में साहिल पे मिल लूँगा,फूल हूँ एक कंवल का सुबह खिल उठूँगा' और फतेहसिंह लोढ़ा ने 'जिनके पास नहीं है वाणी,वे भी हैं अपने से प्राणी' सुनाकर कहा कि मैंने पहली बार एक साथ 18 कवियों की गरिमामय उपस्थिति में ऐसी सरस व सफल काव्यगोष्ठी देखी है। कृष्णा माहेश्वरी,जमनालाल बायती,शशि ओझा व चिरंजीलाल टाँक ने भी अपनी रचनायें पढीं।
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ओशो सुरधाम ध्यान केंद्र में कवियों ने समा बांधा
अजमेर । *नवमानव सृजनशील चेतना समिति* की ओर से 21-7-19 को भदादा बाग़ के पीछे स्थित *ओशो सुरधाम ध्यान केंद्र* में मासिक काव्य-गोष्ठी का आयोजन किया गया। अध्यक्षता व संचालन संस्था संयोजक डॉ एसके लोहानी ख़ालिस ने किया, मुख्य अतिथि थे राधेश्याम गर्ग अभिनव,विशिष्ट अतिथि थे फतेहसिंह लोढ़ा व नरेंद्र दाधीच। अभिनव की सरस्वती वंदना के साथ काव्यगोष्ठी का शुभारंभ हुआ।
योगेन्द्र सक्सेना योगी ने 'हर-हर मोदी घर-घर मोदी गूंज रहा है नारा,प्रचण्ड बहुमत पाकर मोदी हो गया जन-जन का प्यारा', श्यामसुन्दर तिवाडी मधुप ने 'मतवाले पेड़', ओम उज्जवल ने 'गुरु ज्ञान का भंडार है,अनगढ पत्थर को बनाए हीरा', गुलाब मीरचन्दानी ने 'गणतन्त्र आज गनतंत्र हो गया,मेरे देश को ये क्या हो गया', निपुण शुक्ला ने 'होना हो नाराज तो बेशक होइये,पर यूं बैठकर न मुकद्दर पे रोइये', डॉ महावीर बैरागी ने 'दर्द की पीड़ को तबस्सुम बनाओ तो जानें,सूखे हुए लबों पे कुछ फूल खिलाओ तो जानें', डॉ एसके लोहानी ख़ालिस ने गजलें 'उसके प्यार का ये अजब सिलसिला है,उसको शिकवा ना हमको गिला है' एवं 'ऐ खुदा मैं नहीं जानता तू कहाँ बसता है,मेरा दिल बस तेरी याद में रमा रहता है', प्रह्लाद सागर ने 'मुझे एक पत्थर बनाना जमीं पर,जरुरत जहां हो लगाना जमीं पर', अरुण अजीब ने जो मुकम्मल हो वही तस्वीर बन जायेंगे हम,रफ्ता-रफ्ता ख्वाब के काबिल बन जायेंगे हम', अजीज जख्मी ने 'तुझे खबर ही नहीं है तेरे लिए शब भर,चिराग दिल के जला किए शब भर' जैसी बेहतरीन रचनायें सुनाकर गोष्ठी में चार चांद लगा दिए।
इसी प्रकार राष्ट्रीय कवि नरेंद्र दाधीच ने सुमधुर गीत 'जब तुम्हारा खत मिला इतिहास वाली पुस्तको में,उसमें थी जो हाँ लिखी वो देर कर दी पढते-पढते', महेन्द्र शर्मा ने बेटी विदाई गीत 'जैसे इस घर को मह्काया उसको भी महकाती रहना,पलकें भीग भले जाएं मगर तुम मुस्काती रहना', राधेश्याम गर्ग अभिनव ने 'कश्ती है मझधार में साहिल पे मिल लूँगा,फूल हूँ एक कंवल का सुबह खिल उठूँगा' और फतेहसिंह लोढ़ा ने 'जिनके पास नहीं है वाणी,वे भी हैं अपने से प्राणी' सुनाकर कहा कि मैंने पहली बार एक साथ 18 कवियों की गरिमामय उपस्थिति में ऐसी सरस व सफल काव्यगोष्ठी देखी है। कृष्णा माहेश्वरी,जमनालाल बायती,शशि ओझा व चिरंजीलाल टाँक ने भी अपनी रचनायें पढीं।
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