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लगातार जारी भीषण गर्मी में स्वास्थ्य विभाग ने फिर से दोहराया लू-तापघात के लिए अलर्ट
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लगातार जारी भीषण गर्मी में स्वास्थ्य विभाग ने फिर से दोहराया लू-तापघात के लिए अलर्ट
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आमजन धूप में निकलने से पहले बरतें सावधानी : जिला कलेक्टर
लगातार जारी गर्मी में स्वास्थ्य विभाग ने फिर से दोहराया लू-तापघात के लिए अलर्ट
बीकानेर। तापमान में लगातार जारी उछाल व भस्म कर देने वाली गर्मी के मद्देनजर जिला कलेक्टर कुमार पाल गौतम द्वारा आमजन से बचाव रखने की अपील की गई है। विशेषकर निर्जला एकादशी के अवसर पर शुभकामनाओं के साथ एहतियात बरतने पर जोर दिया है। बुधवार को जन सुनवाई के दौरान उन्होंने विभाग के आला अधिकारीयों विभाग को सभी व्यवस्थाएं चाक-चैबंद करने व चिकित्सकों-मैदानी कार्यकर्ताआंे को अलर्ट करनेे के निर्देश दिए। जिला कलेक्टर के निर्देश पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य ने फिर से ग्राम स्तर तक लू-तापघात से अलर्ट दोहराया है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. देवेन्द्र चौधरी ने बताया कि गर्मी के तीखे तेवर व सूखे मौसम में लू-तापघात होने की आशंका बढ़ गई है इसलिए विभाग को इससे प्रभावितों को तुरंत राहत देने हेतु पूर्व तैयारियों के निर्देश फिर से जारी किए गए हैं। उन्होंने इस क्रम में चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ व आशा सहयोगिनियों के माध्यम से आमजन में जागरूकता लाने व बचाव के साथ-साथ प्राथमिक उपचार सिखाने पर जोर दिया। उन्होंने सभी अस्पतालों में लू-तापघात के रोगियों हेतु कुछ बैड आरक्षित रखते हुए वहां कूलर व शुद्ध पेयजल की व्यवस्था, संस्थान में रोगी के उपचार हेतु आपातकालीन किट में ओर.आर.एस., ड्रिपसेट, जी.एन.एस.ध्जी.डी.डब्लूध्रिगरले कट्रेट (आर.एल.) फ्लूड एवं आवश्यक दवाईयां रखने के निर्देश दिए हैं।
डिप्टी सीएमएचओ डॉ. इंदिरा प्रभाकर ने सभी खंड मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि समाचार पत्रों में प्रकाशित लू-तापघात के रोगियों की सूचना का सत्यापन करते हुए कुल प्रभावित रोगियों की सूचना साप्ताहिक रूप से भिजवाएं। प्रचार-प्रसार के माध्यम से जनसाधारण को लू-तापघात से बचाव एवं उपचार हेतु जानकारी अपने स्तर से समय-समय पर प्रसारित करावें। प्रत्येक सोमवार को निर्धारित प्रपत्र में साप्ताहिक सूचना भिजवाया जाना सुनिश्चित करें।
लू तापघात के लक्षण
सीएमएचओ डॉ. चौधरी ने बताया कि शरीर में लवण व पानी अपर्याप्त होने पर विषम गर्म वातावरण में लू व तापघात निम्नांकित लक्षणों के द्वारा प्रभावी होता है-
ऽ सिर का भारीपन व सिरदर्द।
ऽ अधिक प्यास लगाना व शरीर में भारीपन के साथ थकावट।
ऽ जी मिचलाना, सिर चकराना व शरीर का तापमान बढ़ना (105 एफ या अधिक)।
ऽ पसीना आना बंद होना, मुॅह का लाल हो जाना व त्वचा का सूखा होना।
ऽ अत्यधिक प्यास का लगना, बेहोशी जैसी स्थिति का होनाध्बेहोश होना।
क्या है लू तापघात ?
चिकित्सकीय दृष्टि से लू तापघात के लक्षण लवण व पानी की आवश्यकता व अनुपात विकृति के कारण होती है। मस्तिष्क का एक केंद्र जो मानव के तापमान को सामान्य बनाए रखता है, काम करना छोड़ देता है। लाल रक्त कोशिकाएं रक्त वाहिनियों में टूट जाती हैं व कोशिकाओं में जो पोटेशियम लवण होता है वह रक्त संचार में आ जाता है जिससे ह्रदय गति, शरीर के अन्य अंग व अवयव प्रभावित होकर लू तापघात के रोगी को मौत के मुंह में धकेल देते हैं।
लू-तापघात से बचाव के लिये ये सावधानियां बरतंे-
सीएमएचओ डॉ. चैधरी ने आम जन से अपील की है कि
ऽ जहां तक संभव हो धूप मंे न निकलंे, धूप में शरीर पूर्ण तरह से ढ़का हो। धूप में बाहर जाते समय हमेशा सफेद या हल्के रंग के ढीले व सूती कपड़ों का उपयोग करें।
ऽ बहुत अधिक भीड़, गर्म घुटन भरे कमरों से बचें, रेल बस आदि की यात्रा अत्यावश्यक होने पर ही करें ।
ऽ बिना भोजन किये बाहर न निकलें । भोजन करके एवं पानी पी कर ही बाहर निकलें ।
ऽ सड़े-गले फल व बासी सब्जियों का उपयोग हरगिज ना करें।
ऽ गर्दन के पिछले भाग कान एवं सिर को गमछे या तौलिये से ढ़क कर ही धूप मंे निकलें । रंगीन चश्मंे एवं छतरी का प्रयोग करें।
ऽ गर्मी मे हमेशा पानी अधिक मात्रा मे पियंे एवं पेय पदार्थो जैसे निंबू पानी ,नारियल पानी, ज्यूस आदि का प्रयोग करें।
ऽ लू तापघात से प्रायः कुपोषित बच्चे, वृद्व गर्भवती महिलाऐं ,श्रमिक अदि शीध्र प्रभावित हो सकते हैं। इन्हे प्रायः 10 बजे से सांय 6 बजें तक तेज गर्मी से बचाने हेतु छायादार ठंडे स्थान पर रहने का प्रयास करें।
ऽ अकाल राहत कार्यों पर अथवा श्रमिकों के कार्यस्थल पर छाया एवं पानी का पूर्ण प्रबन्ध रखा जावे ताकि श्रमिक थोडी-थोडी देर में छायादार स्थानों पर विश्राम कर सकंे।
लू-तापघात से प्रभावित व्यक्ति का तत्काल ऐसे करें प्राथमिक उपचार
ऽ लू तापघात से प्रभावित रोगी को तुरंत छायादार जगह पर कपडे ढीले कर लेटा दिया जावे एवं हवा करें ।
ऽ रोगी को होश मे आने की दशा मे उसे ठंडे पेय पदार्थ, जीवन रक्षक घोल, कच्चा आम का पना दंे। प्याज का रस अथवा जौ के आटे को भी ताप नियंत्रण हेतु मला जा सकता है ।
ऽ रोगी के शरीर का ताप कम करने के लिये यदि संभव हो तो उसे ठंडे पानी से नहलाये या उसके शरीर पर ठंडे पानी की पट्टीया रखकर पूरे शरीर को ढंक दे। इस प्रक्रिया को तब तक दोहराये जब तक की शरीर का ताप कम नही हो जाता है ।
यदि उक्त सावधानी के पश्चात भी मरीज ठीक नही होता है तो उसे तत्काल निकट की चिकित्सा संस्थान ले जाया जाए।
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