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आधुनिक राजस्थानी कहानी के प्रवर्तक थे व्यास
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आधुनिक राजस्थानी कहानी के प्रवर्तक थे व्यास
बीकानेर। आधुनिक राजस्थानी
कहानी के प्रथम कथाकार मुरलीधर व्यास
'राजस्थानीÓ की 121 वी जयंती
बुधवार को राजस्थानी भाषा दिवस के
रूप में मनाई गई । इस अवसर पर प्रोटॉन
प्लस इंस्टीट्यूट में राजस्थानी काव्य गोष्ठी
का आयोजन किया गया । गोष्ठी की
अध्यक्षता करते हुए कवि कथाकार कमल
रंगा ने कहा कि राजस्थानी एक सशक्त
भाषा है । हमें अपनी मातृभाषा को
स मान दिलाने के लिए एकजुट होकर
आगे आना चाहिए । इस अवसर पर रंगा
ने अपनी लघु कविताएं प्रस्तुत की।
समालोचक एवं शिक्षाविद् डॉ. मदन
मोहन व्यास 'एसपीÓ ने कहा कि
कीर्तिशेष मुरलीधर व्यास जैसे लोगों में
अपनी राजस्थानी भाषा के लिए एक
जुनून देखने में आता है। उनके समय में
आज जैसे आधुनिक संसाधन नहीं थे
फिर भी उन्होंने साहित्य को समृद्ध किया।
कार्यक्रम में कवि संजय आचार्य वरुण ने
गीत माथे पर जद बूंद पसीने री छलके,
हाथों पर तद ही तो मोतीड़ा पळकै....
पढ़कर मुरलीधर व्यास को श्रद्धा सुमन
अर्पित किए। कवयित्री मनीषा आर्य सोनी
ने गीत 'एकर चाल रे हठीला, नगर
बीकाणे खांनी चाल Ó सुनाकर बीकानेर
के सौंदर्य का वर्णन किया । गीतकार
लीलाधर सोनी ने 'जीवन रा दिन चार
जागती ज्योति है Ó छंद सुना कर वाह-वाह
लूटी। हास्य कवि बाबूलाल छंगाणी ने
व्यंग्यात्मक रचना पढ़ी। कवयित्री मोनिका
गौड़ ने राजस्थानी गीत के माध्यम से
कन्या भ्रूण हत्या रोकने का संदेश दिया ।
मुरलीधर व्यास राजस्थानी स्मृति संस्थान
की ओर से श्रीनाथ व्यास ने कवियों को
स्मृति चिन्ह प्रदान कर उनका स मान
किया ।आगंतुकों का आभार योगेश व्यास
'राजस्थानीÓ ने व्यक्त किया।
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बीकानेर। आधुनिक राजस्थानी
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'राजस्थानीÓ की 121 वी जयंती
बुधवार को राजस्थानी भाषा दिवस के
रूप में मनाई गई । इस अवसर पर प्रोटॉन
प्लस इंस्टीट्यूट में राजस्थानी काव्य गोष्ठी
का आयोजन किया गया । गोष्ठी की
अध्यक्षता करते हुए कवि कथाकार कमल
रंगा ने कहा कि राजस्थानी एक सशक्त
भाषा है । हमें अपनी मातृभाषा को
स मान दिलाने के लिए एकजुट होकर
आगे आना चाहिए । इस अवसर पर रंगा
ने अपनी लघु कविताएं प्रस्तुत की।
समालोचक एवं शिक्षाविद् डॉ. मदन
मोहन व्यास 'एसपीÓ ने कहा कि
कीर्तिशेष मुरलीधर व्यास जैसे लोगों में
अपनी राजस्थानी भाषा के लिए एक
जुनून देखने में आता है। उनके समय में
आज जैसे आधुनिक संसाधन नहीं थे
फिर भी उन्होंने साहित्य को समृद्ध किया।
कार्यक्रम में कवि संजय आचार्य वरुण ने
गीत माथे पर जद बूंद पसीने री छलके,
हाथों पर तद ही तो मोतीड़ा पळकै....
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अर्पित किए। कवयित्री मनीषा आर्य सोनी
ने गीत 'एकर चाल रे हठीला, नगर
बीकाणे खांनी चाल Ó सुनाकर बीकानेर
के सौंदर्य का वर्णन किया । गीतकार
लीलाधर सोनी ने 'जीवन रा दिन चार
जागती ज्योति है Ó छंद सुना कर वाह-वाह
लूटी। हास्य कवि बाबूलाल छंगाणी ने
व्यंग्यात्मक रचना पढ़ी। कवयित्री मोनिका
गौड़ ने राजस्थानी गीत के माध्यम से
कन्या भ्रूण हत्या रोकने का संदेश दिया ।
मुरलीधर व्यास राजस्थानी स्मृति संस्थान
की ओर से श्रीनाथ व्यास ने कवियों को
स्मृति चिन्ह प्रदान कर उनका स मान
किया ।आगंतुकों का आभार योगेश व्यास
'राजस्थानीÓ ने व्यक्त किया।










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