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21 मार्च 2026 शनिवार
खबरों में बीकानेर
✒️@Mohan Thanvi
महायोगी अवधूत संत श्री श्री 1008 श्री पूर्णानन्दजी महाराज की 60 वीं पुण्यतिथि
पानी से माखन निकाल सकते हैं, लेकिन हरि भजन के बिना मुक्ति संभव नहीं- अखण्डानन्द महाराज
बीकानेर । महायोगी अवधूत संत श्री श्री 1008 श्री पूर्णानन्दजी महाराज की 60 वीं पुण्यतिथि पर श्री बंशीलाल राठी की बगीची, भीनासर स्थित समाधि स्थल पर 12 से 20 मार्च तक विभिन्न धार्मिक आयोजन संपन्न हुए। आयोजनकर्ता समिति के गौरीशंकर सारड़ा ने बताया कि इस बार कार्यक्रम के दौरान श्री श्री 1008 अवधूत श्री चन्दन देव महाराज एवं अवधूत आश्रम ऋषिकेश के शास्त्री श्री रघुवरदयाल के शिष्य, श्री कृष्णानंद सरस्वती काशी से, शिवबाड़ी मठ के स्वामी विमर्शानन्द महाराज और मुरली मनोहर धोरा, भीनासर से संत श्यामसुंदर महाराज ने कार्यक्रम के अंतिम दिन समापन अवसर पर धर्म ध्यान के ज्ञान से श्रद्धालुओं को गृहस्थ, समाज और धर्म की शिक्षा दी।
इस अवसर पर शिवबाड़ी मठ के स्वामी विमर्शानन्द महाराज ने कहा कि भीनासर की धरा धन्य है, जहां महान विभूतियों का जन्म हुआ है। सेठ बंशीलाल राठी से लेकर गौरीशंकर सारड़ा का एक लम्बा इतिहास है, जो ना केवल वाणिज्य व्यापार में प्रगति कर देश और दुनिया में अपनी जन्मस्थली का नाम रोशन कर रहे हैं, अपितु धर्म ध्यान में भी प्रवृत रहते हैं। श्यामसुंदर महाराज ने कहा कि भीनासर की भूमि पर मुरली मनोहर मैदान के पास इस प्रकार के आयोजन से सुख और शांति सनातन धर्म प्रेमियों को मिलती है। इसके लिए सारड़ा परिवार साधुवाद के पात्र हैं। ऋषिकेश से पधारे अखण्डानंद महाराज ने धर्म ध्यान से अवगत कराते हुए श्रद्धालु बहनों व माताओं को संबोधित करते हुए महाभारत के काल का प्रसंग बताते हुए कहा कि अर्जुन कहा करते थे कि मुझे इंद्र भी बना दो तो मेरे दुख दूर नहीं होंगे। गोस्वामी तुलसीदास ने भी कहा कि मनुष्य पानी से माखन चाहता है, रेत से घी चाहता है, यह संभव हो सकता है। लेकिन हरि के भजनों के बिना मुक्ति नहीं मिलती है। यह सदैव याद रखना चाहिए। आयोजन के अंत में भक्तों के लिए महाप्रसादी का आयोजन रखा गया। अंत में भक्तों में प्रसाद वितरण किया गया।





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