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2 फरवरी 2026 सोमवार
खबरों में बीकानेर
✒️@Mohan Thanvi
डॉ बसंती हर्ष के सृजन में भारतीयता का समुचित समावेश मिलता है - डॉ उमाकांत गुप्त
यात्रा संस्मरण सहित 23 पुस्तकों की रचयिता हुईं डॉ. बसंती हर्ष
डॉ बसंती हर्ष के सृजन में भारतीयता का समुचित समावेश मिलता है - डॉ उमाकांत गुप्त
यात्रा संस्मरण सहित 23 पुस्तकों की रचयिता हुईं डॉ. बसंती हर्ष
तीन पुस्तकों का लोकार्पण समारोह
- मोहन थानवी
बीकानेर 1 फरवरी 2026 रविवार
हर्ष फाउंडेशन, बीकानेर द्वारा डॉ बसंती हर्ष की नवीनतम सृजित तीन पुस्तकों जीवन की राह, समाजोपयोगी निबंध एवं मेरे यात्रा संस्मरण के लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। अंबेडकर सर्किल के पास हर्ष लैबोरेटरी हाल में हुए इस साहित्यिक अनुष्ठान की अध्यक्षता डॉ अजय जोशी ने की। मुख्य अतिथि डॉ उमाकांत गुप्त, विशेष अतिथि डॉ मदन सैनी एवं विशिष्ट अतिथि बुलाकी शर्मा थे। आमंत्रित साहित्य-साधकों एवं संस्कृतिकर्मियों की करतल धवनि की गूंज में अतिथियों एवं लेखिका डॉ बसंती हर्ष ने तीन पुस्तकों जीवन की राह, समाजोपयोगी निबंध एवं मेरे यात्रा संस्मरण का लोकार्पण किया। इसीके साथ डॉ बसंती हर्ष की रचित पुस्तकें 23 हो गईं। समारोह की दो विशेषताओं का उल्लेख समीचीन रहेगा, पहली - यह साहित्यिक अनुष्ठान मध्यांतर के साथ करीब तीन घंटे तक साहित्य साधकों को स्फूर्त करता रहा और अंत तक कोई एक कुर्सी खाली नहीं रही। दूसरी और अबोली विशेषता की ओर संचालक ज्योति प्रकाश रंगा ने ध्यान आकर्षित करते हुए रेखांकित किया कि महिला लेखिका के उपलब्धिपरक सृजन के सम्मान में इस लोकार्पण समारोह में महिलाओं की संख्या पुरुषों की संख्या की बराबरी पर है। समारोह में आगे चलकर महिला साहित्यकारों को पुरुषों का भरपूर सहयोग मिलने पर मुख्य अतिथि उमाकांत गुप्त और विशिष्ट अतिथी बुलाकी शर्मा ने भी अपने उद्बोधन में डॉ एस एन हर्ष के सहयोग को सराहनीय बताते हुए बीकानेर में दम्पतियों द्वारा साहित्य सृजन निमित्त परस्पर सहयोग को सराहा ।
लोकार्पित कृतियों पर प्रथम पाठक के नजरिए से सारगर्भित पत्रवाचन भाषाविद् साहित्यकारों ने किया। डॉ कृष्णा आचार्य ने पुस्तक जीवन की राह के छह खंडों की विशेषताएं रेखांकित करते हुए समालोचनात्मक मत रखे और खूब तालियां बटोरी। इसी प्रकार श्रीमती सरोज भाटी ने पुस्तक समाजोपयोगी निबंध के प्रति और डॉ नमामीशंकर आचार्य ने मेरे यात्रा संस्मरण की लयबद्ध प्रस्तुति और विषय की विविधता को प्रभावी तरीके से रखा। मुख्य अतिथि उमाकांत गुप्त द्वारा अपने उद्बोधन में कहा कि श्रीमती बसंती हर्ष द्वारा रचित तीनों पुस्तकों में भारतीयता का समुचित समावेश मिलता है। विशेष अतिथि मदन सैनी ने यह मूल्यपरक साहित्य सृजन बताया। विशिष्ट अतिथि बुलाकी शर्मा ने अपने उद्बोधन में इन्हें निरंतर सृजन करते हुए, समाज को नई दिशा देने के लिए उत्तम बताया। समारोह अध्यक्ष डॉ अजय जोशी द्वारा अपने उद्बोधन में कहा कि यात्रा संस्मरणों के सृजन की अल्पता खलती है ऐसे में डॉ बसंती हर्ष की लोकार्पित इन पुस्तकों में एक यात्रा संस्मरण साहित्य जगत को सौगात के तौर पर है। बहुआयामी प्रतिभा की धनी डॉ बसंती हर्ष द्वारा रचित साहित्य विविधता से परिपूर्ण सृजन हैं। समारोह का आकर्षण बिंदु डॉ बसंती हर्ष द्वारा अपनी पुस्तकों के रचनाधर्म व विषय वस्तु के बारे में विस्तृत जानकारी देना रहा। साथ ही डॉ बसंती हर्ष ने अपनी कतिचित् पसंदीदा कविताओं को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करते हुए अपने यात्रा संस्मरणों का वाचन भी किया और देर तक तालियां बटोरीं । स्वागत सम्मान की कड़ी में अतिथियों सहित रमेश शर्मा, विजय काल्या, श्रीमती ज्योति वधवा, ज्योति प्रकाश रंगा आदि को उपर्णा, शॉल व स्मृति चिन्ह एवं लोकार्पित पुस्तकों का सेट भेंट किया गया।






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