चुनाव : पर्दे के पीछे - टनल में फंसी सीटों को आक्सीजन के लिए आपरेशन धुआंधार प्रचार...!
- मोहन थानवी
राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 की मतदान तिथि ज्यों-ज्यों नजदीक आ रही है त्यों-त्यों राजनीतिक दलों और निर्दलीय प्रत्याशियों की प्रचार-गतिविधियों में अप्रत्याशित तेजी दिखाई देने लगी है। हालांकि बीते दो दिन दीपावली त्यौहार मनाते हुए निकले लेकिन प्रत्याशियों को दिवाली भी प्रचार-दिवाली के रूप में मनाते हुए देखा गया।
इसी के साथ ही कानाफूसी यह भी सुनाई देने लगी है की करीब करीब 25% सीटें ऐसी हैं जो दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस को जीत के लिए टनल में फंसी हुई हैं। प्रचार रूपी ऑक्सीजन कड़ी मशक्कत मांग रही है। संभव तैयार इसी वजह से दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के स्टार प्रचारक अब धुआंधार प्रचार का श्रीगणेश गणेशजी के माने जाने वाले साप्ताहिक दिवस बुधवार से करने जा रहे हैं। राजनीतिक जगत के जानकारों के अनुसार इनमें कुछ सीटें ऐसी हैं जहां बीते चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को अपेक्षा से कम प्रतिशत वोट मिले जबकि कुछ ऐसी सीटें भी है जहां कांग्रेस को बीते चुनाव में करारी शिकस्त खानी पड़ी थी।
और अब तक के सामने आ रहे समीकरण यह बताते हैं कि ये सीटें ऐसी सिद्ध हो सकती हैं जो जिस दल की झोली में जाएंगी विजय-माला वही पहनेगा। विजय की माला जितनी बड़ी हो उतना ही अच्छा लगेगा इसी वजह से सावधानी बरतते हुए एक राजनीतिक दल ने आलाकमान की नजरों से उतरे अपने एक मंत्री रहे प्रत्याशी को पोस्टर से भी नदारद कर दिया है। इसी प्रकार दूसरे दल के एक केंद्रीय मंत्री और दूसरे मंत्री रहे नेताओं ने अपनी राजनीतिक अदावत को झोली में डाल दोस्ताना स्वरूप को हवा लगने दी है।
टनल में फंसी सीटों को आक्सीजन पहुंचाने के लिए आपरेशन धुआंधार प्रचार का शेड्यूल भी कांग्रेस और भाजपा दोनों ने जारी कर दिया है। इन शेड्यूल को देखते हुए यह सामने आ रहा है कि अब स्टार प्रचारक अपना डेरा राजस्थान में लगाने आ ही रहे हैं। लोग दबी जुबान से तो यह कहने से भी चूक नहीं रहे की दोनों दलों को एक दूसरे के अप्रत्याशित अकल्पनीय आरोप सुनने के लिए तैयार हो जाना चाहिए।
संभवत: अब आरोपों और प्रत्यारोपों से ऑक्सीजन का निर्माण कर टनल में फंसी सीटों को निकालने की जुगत लगाई जाए...!!






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